एसआरएपी कॉलेज बाराचकिया के प्राचार्य निलंबित, दो करोड़ से अधिक की वित्तीय गड़बड़ी उजागर
एसआरएपी कॉलेज, बाराचकिया
बीआरएबीयू प्रशासन ने वित्तीय अनियमितता के गंभीर मामले में कड़ा रुख अपनाया है. एसआरएपी कॉलेज, बाराचकिया के प्राचार्य डॉ. रामनरेश पंडित को पद से निलंबित कर दिया गया है. उन पर करोड़ों रुपये के घोटाले का आरोप है, जिसकी जांच अब तेज होगी.
वित्तीय अनियमितता निलंबन: बीआरए बिहार विश्वविद्यालय (बीआरएबीयू) प्रशासन ने वित्तीय अनियमितता और अनुशासनहीनता के गंभीर मामले में कड़ा रुख अख्तियार किया है. विश्वविद्यालय के अधीन संचालित एसआरएपी कॉलेज, बाराचकिया के प्राचार्य डॉ. रामनरेश पंडित को पद से निलंबित कर दिया गया है. कुलपति के निर्देशानुसार कुलसचिव प्रो. समीर कुमार शर्मा ने इस बाबत आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है. निलंबन अवधि के दौरान डॉ. पंडित का मुख्यालय एलएनडी कॉलेज, मोतिहारी निर्धारित किया गया है. उनके खिलाफ औपचारिक विभागीय कार्रवाई भी प्रारंभ कर दी गई है.
जीवछ कॉलेज मोतीपुर और बाराचकिया में करोड़ों के खेल का आरोप
कुलसचिव प्रो. समीर कुमार शर्मा ने बताया कि डॉ. रामनरेश पंडित जब जीवछ कॉलेज मोतीपुर और एसआरएपी कॉलेज बाराचकिया में प्राचार्य पद पर आसीन थे, तब उनके कार्यकाल में व्यापक स्तर पर वित्तीय हेराफेरी की गई. विश्वविद्यालय स्तर पर कराई गई प्रारंभिक जांच में ही दो करोड़ रुपये से अधिक की सीधी वित्तीय अनियमितता प्रमाणित हो चुकी है. अधिकारियों का कहना है कि पूर्ण ऑडिट और विस्तृत छानबीन पूरी होने के बाद यह घोटाला और बड़ा हो सकता है तथा अनियमितता की राशि में भारी इजाफा होने की संभावना है.
जांच में असहयोग और दस्तावेजों को छिपाने के गंभीर आरोप
प्राचार्य के आचरण और जांच प्रक्रिया में रुकावट डालने को लेकर भी कई बिंदु सामने आए हैं:
- वित्तीय अधिकार सीमित होना: वित्तीय अनियमितताओं की प्रारंभिक शिकायतें मिलने के बाद विश्वविद्यालय ने पूर्व में ही उनके वित्तीय अधिकार सीमित कर दिए थे.
- हाईकोर्ट के आदेश की अनदेखी: मामले को लेकर डॉ. पंडित उच्च न्यायालय गए थे, जहां से न्यायालय ने कुलपति को पूरे कार्यकाल के वित्तीय मामलों की जांच कराने और आरोप बेबुनियाद पाए जाने पर अधिकार बहाल करने का निर्देश दिया था.
- साक्ष्य देने से परहेज: विश्वविद्यालय द्वारा लगातार पत्राचार करने और दो बार विश्वविद्यालय की जांच टीम के कॉलेज पहुंचने के बावजूद उन्होंने विभिन्न मदों में खर्च करोड़ों रुपयों का कोई वैध लेखा-जोखा या वाउचर प्रस्तुत नहीं किया.
- अधूरे दस्तावेज: मामले को लेकर जब वे एमजेसी में गए और विश्वविद्यालय ने कड़ा नोटिस भेजा, तब वे बेहद सीमित व अधूरे कागजात लेकर विश्वविद्यालय मुख्यालय पहुंचे.
जीएसटी, इनकम टैक्स और अवैध नियुक्तियों में भी पकड़ी गई धांधली
वित्तीय सलाहकार की अध्यक्षता में गठित विशेष जांच समिति की विस्तृत रिपोर्ट और अनुशंसा के आधार पर यह दंडात्मक कार्रवाई तय की गई है:
- कर नियमों का खुला उल्लंघन: जांच कमेटी ने पाया कि कॉलेज स्तर पर जीएसटी खाता नहीं खोला गया था और आयकर से संबंधित अनिवार्य वित्तीय नियमों की पूरी तरह अनदेखी की गई.
- अवैध कर्मचारी बहाली: प्राचार्य ने अपने कार्यकाल के दौरान नियमों और स्वीकृत रोस्टर को ताक पर रखकर कॉलेज में मनमाने ढंग से कर्मचारियों की नियुक्तियां भी कर दी थीं.
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