फेक पेमेंट रसीद दिखाकर मोबाइल पार्ट्स की ठगी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़, दिव्यांग मास्टरमाइंड समेत तीन गिरफ्तार

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बरामद मोबाइल व पार्टस

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मुजफ्फरपुर की साइबर पुलिस ने एक अंतरजिला गिरोह का 8 घंटे में पर्दाफाश किया है, जो डिजिटल टूल्स और फर्जी पेमेंट रसीद से थोक व्यापारियों को ठगता था. गिरोह के मुख्य सरगना सहित तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनके पास से लाखों का माल बरामद हुआ है.

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मुजफ्फरपुर साइबर पुलिस: मुजफ्फरपुर जिले की साइबर थाना पुलिस ने डिजिटल टूल्स और फर्जी पेमेंट रसीद के जरिए थोक व्यापारियों को चूना लगाने वाले एक शातिर अंतरजिला गिरोह का महज 8 घंटे के भीतर पर्दाफाश कर दिया है. पुलिस ने गिरोह के मुख्य सरगना सहित तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है. पकड़े गए आरोपियों के पास से ठगी के करीब 1.10 लाख रुपये मूल्य के 188 पीस मोबाइल फोल्डर, अपराध में प्रयुक्त एक बाइक और पांच मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं. गिरोह का मुख्य मास्टरमाइंड शारीरिक रूप से दिव्यांग है, जो घर बैठे ही डिजिटल जालसाजी का पूरा नेटवर्क संचालित कर रहा था.

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1.20 लाख के फर्जी भुगतान का स्क्रीनशॉट भेजकर मंगाया माल

साइबर डीएसपी हिमांशु कुमार ने बताया कि क्राउन फोल्डर दुकान के संचालक भाग्य भूषण ने 19 सितंबर को साइबर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी. पीड़ित व्यापारी ने बताया कि अज्ञात शातिरों ने व्हाट्सएप के जरिए थोक भाव में 210 पीस मोबाइल फोल्डर का ऑर्डर दिया. इसके बाद शातिरों ने 15 सितंबर को 43,000 रुपये और 16 सितंबर को 77,314 रुपये (कुल 1,20,314 रुपये) के बैंक भुगतान का फर्जी स्क्रीनशॉट भेजा. भुगतान की फर्जी रसीद दिखाकर शातिरों ने रैपिडो डिलीवरी कूरियर के जरिए कांटी स्थित छिन्नमस्तिका मंदिर के पास पूरा माल मंगवा लिया. बैंक खाते की जांच करने पर जब पैसे नहीं मिले, तब ठगी का खुलासा हुआ.

एसएसपी के निर्देश पर बनी टीम, 8 घंटे में दबोचा गया मुख्य साजिशकर्ता

वरीय पुलिस अधीक्षक कांतेश कुमार मिश्र के निर्देश पर गठित विशेष साइबर टीम ने तकनीकी सर्विलांस और वैज्ञानिक अनुसंधान के आधार पर जाल बिछाया:

  • दिव्यांग निकला मास्टरमाइंड: पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य साजिशकर्ता मनीष कुमार को गिरफ्तार किया, जिसके पास से ठगी में इस्तेमाल 2 मोबाइल मिले. मनीष चलने-फिरने में असमर्थ है.
  • तकनीकी ज्ञान का दुरुपयोग: मनीष पहले मोबाइल रिपेयरिंग का काम करता था. पार्ट्स और बाजार की समझ होने के कारण उसने थोक कारोबारियों को निशाना बनाया. वह एडिटिंग टूल्स और फर्जी एप्स से असली जैसी दिखने वाली पेमेंट रसीद तैयार करता था.

डिलीवरी उठाने वाला और माल खपाने वाला दुकानदार भी गिरफ्तार

मास्टरमाइंड मनीष की निशानदेही पर पुलिस ने उसके सहयोगी रिमझिम कुमार को बाइक और मोबाइल के साथ दबोचा, जो रैपिडो से डिलीवरी रिसीव करता था. इसके बाद दोनों की स्वीकारोक्ति पर ठगी का माल खरीदने वाले दुकानदार मो. परवेज आलम को भी धर दबोचा गया. परवेज की दुकान से ठगी के 188 पीस मोबाइल फोल्डर बरामद कर लिए गए हैं.

साइबर पुलिस की व्यापारियों से सतर्कता की अपील

साइबर डीएसपी ने व्यवसायियों से अपील की है कि केवल स्क्रीनशॉट या रसीद देखकर माल की डिलीवरी न दें, बल्कि बैंक खाते में राशि क्रेडिट होने का मैसेज और बैलेंस चेक करने के बाद ही सामान भेजें.

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