Exclusive: जाति गणना के बाद बिहार में अब इसकी डिजिटल गणना होगी, जानें सरकार का मेगा प्लान

Published by : Paritosh Shahi Updated At : 06 Apr 2025 6:06 AM

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फोटो प्रतीकात्मक

Prabhat Khabar Exclusive: डिजिटल गणना के माध्यम से न केवल जल संसाधनों और निकायों की वास्तविक स्थिति का पता चलेगा, बल्कि जल के उपयोग और भू-जल स्तर का भी सही आकलन हो सकेगा. जल संसाधन विभाग की ओर से संदर्भ वर्ष 2023-24 के साथ सातवीं लघु सिंचाई गणना, दूसरी जल निकायों की गणना, पहली मध्यम एवं वृहद सिंचाई गणना और पहली जल स्रोतों की गणना पूरे भारतवर्ष में डिजिटल प्रणाली के माध्यम से कराने का निर्णय केंद्र सरकार के जल शक्ति मंत्रालय द्वारा लिया गया है.

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Prabhat Khabar Exclusive, देवेश कुमार, मुजफ्फरपुर: बिहार में अब जाति आधारित गणना की तर्ज पर जल निकायों की डिजिटल गणना की जायेगी. इसका उद्देश्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में मौजूद जल संसाधनों की सही तस्वीर सामने लाना है. राज्य सरकार और केंद्र सरकार मिलकर यह पता लगाएंगे कि बिहार में तेजी से गिरते भू-जल स्तर और नहरों के सूखने के वास्तविक कारण क्या हैं और महत्वपूर्ण जल स्रोत क्यों अपनी पहचान खो रहे हैं.

पूरा खर्च केंद्र सरकार वहन करेगी

योजना एवं विकास विभाग (अर्थ एवं सांख्यिकी निदेशालय) ने इस दिशा में तेजी से काम शुरू कर दिया है. गणना आयुक्त सह प्रधान सचिव के सेंथिल कुमार ने सभी जिलाधिकारियों को इस संबंध में निर्देश जारी कर दिये हैं. यह डिजिटल गणना केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय की निगरानी में होगी और इस पर आने वाला पूरा खर्च केंद्र सरकार वहन करेगी.

2017 के बाद पहली बार 100 प्रतिशत डिजिटल मोड में होगी गणना

हालांकि, 2017-18 में पहली बार जल निकायों की डिजिटल गणना की गयी थी, लेकिन उस समय केवल फोटो ही ली गयी थी. इस बार पूरी गणना डिजिटल माध्यम से होगी, जिससे जल संसाधनों की वास्तविक स्थिति का पता चल सकेगा. पहले जल संसाधनों की गणना ऑफलाइन मोड में कागज और पेन के माध्यम से होती थी, लेकिन अब हर जल संसाधन का पूरा डेटा डिजिटल मोड में एकत्र किया जायेगा.

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सिंचाई योजनाओं का होगा मजबूतीकरण, जल प्रबंधन में मिलेगी मदद

बिहार के योजना एवं विकास विभाग ने राज्य की सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में इस गणना कार्य को एक महत्वपूर्ण कदम बताया है. जारी पत्र के अनुसार, राज्य में लघु सिंचाई योजनाओं का युक्तिकरण किया जायेगा. इसके साथ ही, एक और ऐतिहासिक पहल करते हुए, राज्य में पहली बार झरनों की भी गणना की जायेगी. यह महत्वपूर्ण कार्य वित्तीय वर्ष 2023-24 के अंतर्गत वृहद एवं मध्यम सिंचाई परियोजनाएं (एमएमआईपी), एवं लघु सिंचाई (एमआई) योजनाएं और झरना क्षेत्र प्रबंधन एवं विकास कार्यक्रम (एसएमडीपी) के तहत किया जा रहा है.

इस पहल का मुख्य उद्देश्य राज्य में मौजूद लघु सिंचाई योजनाओं और झरनों का एक विस्तृत और अद्यतन डेटाबेस तैयार करना है. इससे आने वाले दिनों में सिंचाई योजनाओं की बेहतर योजना बनाने, उनकी निगरानी करने और उनका उचित प्रबंधन करने में मदद मिलेगी. इसी प्रकार, झरनों की गणना से उनके संरक्षण और विकास के लिए प्रभावी रणनीतियां बनाने में सहायता मिलेगी, खासकर जल संरक्षण और पर्यावरण संतुलन के दृष्टिकोण से यह अत्यंत महत्वपूर्ण है.

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गणना का उद्देश्य

जल संसाधन जनगणना का मुख्य उद्देश्य सिंचाई क्षेत्र में जल उपयोग दक्षता, जल बजट आदि सहित प्रभावी योजना और नीति निर्माण के लिए एक व्यापक और विश्वसनीय डेटाबेस का निर्माण करना है. डेटा के संग्रह और सत्यापन के लिए डिजिटल एप्लिकेशन जनगणना के संचालन के लिए आवश्यक समय को कम करते हुए डेटा की सटीकता को काफी बढ़ाता है.

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Paritosh Shahi

लेखक के बारे में

By Paritosh Shahi

परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.

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