बालिका गृह कांड : ब्रजेश ने याचिका दायर की, कहा- सीबीआइ के गवाह भरोसे लायक नहीं

Updated at : 15 Jan 2020 11:17 AM (IST)
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बालिका गृह कांड : ब्रजेश ने याचिका दायर की, कहा- सीबीआइ के गवाह भरोसे लायक नहीं

अब 20 को पॉक्सो कोर्ट सुनायेगा फैसला नयी दिल्ली/मुजफ्फरपुर : बालिका गृह कांड में साकेत पॉक्सो कोर्ट अब 20 जनवरी को दोपहर ढाई बजे अपना फैसला सुनायेगा. मंगलवार को तीसरी बार इस मामले में फैसला टल गया. मामले के मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर ने कोर्ट में याचिका दायर अभियोजन पक्ष के गवाहों की गवाही पर […]

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अब 20 को पॉक्सो कोर्ट सुनायेगा फैसला

नयी दिल्ली/मुजफ्फरपुर : बालिका गृह कांड में साकेत पॉक्सो कोर्ट अब 20 जनवरी को दोपहर ढाई बजे अपना फैसला सुनायेगा. मंगलवार को तीसरी बार इस मामले में फैसला टल गया. मामले के मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर ने कोर्ट में याचिका दायर अभियोजन पक्ष के गवाहों की गवाही पर सवाल खड़ा किया है. अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सौरभ कुलश्रेष्ठ ने सीबीआइ को इस मामले में दो दिनों में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है.
मंगलवार को ब्रजेश ठाकुर की ओर से अधिवक्ता पी के दूबे द्वारा दाखिल की गयी याचिका में दावा किया गया है कि मामले में गवाहों की गवाही विश्वसनीय नहीं है. याचिका में कहा गया है कि सीबीआइ ने आठ जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में जो स्टेटस रिपोर्ट सौंपी, उसमें कहा था कि बालिका गृह की किसी लड़की की हत्या नहीं हुई है और सभी लड़कियां जीवित हैं. लड़कियों के बारे में यह माना गया था कि उनकी कथित तौर पर हत्या कर दी गयी है. याचिका में इन तथ्यों से यह साबित होता है कि उल्लेख किये गये अभियोजन के गवाह भरोसे लायक नहीं हैं और उन्होंने न सिर्फ जांच एजेंसी, बल्कि अदालत को भी गुमराह किया है. याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि अभियोजन द्वारा बनाया गया मामला झूठा, काल्पनिक और मनगढ़ंत है. अभियोजन के गवाह विश्वसनीय नहीं हैं, क्योंकि हत्या के आरोपों की जांच उनके बयानों पर आधारित है.
इसमें कहा गया है, ‘यह जिक्र करना मुनासिब होगा कि हत्या के आरोपों की जांच पीड़ितों द्वारा दिये गये बयानों पर आधारित थी, जो मामले में अभियोजन के गवाह थे. उन्होंने अदालत के समक्ष आरोपी के खिलाफ झूठे आरोप लगाये, जिनमें अन्य बातों के साथ-साथ हत्या से जुड़े आरोप भी शामिल हैं.’
मालूम हो कि अदालत ने 20 मार्च, 2018 को ठाकुर समेत आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किये थे. अदालत ने अंतिम दलीलें पूरी होने पर 30 सितंबर को अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था. इसके पहले कोर्ट ने आदेश एक महीने के लिए 14 जनवरी तक टाल दिया था. उस समय मामले की सुनवाई कर रहे जज सौरभ कुलश्रेष्ठ छुट्टी पर थे. इससे पहले अदालत ने नवंबर में फैसला एक महीने के लिए टाल दिया था. तब तिहाड़ केंद्रीय जेल में बंद 20 आरोपियों को राष्ट्रीय राजधानी की सभी छह जिला अदालतों में वकीलों की हड़ताल के कारण अदालत परिसर नहीं लाया जा सका था.
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