बच्चों को नाव से खुद पहुंचाते हैं स्कूल, ताकि न रुके पढ़ाई

मुजफ्फरपुर : स्कूल में नियत समय पर जाकर बच्चों को पढ़ाने की ड्यूटी तो सभी शिक्षक करते हैं, लेकिन बच्चों की पढ़ाई बाधित नहीं हो, इसके लिए शारीरिक श्रम के साथ रोज दो घंटे अलग से देने का हौसला सब में नहीं होता. हालांकि समाज में ऐसे लोग अब भी हैं, जो अपने कार्यों से […]
मुजफ्फरपुर : स्कूल में नियत समय पर जाकर बच्चों को पढ़ाने की ड्यूटी तो सभी शिक्षक करते हैं, लेकिन बच्चों की पढ़ाई बाधित नहीं हो, इसके लिए शारीरिक श्रम के साथ रोज दो घंटे अलग से देने का हौसला सब में नहीं होता. हालांकि समाज में ऐसे लोग अब भी हैं, जो अपने कार्यों से दूसरों के लिए प्रेरणा बन रहे हैं.
प्राथमिक विद्यालय रजवारा डीह के शिक्षक राकेश कुमार इन दिनों मुशहरी के पीर मोहम्मदपुर गांव के लोगों के लिए आदर्श बने हुए हैं. इस गांव में बाढ़ आने के बाद ये यहां से रोज खुद की नाव से दस बच्चों को लेकर उन्हें छोटी कोठियां बांध पर उतारते हैं. वहां से बच्चे अपने-अपने स्कूल में जाते हैं. इसके बाद फिर राकेश कुमार नाव से करीब डेढ़ किमी का सफर तय कर वापस अपने स्कूल लौटते हैं. पिछले 11 जुलाई से ये रोज बच्चों को स्कूल पहुंचाने के साथ बच्चों की छुट्टी होने पर छोटी कोठिया बांध से उनके गांव पीर मोहम्मदपुर पहुंचा रहे हैं.
इस गांव से स्कूल में जाने वाले 50 से अधिक बच्चे हैं, जिन्हें प्राइवेट नाव से रोज आने जाने के लिए 50 रुपये खर्च करने पड़ते हैं, लेकिन राकेश कुमार बच्चों से राशि नहीं लेते. बच्चों की पढ़ाई बाधित नहीं हो, इसके लिए वे उन्हें नाव से बाढ के पार उतारते हैं.
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