मुजफ्फरपुर: मेड़ काटने के विवाद में रामबहादुर राय की हत्या के 26 साल पुराने मामले में 12 दोषियों को उम्रकैद

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मुजफ्फरपुर में 26 साल पुराने हत्या मामले में कोर्ट ने 12 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई। सजा के बाद कोर्ट परिसर में दोनों पक्षों के बीच जमकर मारपीट हुई।

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Murder case verdict: मुजफ्फरपुर जिला के हथौड़ी थाना के झउवा गांव निवासी रामबहादुर राय की भाला मारकर हत्या करने के 26 साल पुराने मामले में मंगलवार को कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (द्वितीय) दशरथ मिश्रा ने मामले में 12 दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनायी है. इसके साथ ही अदालत ने सभी दोषियों पर 10-10 हजार रुपये का आर्थिक जुर्माना भी लगाया है. जुर्माना राशि जमा नहीं करने पर दोषियों को दो-दो महीने की अतिरिक्त साधारण कारावास की सजा भुगतनी होगी.

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सजा सुनते ही रणक्षेत्र में तब्दील हुआ कोर्ट परिसर, मारपीट में फूटा सिर

अदालत द्वारा सजा सुनाए जाने के बाद कोर्ट परिसर अचानक रणक्षेत्र में तब्दील हो गया. जैसे ही पुलिस दोषियों को हिरासत में लेकर हाजत की ओर ले जाने लगी, वैसे ही परिसर में मौजूद आरोपित और पीड़ित पक्ष के लोग आपस में भिड़ गए. दोनों पक्षों के बीच जमकर मारपीट हुई, जिससे कोर्ट परिसर में अफरातफरी मच गई. इस हिंसक झड़प में मृतक रामबहादुर राय के भतीजे धर्मेंद्र यादव का सिर फट गया. मारपीट और चीख-पुकार सुनकर मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई. सूचना मिलते ही नगर थाने की पुलिस दलबल के साथ मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया.

14 गवाहों ने दिलाई सजा, ट्रायल के दौरान 4 आरोपितों की हो चुकी है मौत

मामले में एपीपी ब्रजमोहन सिंह ने कोर्ट के समक्ष 14 गवाहों और घटना से जुड़े महत्वपूर्ण साक्ष्यों को पेश किया. उल्लेखनीय है कि लंबे चले इस ट्रायल के दौरान चार आरोपितों की मृत्यु हो चुकी है, जबकि पूर्व में एक आरोपित राजीव कुमार को दोषमुक्त किया जा चुका है.

इन 12 दोषियों को मिली आजीवन कारावास की सजा:

लोभित राय (78 वर्ष), सिकिन्दर राय (58 वर्ष), सत्यनारायण राय (61 वर्ष), मुनींद्र राय (63 वर्ष), नरेश राय (58 वर्ष), रामनाथ राय (68 वर्ष), अमृत राय (78 वर्ष), विनोद राय (48 वर्ष), मोहित राय (73 वर्ष), भूपेंद्र प्रसाद यादव (76 वर्ष), मनोज राय (55 वर्ष) और देवनारायण राय (68 वर्ष).

क्या था पूरा मामला?

यह विवाद 13 अगस्त 2000 को हुआ था, जिसे लेकर मृतक के भाई जगन्नाथ राय ने हथौड़ी थाने में प्राथमिकी दर्ज करायी थी. आरोप था कि खेत की मेड़ तोड़ने का विरोध करने पर लाठी, फरसा और गरासा से लैस आरोपितों ने रामबहादुर राय की भाला मारकर निर्मम हत्या कर दी थी. इस हमले में मनोज राय, शेरबहादुर राय और शिवजी राय गंभीर रूप से घायल हुए थे. फैसले को लेकर झउवा गांव के सैकड़ों लोग कोर्ट परिसर में जुटे थे, जिससे इजलास के बाहर भारी भीड़ जमा हो गई थी. हालांकि, सुरक्षा के लिए कोर्ट हाजत प्रभारी सियाराम सिंह दलबल के साथ मुस्तैद थे.


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