ऋषिकुंड मलमास मेले में उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़, आस्था और मनोरंजन का बन रहा केंद्र

Published by : Shruti Kumari Updated At : 03 Jun 2026 2:44 PM

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ऋषिकुंड में पवित्र स्नान करते श्रद्धालुओं की भीड़

Munger news: ऋषिकुंड परिसर में पूजा-पाठ, प्रसाद, मिठाई, पकवान और अन्य आवश्यक वस्तुओं की दुकानें पूरी तरह सज चुकी हैं. मेले में आने वाले श्रद्धालु खरीदारी के साथ स्थानीय व्यंजनों का भी भरपूर आनंद ले रहे हैं.

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बरियारपुर से संजीव कुमार की रिपोर्ट:

Munger news: तपोवन स्थित ऋषिकुंड में आयोजित मलमास मेला इन दिनों श्रद्धालुओं की आस्था और आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना हुआ है. प्रत्येक तीन वर्ष पर आयोजित होने वाला यह ऐतिहासिक मेला अपनी ख्याति के अनुरूप रोजाना हजारों श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रहा है. दूर-दराज से पहुंच रहे श्रद्धालु यहां पूजा-अर्चना के साथ मेले का आनंद भी उठा रहे हैं.

ऋषिकुंड परिसर में पूजा-पाठ, प्रसाद, मिठाई, पकवान और अन्य आवश्यक वस्तुओं की दुकानें पूरी तरह सज चुकी हैं. मेले में आने वाले श्रद्धालु खरीदारी के साथ स्थानीय व्यंजनों का भी भरपूर आनंद ले रहे हैं.

बच्चों और बड़ों के लिए मनोरंजन की भरपूर व्यवस्था

मेले में बच्चों और युवाओं के मनोरंजन के लिए तारामाची समेत विभिन्न खेल-तमाशों की व्यवस्था की गई है. झूले और मनोरंजन के अन्य साधनों का आनंद लेने के लिए दिनभर लोगों की भीड़ जुट रही है.

ऋषिकुंड के भोजन का अलग है स्वाद

मेले में नाश्ते और भोजन की दुकानों पर लगातार भीड़ देखी जा रही है. श्रद्धालुओं का मानना है कि ऋषिकुंड के जल से तैयार भोजन का स्वाद विशेष होता है. यही कारण है कि बड़ी संख्या में लोग यहां के पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद लेने पहुंच रहे हैं.

विभिन्न जिलों और राज्यों से पहुंच रहे श्रद्धालु

मस्जिद मोड़ नौवागढ़ी, बरियारपुर कालीस्थान और लोहची मार्ग से प्रतिदिन टेंपो, ई-रिक्शा, बाइक एवं चारपहिया वाहनों से श्रद्धालु मेले में पहुंच रहे हैं. बढ़ती भीड़ को देखते हुए कई स्थानों पर वाहन पार्किंग की व्यवस्था की गई है.

मेला संचालक अमर कुमार ने बताया कि श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए अलग-अलग स्थानों पर वाहन स्टैंड बनाए गए हैं. साथ ही युवा वॉलंटियरों की तैनाती की गई है, जो मेले में लगातार निगरानी कर रहे हैं.

रामायण काल से जुड़ी है ऋषिकुंड की मान्यता

ऋषिकुंड विकास मंच के संयोजक मनोज सिंह ने बताया कि ऋषिकुंड का धार्मिक महत्व रामायण काल से जुड़ा हुआ माना जाता है. इसी कारण मुंगेर ही नहीं, बल्कि भागलपुर, खगड़िया, पूर्णिया, मुजफ्फरपुर, पटना समेत बिहार के विभिन्न जिलों और अन्य राज्यों से भी श्रद्धालु यहां पहुंच रहे हैं.

उन्होंने कहा कि बिहार सरकार भी ऋषिकुंड को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य कर रही है. आने वाले समय में यह स्थल राज्य के प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटन केंद्रों में अपनी विशेष पहचान स्थापित करेगा.

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