मुंगेर का चंडिका स्थान क्यों है इतना प्रसिद्ध? जानिए मां सती से जुड़ी पौराणिक कथा

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चंडिका स्थान मुंगेर | Prabhat Khabar Network

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Aaj Ka Darshan: मुंगेर का चंडिका स्थान बिहार का एक प्रमुख शक्तिपीठ है, जहाँ दूर-दूर से श्रद्धालु माता के दर्शन करने आते हैं. मान्यता है कि यहाँ मां सती की बाईं आँख गिरी थी, जिससे यह स्थान अत्यंत पवित्र माना जाता है.

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Aaj Ka Darshan : मुंगेर का मां चंडिका स्थान बिहार ही नहीं, बल्कि पूरे देश के प्रमुख शक्तिपीठों में अपनी विशेष पहचान रखता है. यह मंदिर धार्मिक आस्था, पौराणिक मान्यता और आध्यात्मिक विश्वास का ऐसा केंद्र है, जहां हर साल हजारों श्रद्धालु अपने परिवार की सुख-समृद्धि और मनोकामना पूर्ति की कामना लेकर पहुंचते हैं.

माना जाता है कि मां चंडिका अपने भक्तों की सच्ची श्रद्धा से प्रसन्न होकर उनकी मनोकामनाएं पूरी करती हैं. यही विश्वास वर्षों से लाखों लोगों को इस शक्तिपीठ तक खींच लाता है.

क्यों खास है मुंगेर का चंडिका स्थान?

मुंगेर स्थित चंडिका स्थान को देश के प्रमुख शक्तिपीठों में गिना जाता है. इसकी पहचान केवल बिहार तक सीमित नहीं है. झारखंड, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और देश के कई अन्य राज्यों से भी श्रद्धालु यहां दर्शन करने पहुंचते हैं.

मंदिर परिसर में आध्यात्मिक वातावरण, घंटियों की गूंज और भक्तों की आस्था एक अलग ही धार्मिक अनुभूति कराती है. यहां पहुंचने वाले श्रद्धालु मां चंडिका की पूजा-अर्चना कर अपने परिवार के सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं.

यहां गिरी थी मां सती की बाईं आंख, ऐसी है पौराणिक मान्यता

पौराणिक मान्यता के अनुसार जब राजा दक्ष के यज्ञ में भगवान शिव का अपमान हुआ तो माता सती ने क्रोधित होकर यज्ञ कुंड में अपने प्राण त्याग दिए.

इसके बाद भगवान शिव माता सती के पार्थिव शरीर को लेकर तांडव करने लगे. तब भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से माता सती के शरीर के कई खंड किए, ताकि सृष्टि का संतुलन बना रहे.

मान्यता है कि माता सती की बाईं आंख मुंगेर के इसी स्थान पर गिरी थी. इसी कारण यह स्थल शक्तिपीठ के रूप में प्रतिष्ठित हुआ और यहां मां चंडिका की विशेष पूजा होती है.

कहा जाता है कि मंदिर के नीचे स्थित पहाड़ी की गुफा में मां के नेत्र विराजमान हैं और उसी के ऊपर वर्तमान मंदिर का निर्माण किया गया है.

मंदिर परिसर में कई देवी-देवताओं के भी हैं मंदिर

मां चंडिका मंदिर के अलावा इस शक्तिपीठ परिसर में कई अन्य देवी-देवताओं के मंदिर भी स्थित हैं. श्रद्धालु मां के दर्शन के साथ-साथ अन्य देवस्थलों में भी पूजा-अर्चना करते हैं.

धार्मिक मान्यता और प्राकृतिक वातावरण का यह संगम इस स्थान को और अधिक विशेष बनाता है.

नवरात्र में उमड़ता है आस्था का सैलाब

वैसे तो पूरे वर्ष श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं, लेकिन शारदीय और चैत्र नवरात्र के दौरान यहां श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ जाती है.

सुबह से देर रात तक भक्तों की लंबी कतार लगी रहती है. मंदिर परिसर माता के जयकारों और घंटियों की ध्वनि से गूंजता रहता है. इस दौरान प्रशासन भी श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए विशेष व्यवस्था करता है.

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Aaj Ka Darshan : आस्था के साथ पर्यटन का भी प्रमुख केंद्र

मुंगेर का चंडिका स्थान धार्मिक पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है. यहां आने वाले श्रद्धालु मंदिर दर्शन के साथ मुंगेर के अन्य ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों का भी भ्रमण करते हैं.

स्थानीय लोगों का मानना है कि श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या से आसपास के छोटे व्यवसाय, होटल, दुकानें और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी लाभ मिलता है.

मां चंडिका का यह शक्तिपीठ आज भी लाखों लोगों की आस्था का केंद्र बना हुआ है, जहां हर दिन भक्त अपनी श्रद्धा, विश्वास और उम्मीद लेकर पहुंचते हैं.

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राणा गौरी शंकर

लेखक के बारे में

By राणा गौरी शंकर

राणा गौरी शंकर प्रिंट माध्यम में 32 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत दैनिक आज से की. अभी प्रभात खबर के मुंगेर कार्यालय में कार्यरत हैं. सामाजिक सरोकार, अपराध, शिक्षा, राजनीतिक खबरों में रुचि रखते हैं.

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