जमालपुर के जुबली वेल-स्टेशन रोड पर बह रहा शौचालय का दुर्गंधयुक्त पानी

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सड़क पर बहता गन्दा पानी

Jamalpur Station: मुंगेर जिले के जमालपुर शहर की हृदयस्थली माने जाने वाले जुबली वेल चौक से स्टेशन चौक मार्ग पर रेलवे के नवनिर्मित शौचालय का गंदा और बदबूदार पानी खुलेआम सड़क पर बह रहा है. अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत लाखों की लागत से बने इस शौचालय में जल निकासी (ड्रेनेज) की स्थायी व्यवस्था न होने से स्थानीय दुकानदारों और हजारों राहगीरों को भीषण दुर्गंध के बीच रहने को मजबूर होना पड़ रहा है.

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मुंगेर के जमालपुर से विजय कुमार गुप्ता की रिपोर्ट

Jamalpur Station: पूर्व रेलवे के मालदा रेल मंडल अंतर्गत जमालपुर रेल नगरी से एक बड़ी नागरिक विसंगति सामने आई है. शहर के सबसे अति व्यस्ततम वीआईपी मार्गों में से एक ‘जुबली वेल चौक से स्टेशन चौक’ जाने वाली मुख्य सड़क पर पिछले कुछ दिनों से रेलवे के नवनिर्मित सुलभ शौचालय का सड़ांध और दुर्गंध भरा गंदा पानी खुलेआम बह रहा है. इस मुख्य मार्ग से प्रतिदिन मुंगेर जिला प्रशासन के आला अधिकारियों और रेलवे के वरिष्ठ कप्तानों (पदाधिकारियों) का काफिला गुजरता है, क्योंकि मुख्यालय मुंगेर से जमालपुर शहर और रेल कारखाने तक पहुंचने का यही एकमात्र मुख्य जरिया है. इसके बावजूद इस नारकीय स्थिति पर अब तक किसी भी कनिष्ठ या वरिष्ठ अधिकारी की नजर नहीं पड़ी है, जिससे रेल प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं.

अमृत भारत योजना के तहत लाखों की लागत से बना, पर नाली बनाना भूले कमान अधिकारी

  • अमृत भारत योजना की खुली पोल: जमालपुर स्टेशन के ऑटो स्टैंड के उत्तरी छोर पर पिछले वर्ष ही रेल मंत्रालय की महत्वाकांक्षी ‘अमृत भारत स्टेशन योजना’ के तहत इस आधुनिक शौचालय का निर्माण संधारित किया गया था. परंतु निर्माण एजेंसी की अदूरदर्शिता के कारण इसके गंदे पानी के निकास के लिए किसी मुख्य नाली की व्यवस्था ही नहीं की गई.
  • ढाई महीने में दोबारा फूटा संकट: स्थानीय दुकानदारों ने बताया कि करीब तीन महीने पहले भी यही स्थिति उत्पन्न हुई थी, तब मीडिया में खबर छपने के बाद आनन-फानन में कलबोट और तात्कालिक व्यवस्था कर पानी रोका गया था. लेकिन ठीक ढाई महीने बाद ड्रेनेज चोक होने से दोबारा पूरा कचरा सड़क पर फैल गया है.

‘पे एंड यूज’ से मोटी कमाई, पर सोख्ते के भरोसे छोड़ी ड्रेनेज की कड़ियां

“यह शौचालय पूरी तरह व्यावसायिक यानी ‘पे एंड यूज’ (Pay and Use) तर्ज पर संचालित है, जिसका उपयोग रेल यात्रियों के अलावा ऑटो स्टैंड के ड्राइवर, खलासी और कली-मजदूर वर्ग भी भारी संख्या में करते हैं. निर्माण एजेंसी ने बड़ी नाली बनाने के बजाय महज एक छोटा सा सोख्ता गड्ढा (Soak Pit) बनाकर खानापूर्ति कर दी, जो अब ओवरफ्लो हो चुका है. इसकी देखरेख और सिविल मेंटेनेंस की पूरी कमान इंजीनियरिंग विभाग के आईओडब्ल्यू (IOW) के अधीन है.”

दुकानदारों और राहगीरों का सांस लेना हुआ दूभर; संक्रामक बीमारियों का खतरा

सड़क के पश्चिमी हिस्से में दुकान चलाने वाले छोटे और मध्यम व्यापारियों का इस भीषण उमस और गर्मी में सुबह से शाम तक दुकान पर बैठना दूभर हो गया है. सड़क पर बहते मलमूत्र के गंदे पानी के कारण उड़ने वाली मक्खियों और सरांध से पूरे इलाके में महामारी व संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा मंडरा रहा है.

स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों और व्यावसायिक कप्तानों ने मुंगेर जिला प्रशासन और मालदा के मंडल रेल प्रबंधक (DRM) से मांग की है कि इस अति व्यस्त मार्ग की गरिमा को देखते हुए तत्काल आईओडब्ल्यू की कड़ियों को कसकर वहां एक पक्की और कवर्ड नाली का निर्माण कराया जाए, ताकि इस ऐतिहासिक शहर की हृदयस्थली को इस नारकीय संकट से हमेशा के लिए परमानेंट संबल (निजात) मिल सके.

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Divyanshu Prashant

लेखक के बारे में

By Divyanshu Prashant

दिव्यांशु प्रशांत वर्तमान में Prabhat Khabar डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। उन्होंने महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा से पत्रकारिता में परास्नातक तथा टी. एन. बी. कॉलेज भागलपुर से हिंदी साहित्य में स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। हिंदी साहित्य की पृष्ठभूमि होने के कारण उन्हें पढ़ने, लेखन और कविता-सृजन में विशेष रुचि है। मीडिया क्षेत्र में लगभग एक वर्ष के अनुभव के दौरान वे Dainik Jagran में न्यूज़ राइटर और रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं। करियर के शुरुआती दौर में लोकसभा और विधानसभा चुनावों से जुड़े पॉलिटिकल कंटेंट राइटिंग का विशेष अनुभव प्राप्त किया। सटीक, निष्पक्ष और प्रभावशाली लेखन के माध्यम से पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुँचाना उनकी पेशेवर पहचान है।

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