सारे तीरथ धाम आपके चरणों में... भजन सुनकर श्रद्धालु हुए भावविभोर

Published by : ANAND KUMAR Updated At : 23 Feb 2026 8:29 PM

विज्ञापन

असम के करीमगंज से पधारे श्री प्रज्ञानंद सरस्वती जी ने परीक्षित जन्म, सुखदेव जी का आगमन, सृष्टि वर्णन, विदुर मैत्री संवाद और भक्ति ज्ञान व वैराग्य की कथा सुनाई.

विज्ञापन

मुंगेर. असम के करीमगंज से पधारे श्री प्रज्ञानंद सरस्वती जी ने परीक्षित जन्म, सुखदेव जी का आगमन, सृष्टि वर्णन, विदुर मैत्री संवाद और भक्ति ज्ञान व वैराग्य की कथा सुनाई. कथा सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो गये. वे सोमवार को श्री सिद्धिविनायक मंदिर, माधोपुर में आयोजित श्रीमद् भागवत महापुराण के द्वितीय दिवस पर श्रद्धालुओं को प्रवचन करते हुए कही. उन्होंने भागवत कथा का प्रारंभ गुरु वंदना के पश्चात जय गिरधारी जय गिरधारी जय राधा माधव जय कुंज बिहारी… भजन से किया. प्रज्ञानंद ने ऋषि करताल, परीक्षित को श्राप मिलने और फिर सुखदेव जी द्वारा भागवत का महत्व का प्रसंग विस्तार से प्रस्तुत किया. उन्होंने राजा परीक्षित का ज्ञानवान होना और फिर ऋषि पुत्र द्वारा उन्हें श्राप दिया जाना, सुखदेव मुनि का कथा सुनने के लिए आने का वर्णन किया. इतना ही नहीं भगवान की लीलाओं और सृजन की कथा भी सुनाया. कथा के बीच में सारे तीरथ धाम आपके चरणों में… भजन की प्रस्तुति ने श्रद्धालुओं को खूब झुमाया. उन्होंने गुरु को अपनाने पर बल दिया, लेकिन गुरु वास्तव में गुरु होना चाहिए, आडंबर वाला नहीं. उन्होंने कहा कि जब कोई कष्ट में हो तो भगवान को ही बुलाना चाहिए. उद्धव का उदाहरण देते हुए कहा कि कथा को निःस्वार्थ कहना चाहिए. स्वामी जी बताएं की श्रीमद् भागवत महापुराण को वैष्णव संप्रदाय में सबसे पवित्र ग्रंथ और वेदों का सार माना गया है. जिसमें भगवान कृष्ण की भक्ति, अवतार लीलाओं और ज्ञान का वर्णन है. यह ग्रंथ जीवन-मरण के बंधन से मुक्ति प्रदान करने वाला, आयु बढ़ने वाला, पापों का नाश करने वाला तथा कलयुग में सबसे उत्तम साधन मार्ग माना जाता है.

विज्ञापन
ANAND KUMAR

लेखक के बारे में

By ANAND KUMAR

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन