तांत्रिक विधि से हुई थी स्थापना, दामोदरपुर का चामुंडा काली मंदिर आज भी अटूट आस्था का केंद्र

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चामुंडा काली मंदिर

दामोदरपुर के श्री श्री चामुंडा काली मंदिर का धार्मिक आस्था और ऐतिहासिक महत्व अनूठा है. तांत्रिक विधि से स्थापित यह मंदिर आज भी श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूरी करता है.

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असरगंज (मुंगेर) से हिमांशु कुमार सिंह की रिपोर्ट

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Chamunda Kali Temple: मुंगेर जिले के असरगंज प्रखंड अंतर्गत दामोदरपुर गांव स्थित अति प्राचीन श्री श्री चामुंडा काली मंदिर धार्मिक आस्था और ऐतिहासिक महत्व का अनूठा संगम है. स्थानीय मान्यताओं के अनुसार इस मंदिर की स्थापना प्राचीन काल में राजा कालीचरण पांडे ने तांत्रिक विधि से कराई थी. मंदिर की विशिष्ट बनावट, वर्षों पुरानी पूजा परंपरा और चमत्कारिक मान्यताओं के कारण यहां दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं.

तांत्रिक विधि से हुई थी मंदिर की स्थापना

ग्रामीणों के अनुसार राजा कालीचरण पांडे ने इस मंदिर की स्थापना विशेष तांत्रिक विधि से कराई थी. मान्यता यह भी है कि मंदिर पशु मुंड पर स्थापित है. श्रद्धालुओं का विश्वास है कि मां चामुंडा के दरबार से कोई भी भक्त खाली हाथ नहीं लौटता और सच्ची श्रद्धा से मांगी गई मनोकामना अवश्य पूरी होती है.

36 कोणों वाली अनोखी मंदिर संरचना

Chamunda Kali Temple: मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता इसकी प्राचीन वास्तुकला है. स्थानीय लोगों का कहना है कि पुराने कारीगरों ने 36 कोणों को मिलाकर इस मंदिर का निर्माण किया था, जो आज भी सुरक्षित है. मंदिर में स्थापित मिट्टी के पिंड को पीतल की बड़ी कड़ाही से ढंककर रखा जाता है. प्रतिदिन सुबह और शाम सेवक द्वारा विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है.

मंगलवार और शनिवार को उमड़ती है श्रद्धालुओं की भीड़

मंगलवार और शनिवार को मंदिर में विशेष पूजा होती है. इन दिनों बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन और पूजा के लिए पहुंचते हैं. स्थानीय परंपरा के अनुसार इन अवसरों पर बलि चढ़ाने की भी प्रथा है. दुर्गा पूजा के दौरान यहां विशेष धार्मिक आयोजन होते हैं और मां चामुंडा की भव्य आराधना की जाती है.

विंध्याचल के दूसरे स्वरूप के रूप में होती है पहचान

स्थानीय बुजुर्ग मदन मोहन शुक्ला बताते हैं कि श्रद्धालु इस मंदिर को मां विंध्यवासिनी के दूसरे स्वरूप के रूप में भी मानते हैं. उनका कहना है कि सुबह से ही बड़ी संख्या में लोग मंदिर परिसर पहुंचकर दर्शन, पूजा और साफ-सफाई में भाग लेते हैं. मंदिर की व्यवस्था आज भी कालीचरण पांडे के वंशजों द्वारा संचालित की जा रही है, जिससे इसकी परंपरा लगातार जीवित है.दामोदरपुर का श्री श्री चामुंडा काली मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत, लोक आस्था और सामाजिक विश्वास का जीवंत प्रतीक माना जाता है.

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