बाढ़ से पहले ही प्रशासनिक तैयारियों पर उठने लगे सवाल, अधूरा है तटबंध मरम्मत कार्य

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बाढ़ से पहले ही प्रशासनिक तैयारियों पर उठने लगे सवाल, अधूरा है तटबंध मरम्मत कार्य

पिछले वर्ष बाढ़ के दौरान क्षतिग्रस्त हुआ तटबंध जिसकी मरम्मत की मांग स्थानीय लोग कर रहे हैं

Bariarpur Flood Protection: बरियारपुर प्रखंड कार्यालय और रेलवे लोहा पुल के बीच उब्भी नदी के किनारे बनाया गया तटबंध बाढ़ के पानी को तराई क्षेत्र में फैलने से रोकने के लिए बनाया गया था. लेकिन तटबंध की जर्जर स्थिति के कारण यह बाढ़ के दबाव को झेलने में सक्षम नहीं दिख रहा है. नतीजतन बाढ़ के दौरान हजारों एकड़ कृषि भूमि जलमग्न हो जाती है.

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बरियारपुर से संजीव कुमार की रिपोर्ट:

Bariarpur Flood Protection: बाढ़ प्रभावित मुंगेर जिले का बरियारपुर प्रखंड हर वर्ष बाढ़ की मार झेलता है. इसके बावजूद बाढ़ से पूर्व प्रशासनिक तैयारियां अधूरी दिखाई दे रही हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि समय रहते तटबंधों की मरम्मत और मजबूती का कार्य नहीं होने से हर साल बाढ़ के दौरान भारी नुकसान उठाना पड़ता है.

तटबंध की जर्जर स्थिति बनी चिंता का कारण

बरियारपुर प्रखंड कार्यालय और रेलवे लोहा पुल के बीच उब्भी नदी के किनारे बनाया गया तटबंध बाढ़ के पानी को तराई क्षेत्र में फैलने से रोकने के लिए बनाया गया था. लेकिन तटबंध की जर्जर स्थिति के कारण यह बाढ़ के दबाव को झेलने में सक्षम नहीं दिख रहा है. नतीजतन बाढ़ के दौरान हजारों एकड़ कृषि भूमि जलमग्न हो जाती है.

फसल और पशुचारे को होता है भारी नुकसान

स्थानीय किसानों के अनुसार तटबंध कमजोर होने के कारण बाढ़ का पानी खेतों में फैल जाता है. इससे फसलें बर्बाद हो जाती हैं और मवेशियों के लिए तैयार किया गया हरा चारा भी पानी में डूबकर नष्ट हो जाता है. लोगों का मानना है कि यदि तटबंध समय पर दुरुस्त कर दिया जाए तो बाढ़ के दौरान भी पशुओं के लिए चारे की उपलब्धता बनी रह सकती है.

हर साल होती है बैठक, लेकिन नहीं होता स्थायी समाधान

स्थानीय लोगों का कहना है कि बाढ़ से पहले प्रशासनिक स्तर पर क्षेत्र का निरीक्षण और बैठकें तो होती हैं, लेकिन तटबंध की स्थायी मरम्मत नहीं की जाती. जब बाढ़ का पानी तटबंध से रिसने लगता है तब आनन-फानन में मिट्टी से भरे प्लास्टिक बैग रखकर पानी रोकने की कोशिश की जाती है, जो अधिक प्रभावी साबित नहीं होती.

समय रहते मरम्मत की उठी मांग

क्षेत्रवासियों का कहना है कि बाढ़ आने से कई महीने पहले तटबंध को ऊंचा और मजबूत किया जाना चाहिए. तभी यह बाढ़ के पानी के दबाव को रोक सकेगा. लोगों के अनुसार अगस्त माह से क्षेत्र में बाढ़ का असर दिखने लगता है. ऐसे में समय रहते तैयारी जरूरी है.

अधिकारियों से कार्रवाई की मांग

किसानों और स्थानीय लोगों ने वरिष्ठ अधिकारियों से मांग की है कि बाढ़ आने से पहले तटबंध की पूरी तरह मरम्मत कराई जाए, ताकि जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके और हर वर्ष होने वाले नुकसान से राहत मिल सके.

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Shruti Kumari

लेखक के बारे में

By Shruti Kumari

श्रुति कुमारी एक पत्रकार और डिजिटल कंटेंट राइटर हैं। उन्होंने भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से अंग्रेजी पत्रकारिता में स्नातकोत्तर डिप्लोमा प्राप्त किया है। वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं। उन्हें विभिन्न प्लाटफॉर्म्स पर डिजिटल पत्रकारिता और कंटेंट राइटिंग का लगभग दो वर्षों का अनुभव है। सामाजिक मुद्दों, महिला सशक्तिकरण, राजनीति, शिक्षा और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लिखना उनकी विशेष रुचि का क्षेत्र है। इसके अलावा वे डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए स्क्रिप्ट राइटिंग करती हैं तथा हिंदी कविता और अंगिका भाषा में लेखन का भी शौक रखती हैं। प्रकृति से उनका विशेष लगाव है और वे मानती हैं कि संवेदनशील, तथ्यपरक और जनसरोकार से जुड़ी पत्रकारिता समाज में सकारात्मक बदलाव का माध्यम बन सकती है।

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