लाखों खर्च के बाद भी आधी-अधूरी पड़ी है योजनाएं

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जमालपुर: नगर परिषद जमालपुर के वार्ड संख्या 17 स्थित टिकियापाड़ा के स्लम एरिया में रहने वाले लोगों के दिन नहीं फिरे. स्लम एरिया के रूप में चिह्न्ति इस मुहल्ले के लिए भले ही कई योजनाएं बनाई गई, किंतु योजनाएं पूर्ण नहीं हो पायी. स्थानीय लोगों को इस बात का आक्रोश है कि धन उपलब्ध होने […]

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जमालपुर: नगर परिषद जमालपुर के वार्ड संख्या 17 स्थित टिकियापाड़ा के स्लम एरिया में रहने वाले लोगों के दिन नहीं फिरे. स्लम एरिया के रूप में चिह्न्ति इस मुहल्ले के लिए भले ही कई योजनाएं बनाई गई, किंतु योजनाएं पूर्ण नहीं हो पायी. स्थानीय लोगों को इस बात का आक्रोश है कि धन उपलब्ध होने के बावजूद उनके जीवन स्तर को ऊपर उठाने वाली योजनाएं भी कार्यपालक एजेंसी की विफलता का शिकार होकर रह गया है. आधी अधूरी सड़क, अधूरे एवं टूटे-फूटे नाले एवं अर्धनिर्मित प्याऊ इस स्लम एरिया की पहचान बन चुकी है.
दलितों का बसेरा है टिकियापाड़ा. वार्ड संख्या 17 के अंतर्गत काली पहाड़ी के तराई तथा पूर्व रेलवे मुख्य अस्पताल के पिछले हिस्से में स्थित यह मुहल्ला विकास से कोसों दूर है. इस मुहल्ले में झुग्गी-झोपड़ी में लगभग 64 परिवार रहते हैं. बताया जाता है कि यहां कुल पांच सौ से अधिक लोग रहते हैं. अधिकतर लोग दैनिक वेतन भोगी हैं. पूरे मुहल्ले में न तो कोई विद्यालय है और नहीं कोई आंगनबाड़ी केंद्र. आजादी के बाद से इस मुहल्ले के लोगों को बिजली नहीं मिल पाई है.
यूनेस्को ने कराया था धन उपलब्ध. यूनेस्को द्वारा टिकियापाड़ा स्लम एरिया को मुख्य धारा से जोड़ने के लिए काफी धन मुहैया कराया गया था. इसके लिए योजनाएं भी बनायी गयी. परंतु योजनाबद्ध रूप से कार्य को आरंभ नहीं किया गया जिसके कारण सारी योजनाएं अधूरी पड़ी हुई है.
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