भगवान शिव की कृपा पाने का सबसे शुभ समय, 30 जुलाई से शुरू होगा श्रावण मास, जानिए इसका महत्व

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प्राचार्य सुशील पांडे की फाइल फोटो | Prabhat Khabar Network

प्राचार्य सुशील पांडे की फाइल फोटो

30 जुलाई से शुरू हो रहा है श्रावण मास, भगवान शिव की आराधना का सबसे पवित्र समय. इस वर्ष चार सोमवारी के शुभ संयोग में पाएं शिव जी की विशेष कृपा. जानिए कैसे करें पूजा और पाएं मनोवांछित फल.

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Sawan 2026: 30 जुलाई से भगवान शिव की आराधना का सबसे पवित्र माने जाने वाला श्रावण मास शुरू हो रहा है. इस वर्ष श्रावण मास का समापन 28 अगस्त को श्रावणी पूर्णिमा, स्नान-दान और रक्षाबंधन के साथ होगा. खास बात यह है कि इस बार श्रद्धालुओं को भगवान शिव की उपासना के लिए चार सोमवारी का शुभ संयोग मिलेगा.

श्रावण मास को शिव भक्ति, व्रत, जलाभिषेक और रुद्राभिषेक के लिए वर्ष का सबसे मंगलकारी समय माना जाता है.

क्यों खास माना जाता है श्रावण मास?

महर्षिनगर स्थित आर्षविद्या शिक्षण-प्रशिक्षण सेवा संस्थान (वेद विद्यालय) के प्राचार्य सुशील कुमार पाण्डेय ने बताया कि हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र से शुरू होने वाले वर्ष का पांचवां महीना श्रावण सबसे पवित्र माना जाता है.

उन्होंने बताया कि श्रावण पूर्णिमा के दिन आकाश में श्रवण नक्षत्र पूर्ण रूप से विद्यमान रहता है. इसी कारण इस महीने का नाम श्रावण पड़ा. भगवान शिव की आराधना के लिए यह माह अत्यंत शुभ माना जाता है, इसलिए इसे शिव मास भी कहा जाता है.

भगवान शिव की कृपा का विशेष महत्व

सुशील कुमार पाण्डेय के अनुसार, भगवान शिव अपने भक्तों पर शीघ्र प्रसन्न होने वाले देवता माने जाते हैं. पौराणिक मान्यताओं में वर्णित है कि उनकी कृपा से कुबेर देवताओं के कोषाध्यक्ष बने, जबकि अश्विनी कुमारों को आयुर्वेद का ज्ञान प्राप्त हुआ.

उन्होंने बताया कि महामृत्युंजय स्वरूप में भगवान शिव अपने भक्तों को रोग, संकट और कष्टों से मुक्ति प्रदान करते हैं.

समुद्र मंथन से भी जुड़ी है मान्यता

पौराणिक मान्यता के अनुसार, श्रावण मास में ही मंदराचल पर्वत और वासुकी नाग की सहायता से समुद्र मंथन हुआ था. यह भी माना जाता है कि इस पूरे महीने भगवान शिव पृथ्वी पर विचरण करते हैं.

इसी कारण श्रद्धालु शिवालयों और अपने घरों में जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, शिव पूजन, जप, व्रत और अन्य धार्मिक अनुष्ठान करते हैं.

श्रद्धा से पूजा करने पर मिलता है शुभ फल

प्राचार्य सुशील कुमार पाण्डेय ने बताया कि श्रावण मास में विधि-विधान और श्रद्धा के साथ भगवान शिव का पूजन, रुद्राभिषेक, व्रत, जप, होम और दान करने से उमा-महेश्वर प्रसन्न होते हैं.

उन्होंने कहा कि ऐसी धार्मिक मान्यता है कि इससे भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और इस लोक के साथ-साथ परलोक के कल्याण का मार्ग भी प्रशस्त होता है.


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Sujit Kumar Path

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By Sujit Kumar Path

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