धान की खेती पर मौसम की मार, बारिश नहीं होने से खेतों में पड़ने लगीं बड़ी-बड़ी दरारें

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नौरंगिया पंचायत वार्ड 10 में धान के खेतों में पानी के कमी के कारण खेतों में पड़ी दरार | Prabhat Khabar Network

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मोतिहारी जिले में बारिश की कमी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. धान की रोपनी के बाद खेतों में नमी न होने से फसलें सूख रही हैं और मिट्टी में दरारें पड़ गई हैं. किसान अच्छी बारिश और प्रशासन से मदद का इंतजार कर रहे हैं.

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Motihari News: मोतिहारी जिले के सदर प्रखंड की नौरंगिया पंचायत में बारिश की कमी अब किसानों के लिए बड़ी चिंता बन गई है. पर्याप्त वर्षा नहीं होने से धान के खेत सूखने लगे हैं और कई जगहों पर मिट्टी में बड़ी-बड़ी दरारें पड़ गई हैं. धान की रोपनी के बाद पानी नहीं मिलने से फसल प्रभावित होने लगी है. किसान अब अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं और फसल बचाने के लिए प्रशासन से मदद की मांग कर रहे हैं.

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धान की फसल पर बढ़ा संकट

बारिश के मौसम में खेतों का इस तरह सूख जाना किसानों के लिए परेशानी का कारण बन गया है. धान की फसल को शुरुआती दिनों में लगातार नमी की आवश्यकता होती है, लेकिन बारिश नहीं होने से खेतों में पानी नहीं टिक पा रहा है. इसका असर पौधों की बढ़वार पर भी दिखाई देने लगा है. किसानों का कहना है कि यदि जल्द अच्छी बारिश नहीं हुई तो उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है.

सिंचाई के लिए जूझ रहे किसान

जिन किसानों के पास निजी बोरिंग या सिंचाई की व्यवस्था है, वे किसी तरह खेतों तक पानी पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं. वहीं छोटे और सीमांत किसान पूरी तरह मानसून पर निर्भर हैं. लगातार बढ़ते सिंचाई खर्च ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं.

खेती की लागत बढ़ी, नुकसान की आशंका

किसानों ने बताया कि बीज, खाद, जुताई, रोपनी और मजदूरी पर पहले ही काफी खर्च हो चुका है. अब बारिश नहीं होने से फसल को बचाना सबसे बड़ी चुनौती बन गई है. समय पर पानी नहीं मिलने से पूरी मेहनत पर पानी फिरने का खतरा मंडरा रहा है.

कृषि विभाग से कार्रवाई की मांग

किसानों का आरोप है कि बारिश की कमी के बावजूद कृषि विभाग की ओर से अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है. उन्होंने मांग की है कि विभाग प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे कर किसानों की समस्याओं का आकलन करे. साथ ही सिंचाई की वैकल्पिक व्यवस्था, तकनीकी सलाह और फसल बचाने के लिए आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जाए. किसानों का कहना है कि यदि जल्द राहत नहीं मिली और बारिश नहीं हुई तो धान की फसल को भारी नुकसान होगा, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति पर भी गंभीर असर पड़ेगा.

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