Motihari News: नया डबल लाइन रेल पुल तैयार, 1 से 4 अक्टूबर तक मिथिला-पूर्वांचल एक्सप्रेस समेत इन ट्रेनों के बदले रूट
AI जनरेडेट फोटो
मोकामा के पास गंगा नदी पर नए डबल लाइन रेल पुल के लिए नॉन-इंटरलॉकिंग कार्य जारी है. इसके चलते 1 से 4 अक्टूबर तक मिथिला-पूर्वांचल एक्सप्रेस समेत कई ट्रेनों के रूट बदले गए हैं. यात्री अपनी यात्रा से पहले ट्रेन का स्टेटस ज़रूर जांच लें.
Motihari News: मोतिहारी. मोकामा के पास गंगा नदी पर बने नए डबल लाइन रेल पुल से ट्रेनों का नियमित परिचालन शुरू करने की तैयारी तेज हो गयी है. नए ट्रैक को मौजूदा मुख्य रेल नेटवर्क से जोड़ने के लिए 21 सितंबर से नॉन-इंटरलॉकिंग कार्य शुरू किया गया है. करीब 1700 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस महत्वपूर्ण रेल परियोजना को अंतिम रूप देने के लिए रेलवे की ओर से बड़ा ब्लॉक लिया गया है.
नॉन-इंटरलॉकिंग कार्य के अंतिम चरण के कारण अक्टूबर के पहले सप्ताह में उत्तर और दक्षिण बिहार को जोड़ने वाली कई महत्वपूर्ण एक्सप्रेस ट्रेनों के परिचालन में बदलाव किया गया है. इनमें बापूधाम मोतिहारी रेलखंड से गुजरने वाली मिथिला एक्सप्रेस और पूर्वांचल एक्सप्रेस भी शामिल हैं. रेलवे के संशोधित शेड्यूल के अनुसार 1 से 4 अक्टूबर के बीच ये ट्रेनें परिवर्तित मार्ग से चलेंगी.
1 से 4 अक्टूबर तक इन ट्रेनों का बदलेगा मार्ग
नॉन-इंटरलॉकिंग कार्य के कारण निम्न ट्रेनों के परिचालन में बदलाव किया गया है.
- 13021 हावड़ा-रक्सौल मिथिला एक्सप्रेस: 2 और 3 अक्टूबर को परिवर्तित मार्ग से चलेगी.
- 13022 रक्सौल-हावड़ा मिथिला एक्सप्रेस: 3 और 4 अक्टूबर को बदले हुए मार्ग से चलेगी.
- 15052 गोरखपुर-कोलकाता पूर्वांचल एक्सप्रेस: 1 अक्टूबर को परिवर्तित मार्ग से चलायी जाएगी.
- 15051 कोलकाता-गोरखपुर पूर्वांचल एक्सप्रेस: 2 अक्टूबर को बदले हुए मार्ग से गुजरेगी.
रेलवे ने इन तारीखों में यात्रा करने वाले यात्रियों से स्टेशन के लिए रवाना होने से पहले अपनी ट्रेन का अपडेटेड रूट और लाइव रनिंग स्टेटस आधिकारिक ऐप या रेलवे के आधिकारिक माध्यम से जांचने की सलाह दी है.
नए डबल लाइन पुल से क्या बदलेगा
फिलहाल पुराने राजेंद्र सेतु पर सिंगल लाइन ट्रैक होने के कारण इस रेलखंड पर ट्रेनों का दबाव बना रहता है. कई बार ट्रेनों को आउटर पर इंतजार करना पड़ता है.
नए डबल लाइन रेल पुल के चालू होने से इस रेलखंड की क्षमता बढ़ने की उम्मीद है. पूर्व मध्य रेल के अनुसार, भविष्य में इस रूट पर ट्रेनें 110 से 140 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकेंगी. इससे ट्रेनों की आवाजाही सुगम होने के साथ यात्रा के समय में भी कमी आने की संभावना है.
यात्रियों के लिए क्यों जरूरी है यह बदलाव
नॉन-इंटरलॉकिंग कार्य रेलवे के नए ट्रैक को मौजूदा नेटवर्क से जोड़ने की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण चरण है. इसी कारण कुछ ट्रेनों के रूट में अस्थायी बदलाव किया गया है.
रेलवे की ओर से यात्रियों को सलाह दी गयी है कि वे अक्टूबर के पहले सप्ताह में यात्रा की योजना बनाते समय अपनी ट्रेन के परिचालन की ताजा जानकारी जरूर जांच लें. इससे बदले हुए मार्ग या परिचालन संबंधी किसी भी बदलाव के कारण होने वाली परेशानी से बचा जा सकेगा.
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