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मेंथा है औषधीय गुणों से भरपुर, इसकी खेती से किसानों को कम लागत में अधिक मुनाफा

Updated at : 23 Jul 2022 6:11 PM (IST)
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मेंथा है औषधीय गुणों से भरपुर, इसकी खेती से किसानों को कम लागत में अधिक मुनाफा

किसान खेती से अच्छा लाभ ले सके इसके लिए राज्य सरकार ने किसानों को मेंथा की खेती करने के लिए प्रोत्साहित करने का निर्णय लिया है.मेंथा की व्यवसायिक खेती को प्रोत्साहित करने हेतु किसानों को सहायता अनुदान उपलब्ध कराया जायेगा.

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बिहार सरकार किसानों को समृद्ध बनाने के लिए प्रयास कर रही है. किसान खेती से अच्छा लाभ ले सके इसके लिए राज्य सरकार ने किसानों को मेंथा की खेती करने के लिए प्रोत्साहित करने का निर्णय लिया है.मेंथा की व्यवसायिक खेती को प्रोत्साहित करने हेतु किसानों को सहायता अनुदान उपलब्ध कराया जायेगा.सरकारी योजना अनुसार मेंथा की खेती के लिए किसानों को 50 प्रतिशत तक का अनुदान मिल सकेगा.इस तरह औषधीय गुणों से भरपूर मेंथा की खेती किसानों के लिए लाभदायक साबित होगी.

मेंथा की खेती से किसानों को कम लागत में अधिक मुनाफा

मेंथा की खेती करने से किसानों को कम लागत में अधिक मुनाफा होता है. इसके पौधों से तेल निकाला जाता है.मेंथा के पौधों में तेल की मात्रा लगभग एक प्रतिशत तक पायी जाती है.मेंथा के तेल में मेंथाल की मात्रा लगभग 75-80 प्रतिशत होती है.वैसे पूरी दुनिया में मेंथा से निकले मेंथा तेल की खपत लगभग 9500 मीट्रिक टन है. भारत इसके उत्पादन में दुनिया में नंबर वन है.मेंथा के तेल का उपयोग औषधीय निर्माण में किया जाता है .मेंथा के तेल का उपयोग दवाइयां और सौंदर्य प्रसाधनों के साथ ही सुगंध के लिए भी किया जाता है.

 बाजार में मेंथा के तेल की बढ़ती मांग

मेंथा के तेल का प्रयोग टुथपेस्ट,टॉफी,च्युंगम,कैन्डी आदि बनाने में किया जाता है.मेंथा की मांग बाजार में दिन प्रित दिन बढ़ती ही जा रही है .मिली जानकारी के अनुसार मेंथा का तेल 1000 रुपए प्रति लीटर से अधिक दाम पर बिकता है.मेंथा की एक हेक्टेयर खेती में 40 हजार के करीब की लागत किसानों को लगती है. जिससे किसानों को एक साल में ढाई से तीन लाख तक की कम से कम आय हो जाती है. अब सरकारी स्तर पर मेंथा खेती में 50 प्रतिशत अनुदान मिलने से किसानों को एक हेक्टेयर में मात्र 20 हजार लगेंगे जिससे उन्हें फायदा होगा.

मेंथा औषधीय गुणों से भरपुर

मेन्था की जड़ों की बुवाई का उचति समय 15 जनवरी से लेकर 15 फरवरी तक का होता है. देर से बुवाई करने पर तेल की मात्रा कम हो जाती है और उपज भी कम मिलती है.मेंथा में पहली सिंचाई बुवाई के तुरन्त बाद कर देना चाहिए.मेंथा फसल की कटाई प्रायः दो बार की जाती है.एक हेक्टेयर में लगाई गई मेंथा की फसल से 150 किलो ग्राम तेल निकलता है.सर्दी से आराम दिलाने में मेंथा बहुत ही गुणकारी माना जाता है.मेंथा की भाप लेने से कफ,सर्दी आदि में राहत मिलती है.मेंथा का प्रयोग दांत दर्द में बहुत अधिक फायदेमंद माना जाता है, मेंथा के प्रयोग से अतिसार या दस्त में आराम मिलता है .इसके प्रयोग से पेट संबंधी समस्या दूर हो जाती हैं.

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