बिहार में रियल एस्टेट के लिए बनेगा लोकपाल, आरटीपीएस के दायरे में लाया जाएगा नक्शा, फायर और पर्यावरणीय स्वीकृति

वर्तमान में रेरा से जुड़े फैसलों को चुनौती देने के लिए रेरा ट्रिब्यूनल, जबकि नगर निगम के फैसलों को चुनौती देने के लिए अलग से ट्रिब्यूनल गठित है. लेकिन, इससे इतर कई ऐसे मामले हैं, जिनमें नगर निगम, रेरा, नगर विकास विभाग या ट्रिब्यूनल तक फैसले नहीं ले पाते.
पटना. रियल इस्टेट क्षेत्र में नक्शा पास करने से लेकर फायर (अग्निशमन) और पर्यावरणीय स्वीकृति को लोक सेवा का अधिकार (आरटीपीएस) कानून के दायरे में लाया जायेगा. इसके साथ ही नगर विकास, नगर निगम और रेरा प्राधिकार क्षेत्र से बाहर के मामलों पर सुनवाई के लिए अलग से एक रियल इस्टेट लोकपाल का गठन किया जायेगा. बिहार रियल इस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी ने इससे संबंधित अनुशंसा राज्य स���कार को भेजी है, जिस पर विचार चल रहा है.
रियल इस्टेट उद्यमियों का मानना है कि इस फील्ड में बड़ा निवेश होता है. लेकिन, निवेश के बाद भी समय पर क्लीयरेंस नहीं मिलने से प्रोजेक्ट विलंबित हो जाता है, जिससे बड़ा नुकसान होता है. तकनीकी कारणों से नक्शा पास कराने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है. यही नहीं, फायर और इन्वायरमेंट क्लीयरेंस में भी महीनों लग जाते हैं. कई फोरम पर इस मामले को उठाया गया. क्लीयरेंस को लेकर सिंगल विंडो सिस्टम बनाने का भी भरोसा दिलाया गया. लेकिन, अब तक इस दिशा में मामला आगे नहीं बढ़ सका है.
वर्तमान में रेरा से जुड़े फैसलों को चुनौती देने के लिए रेरा ट्रिब्यूनल, जबकि नगर निगम के फैसलों को चुनौती देने के लिए अलग से ट्रिब्यूनल गठित है. लेकिन, इससे इतर कई ऐसे मामले हैं, जिनमें नगर निगम, रेरा, नगर विकास विभाग या ट्रिब्यूनल तक फैसले नहीं ले पाते. ऐसे मामलों के समाधान को लेकर ही लोकपाल की परिकल्पना की गयी है. वर्तमान में प्लानिंग एरिया-नन प्लानिंग एरिया, ग्राम पंचायत से नक्शा की मंजूरी, मास्टर प्लान से संबंधित कई ऐसे मामले हैं, जिसके लिए उचित प्राधिकार तय नहीं हो पा रहा. इनके लिए लोकपाल की शरण ली जा सकती है. लोकपाल के लिये निर्णयों को अन्य प्राधिकारों द्वारा मानना बाध्यता होगी. इसे नीतिगत निर्णय के रूप में देखा जा सकेगा.
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बिल्डर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के उपाध्यक्ष मणिकांत ने बताया कि रियल इस्टेट प्रोजेक्ट से जुड़ी विभिन्न तरह की स्वीकृतियां सिंगल विंडो सिस्टम के तहत दी जानी चाहिए. फिलहाल इसको लेकर काॅर्डिनेशन नहीं होने से दिक्कत होती है. समयबद्ध तरीके से मंजूरी के लिए नक्शा, पर्यावरण , फायर आदि मंजूरी को आरटीपीएस के दायरे में लाया जा सकता है.
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By Prabhat Khabar News Desk
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