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जानकी नवमी पर हुआ वैदेही विमर्श कार्यक्रम

जानकी नवमी के शुभ अवसर पर वैदेही विमर्श कार्यक्रम पद्मश्री दुलारी देवी की अध्यक्षता में शुक्रवार की शाम प्रो. नरेंद्र नारायण सिंह निराला के आवासीय परिसर में हुआ.

मधुबनी . अकादमी एवं मिथिलांचल हरिनाम सत्संग सम्मेलन मधुबनी के संयुक्त तत्वावधान में जानकी नवमी के शुभ अवसर पर वैदेही विमर्श कार्यक्रम पद्मश्री दुलारी देवी की अध्यक्षता में शुक्रवार की शाम प्रो. नरेंद्र नारायण सिंह निराला के आवासीय परिसर में हुआ. उदय जायसवाल ने कार्यक्रम का आगाज करते हुए कहा कि मिथिला के सीता राम लोक परंपरा भारत नेपाल के जनमानस में छाई हुई है. उन्होंने डॉक्टर किरण सहाय पटना के अभिनंदन ग्रंथ में प्रो. निराला के शोधात्मक आलेख मिथिला की सिया धिया: जन्म भूमि, परंपरा, योजना एवं पर्यटन के प्रकाशन के लिए बधाई एवं शुभकामना दिया. पद्मश्री दुलारी देवी ने स्वयं द्वारा चित्रित की गई सीताराम जयमाला थीम पेंटिंग का अनावरण करते हुए कहा कि सीताराम की थीम मिथिला लोक चित्रकला में बनती रही है, बन रही है और बनती रहेगी. डॉ आदित्य कुमार सिंह ने विदेह एवं वैदेही का बहुत ही सुंदर पौराणिक व्याख्यान प्रस्तुत किया. डॉ दीपक त्रिपाठी ने कहा कि सीता के व्यक्तित्व का सबसे बड़ा उनका पतिव्रत धर्म है. सम्मेलन के सचिव विनय कुमार वर्मा ने स्वागत संबोधन में कहा कि मिथिला में जानकी नवमी परिक्रमा मेला सप्त दिवसीय विवाह महोत्सव स्थान एवं वस्तुओं के नामकरण की परंपरा है. डॉ निवेदिता कुमारी ने संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन के क्रम में कहा कि मिथिलांचल हरिनाम सत्संग सम्मेलन के तत्वावधान में प्रतिवर्ष सीताराम व्याख्यान एवं सत्संग आयोजन होता है. एसपी सिंह ने कहा कि पर्यटन के क्षेत्र में सीताराम सर्किट को विकसित करने की आवश्यकता है. कार्यक्रम में राजेंद्र झा, भोलानाथ झा, डॉ विनोद शंकर झा, सुखदेव राउत, डॉ प्रतिमा कुमारी, स्नेहलता कुमारी, प्रो. विमल प्रसाद सिंह, डॉ सुनीता कुमारी आदि ने भाग लिया.

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