Madhubani News : कलश स्थापन के साथ शारदीय नवरात्र शुरू
Updated at : 22 Sep 2025 9:55 PM (IST)
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लश स्थापन के साथ ही सोमवार से शारदीय नवरात्र की शुरुआत हुई.
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मधुबनी.
कलश स्थापन के साथ ही सोमवार से शारदीय नवरात्र की शुरुआत हुई. भक्तों ने सोमवार को मंदिरों व घरों में कलश स्थापन कर मां दुर्गा का आह्वान किया. प्रथम दिन मां शैलपुत्री की पूजा की गयी. माता शैलपुत्री की महिमा धार्मिक कथाओं और प्रतीकों में निहित है. वे पर्वतराज हिमालय की पुत्री थी. इसलिए शैलपुत्री कहलायी. बैल पर सवारी, त्रिशूल धारण करना और कमल का फूल शक्ति, स्थिरता, धैर्य और पवित्रता का प्रतीक है. नवरात्र के पहले दिन उनकी पूजा मन के मूलाधार चक्र को स्थिर करने के लिए की जाती है. इससे साधक की योग साधना का आरंभ होता है. जो एक प्रतीकात्मक और आध्यात्मिक प्रक्रिया है.मां दुर्गा को सर्वप्रथम शैलपुत्री के रूप में पूजा जाता है. माता का वाहन वृषभ है, इसलिए माता को वृषारूढ़ा भी कहा जाता है. देवी के दाएं हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल सुशोभित है. यही सती के नाम से भी जानी जाती है. जिला मुख्यालय स्थित काली मंदिर परिसर में कामेश्वर सिंह नव दुर्गा पूजा समिति द्वारा हर वर्ष की तरह इस साल भी दुर्गा पूजा का भव्य आयोजन किया गया है. आचार्य पं. बाल कृष्ण झा, हरे कृष्ण झा, गिरींद्र मोहन झा, सोमनाथ झा, राम कुमार झा एवं बबलू झा के वैदिक मंत्रोच्चार के साथ माता की पूजा की. जिससे शहर का संपूर्ण वातावरण आध्यात्मिक रस से सराबोर हो गया है.माता ब्रह्मचारिणी की पूजा आज
नवरात्र के दूसरे दिन मंगलवार को मां ब्रह्मचारिणी की पूजा अर्चना की जाएगी. मां ब्रह्मचारिणी की पूजा अर्चना से आध्यात्मिक और मनोवैज्ञानिक शक्तियां अर्जित होती है. इससे संयम, त्याग और तपस्या जैसे गुणों को बढ़ावा दिया जाता है, जो आत्म-सुधार, इच्छा-शक्ति और जीवन के संघर्षों में दृढ़ रहने के लिए प्रेरित करता है. उनकी कथा और पूजा के माध्यम से भक्त संयम और अनुशासन सीखते हैं, इससे जीवन में मानसिक दृढ़ता और आत्मविश्वास आता है. जो भक्त मां ब्रह्मचारिणी की उपासना करते हैं, उन्हें साधना और तप का अद्भुत फल प्राप्त होता है. इनकी आराधना से त्याग, वैराग्य, संयम, सदाचार जैसे गुण विकसित होते हैं. कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी साधक अपने कर्तव्य से विचलित नहीं होता. मां की कृपा से जीवन में विजय और सिद्धि प्राप्त होती है. साथ ही, इच्छाओं और लालसाओं से मुक्ति के लिए भी इस देवी का ध्यान अत्यंत फलदायी माना गया है. पं. पंकज झा शास्त्री ने बताया कि मां ब्रह्मचारिणी की कठोर तपस्या से तीनों लोकों में हाहाकार मच गया. देवता, ऋषि, मुनि और सिद्धगण उनकी साधना को अभूतपूर्व बताते हुए उनकी स्तुति करने लगे. अंततः पितामह ब्रह्मा ने आकाशवाणी द्वारा प्रसन्न होकर उन्हें आशीर्वाद दिया कि भगवान शिव पति रूप में उन्हें अवश्य प्राप्त होंगे. इस तरह देवी की तपस्या ने पूरे ब्रह्मांड को प्रभावित कर दिया.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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