Madhubani News : 16 प्रखंडों में सिंथेटिक पायरोथायराइड कीटनाशक छिड़काव की हुई शुरुआत

Updated at : 19 Feb 2025 10:27 PM (IST)
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Madhubani News : 16 प्रखंडों में सिंथेटिक पायरोथायराइड कीटनाशक छिड़काव की हुई शुरुआत

सिंथेटिक पायरोथायराइड कीटनाशक छिड़काव जिले के कालाजार प्रभावित 16 प्रखंडों में बुधवार से शुरु हुई है.

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मधुबनी.

जिले में कालाजार उन्मूलन कार्यक्रम के तहत सिंथेटिक पायरोथायराइड कीटनाशक छिड़काव जिले के कालाजार प्रभावित 16 प्रखंडों में बुधवार से शुरु हुई है. अभियान की शुरुआत सदर अस्पताल परिसर से जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर सिविल सर्जन डॉ. हरेंद्र कुमार, एसीएमओ डॉ. एसएन झा, मलेरिया पदाधिकारी डॉ. डीएस सिंह ने किया. प्रथम चरण में छिड़काव अभियान 19 फरवरी से 19 अप्रैल तक चलेगी. इसके लिए चयनित प्रखंड के बीएचआई, भीबीडीएस बीएचडब्लू (मलेरिया), सीआइ व एसएफडब्लू को एकदिवसीय प्रशिक्षण किया गया है. जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. डीएस सिंह ने कहा कि अभियान के दौरान लोगों को मच्छरदानी लगाकर सोने, घरों के आसपास साफ-सफाई रखने और नालियों को साफ रखने के लिए स्वास्थ्य कर्मी के माध्यम से जागरूक किया जाएगा. ताकि लोगों को वेक्टर जनित रोग जैसे कालाजार, मलेरिया, डेंगू से बचाव के लिए प्रेरित किया जा सके. उन्होंने बताया कि छिड़काव के पूर्व घर की दीवार की छेद व दरार बंद कर दें, घर के सभी कमरों, रसोई घर, पूजा घर, एवं गोहाल के अन्दरूनी दीवारों पर छः फीट तक छिड़काव अवश्य कराएं एवं छिड़काव के दो घंटे बाद घर में प्रवेश करें.

छिड़काव के पूर्व भोजन सामग्री, बर्तन, कपड़े आदि को घर से बाहर रख दें. ढाई से तीन माह तक दीवारों पर लिपाई-पोताई नहीं करें, ताकि कीटनाशक का असर बना रहे.

जिला में 16 प्रखंड के 36 राजस्व ग्रामों में कालाजार नियंत्रणार्थ सिंथेटिक पायरोथायराइड कीटनाश का छिड़काव किया जाएगा. इसमें लौकही, बासोपट्टी, माधवपुर, बेनीपट्टी, खजौली, बिस्फी, हरलाखी, जयनगर,लदनिया, अंधराठाढ़ी, झंझारपुर, लखनौर,मधेपुर, पंडौल, राजनगर, रहिका के 66,127 घरों के 1, 58,491 कमरे शामिल है=. इसमें आक्रांत राजस्व ग्रामों की जनसंख्या 3,15,229 में है. इसके लिए 2955 किलो एसपी उपलब्ध कराया गया है. इसके लिए कुल 17 दल बनाए गए हैं.

कालाजार के कारण

वीबीडीसी पुरुषोत्तम कुमार ने बताया कि कालाजार मादा फाइबोटोमस अर्जेंटिपस(बालू मक्खी) के काटने के कारण होता है, जो कि लीशमैनिया परजीवी का वेक्टर (या ट्रांसमीटर) है. किसी जानवर या मनुष्य को काट कर हटने के बाद भी अगर वह उस जानवर या मानव के खून से युक्त है तो अगला व्यक्ति जिसे वह काटेगा वह संक्रमित हो जायेगा. इस प्रारंभिक संक्रमण के बाद के महीनों में यह बीमारी और अधिक गंभीर रूप ले सकती है, जिसे आंत में लिशमानियासिस या कालाजार कहा जाता है.

बीएल के 8 मरीज मिले

जिले में लगातार छिड़काव के कारण कालाजार उन्मूलन के लिए भारत सरकार का जो मानक है उसे प्राप्त किया जा चुका है. मरीजों की संख्या शून्य करने के लिए लगातार प्रयास किया जा रहा है. जिले में वर्ष 2009 में 730 मरीज, 2010 में 630, वर्ष 2011 में 538, वर्ष 2012 में 415, वर्ष 2013 में 321, वर्ष 2014 में 256, वर्ष 2015 में 187, मरीज 2016 में 108, मरीज, 2017 में 85 मरीज, 2018 में 50, 2019 में 31,और 2020 में 28 मरीज 2021 में 24 तथा 2022 में 26 मरीज मिले हैं जिसमें वीएल के 16 वह पीकेडीएल के 10 मरीज मिले हैं. 2023 में 8 मरीज मिले हैं जिसमें वीएल के 6 व पीकेडीएल के 1 व एचआइवी के 1 मरीज मिले हैं. वही 2024 में बीएल के 8 मरीज मिले हैं

सरकार की ओर से मिलती है आर्थिक सहायता

कालाजार से पीड़ित रोगी को मुख्यमंत्री कालाजार राहत योजना के तहत श्रम क्षतिपूर्ति के रूप मे मरीजों को राज्य सरकार द्वारा 6600 रुपये तथा केंद्र सरकार की ओर से 500 रुपए केंद्र सरकार की ओर दिया जाता है. यह राशि वीएल (ब्लड रिलेटेड) कालाजार में रोगी को दिया जाता है. वहीं चमड़ी से जुड़े कालाजार (पीकेडीएल) मरीजों को केंद्र सरकार द्वारा 2000 रुपये की राशि दी जाती है.

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