हर बच्चे तक पहुंचेगा टीकाकरण का सुरक्षा चक्र, डिजिटल होगा अब पूरा हिसाब
प्रतीकात्मक तस्वीर
मधुबनी में अब हर बच्चे को गंभीर बीमारियों से बचाने के लिए टीकाकरण को पूरी तरह डिजिटल और हाईटेक बनाया जा रहा है. डिजिटल माइक्रोप्लानिंग और ITIMS पोर्टल पर निगरानी से सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई भी बच्चा टीकाकरण से वंचित न रहे.
Madhubani News: जिले के शत-प्रतिशत बच्चों को गंभीर बीमारियों से बचाने के लिए नियमित टीकाकरण कार्यक्रम को अब पूरी तरह डिजिटल और हाईटेक बनाया जा रहा है. इसके तहत प्रखंड से लेकर जिला स्तर तक टीकाकरण की माइक्रोप्लानिंग और उसकी निगरानी डिजिटल माध्यम से की जाएगी. राज्य प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. एसपी विनायक ने सिविल सर्जन और जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी को इस संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिया है.
नए सिरे से अपडेट होगा डिजिटल माइक्रोप्लान
राज्य स्वास्थ्य समिति के निर्देश के आलोक में जिले के सभी प्रखंडों में डिजिटल सूक्ष्म कार्ययोजना यानी डिजिटल माइक्रोप्लान को नए सिरे से अपडेट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है.
राज्य प्रतिरक्षण पदाधिकारी के निर्देश के अनुसार अब प्रखंड से लेकर जिला स्तर तक नियमित रूप से इसकी समीक्षा होगी. खास तौर पर उन उपकेंद्रों पर विशेष नजर रखी जाएगी, जहां पहले एएनएम, बीसीएम या चिकित्सा पदाधिकारियों के स्तर पर कार्ययोजना में त्रुटियां या कमियां सामने आयी थीं.
सभी बैठकों और प्रगति की रिपोर्ट को ITIMS पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य किया गया है.
सिविल सर्जन ने कहा, कागजी खानापूर्ति नहीं चलेगी
सिविल सर्जन डॉ. हरेंद्र कुमार ने कहा कि टीकाकरण अभियान में केवल कागजी खानापूर्ति नहीं, बल्कि धरातल पर परिणाम चाहिए. नियमित टीकाकरण में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
उन्होंने कहा कि डिजिटल माइक्रोप्लान का उद्देश्य सिर्फ डेटा फीडिंग नहीं है, बल्कि जिले के अंतिम पायदान तक खड़े प्रत्येक बच्चे को टीकाकरण के सुरक्षा चक्र से जोड़ना है.
जिन क्षेत्रों में टीकाकरण की प्रगति धीमी है या कार्ययोजना में कमियां हैं, वहां चिकित्सा पदाधिकारियों को फील्ड में उतरकर निगरानी करने का निर्देश दिया गया है.
बाढ़ प्रभावित और महादलित टोलों पर खास नजर
स्वास्थ्य विभाग ने जिले के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों, महादलित टोलों और ईंट-भट्ठों जैसे दुर्गम इलाकों के लिए विशेष रणनीति तैयार करने का निर्देश दिया है.
इन क्षेत्रों में टीकाकरण से छूटने वाले बच्चों की पहचान और उन्हें टीकाकरण सत्र तक पहुंचाने में स्थानीय प्रभावशाली लोगों की मदद ली जाएगी. टीकाकरण को लेकर लोगों में हिचकिचाहट दूर करने के लिए स्थानीय धर्मगुरुओं और प्रबुद्ध समाजसेवियों को भी अभियान से जोड़ा जाएगा.
ITIMS पोर्टल से होगी पूरी मॉनिटरिंग
नयी व्यवस्था में समीक्षा बैठकों की पूरी जानकारी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दर्ज करनी होगी. प्रखंड स्तर पर सामने आने वाली कमियों को जिला स्तरीय टीम 24 घंटे के भीतर दूर करने का प्रयास करेगी, ताकि किसी भी टीकाकरण सत्र पर इसका असर नहीं पड़े.
स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य है कि डिजिटल निगरानी और फील्ड स्तर पर बेहतर समन्वय के माध्यम से जिले के प्रत्येक पात्र बच्चे को समय पर जरूरी टीके उपलब्ध कराये जाएं.
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