बिहार में अब संस्कृत स्कूलों को भवन निर्माण के लिए मिलेगी राशि, फर्नीचर व उपस्करों की कमी होगी दूर

Author Ashish jha
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बिहार में संस्कृत स्कूल का जर्जर भवन

बिहार सरकार मध्यमा की परीक्षा में अव्वल आने वाले छात्रों को सामान्य विद्यालयों के छात्रों की तरह सहायता राशि देने पर भी विचार कर रही है. संस्कृत शिक्षा बोर्ड के सचिव अमर भूषण ने जिले के सभी प्रस्वीकृत 113 संस्कृत स्कूलों को भवन, उपस्कर व पुस्तक उपलब्ध कराने का भी आश्वासन दिया है.

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मधुबनी. संस्कृत विद्यालयों के समग्र विकास के लिए सरकार व शिक्षा विभाग की ओर पहल शुरू की गयी है. मध्यमा सहित अन्य परीक्षाओं में बेहतर रिजल्ट देने वाले संस्कृत स्कूलों को भवन निर्माण के लिए राशि उपलब्ध करायी जाएगी. इसके लिए सरकार ने 10 करोड़ रुपये की स्वीकृति भी दी है. साथ ही सरकार मध्यमा की परीक्षा में अव्वल आने वाले छात्रों को सामान्य विद्यालयों के छात्रों की तरह सहायता राशि देने पर भी विचार कर रही है. यह आश्वासन संस्कृत शिक्षा बोर्ड के सचिव अमर भूषण ने समीक्षा बैठक के दौरान दी है. उन्होंने जिले के सभी प्रस्वीकृत 113 संस्कृत स्कूलों को भवन, उपस्कर व पुस्तक उपलब्ध कराने का भी आश्वासन दिया है.

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छात्रों को संस्कृत स्कूल से जोड़ना जरूरी

समीक्षा बैठक में संस्कृत शिक्षा बोर्ड के सचिव अमर भूषण ने कहा कि संस्कृत विद्यालयों से अधिक से अधिक छात्रों को जोड़ने के लिए अभिभावकों के साथ बैठक करें. साथ ही अभिभावकों को अपने बच्चों को संस्कृत स्कूलों में भेजने के लिए प्रेरित करें. उन्होंने कहा कि संस्कृत विद्यालयों को मुख्यधारा के स्कूलों के समकक्ष लाने के लिए सरकार हर संभव कोशिश कर रही है. संस्कृत शिक्षा को पटरी पर लाने के लिए संस्कृत स्कूलों से जुड़े शिक्षकों व कर्मियों को आगे आना होगा.

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आधे से अधिक संस्कृत स्कूल का भवन जर्जर

जिले में 113 संस्कृत विद्यालय प्रस्वीकृत है. जिसमें से आधे से अधिक संस्कृत स्कूलों का भवन जर्जर है. इन स्कूलों में 250 शिक्षक व कर्मी पदस्थापित हैं. तकरीबन 500 शिक्षकों व कर्मियों के पद रिक्त हैं. ऐसे में इन स्कूलों में छात्र-छात्राओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना दूर कराना स्कूल प्रबंधन के लिए संभव नहीं हो पा रहा है. छात्र-छात्रा भी इन स्कूलों में नामांकन कराने से कतराने लगे हैं.

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