सिंचाई व्यवस्था ठप, लाखों के नलकूप बेकार होने से भगवान भरोसे किसान

Author Jib nath jha|Edited by Sumit Kumar
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बंद पड़ा नलकूप | Prabhat Khabar Network

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बिस्फी प्रखंड में सिंचाई की लचर व्यवस्था से किसान परेशान हैं। लाखों के नलकूप बेकार पड़े हैं, जिससे सैकड़ों एकड़ फसल सूख रही है और किसान खेती छोड़ने को मजबूर हैं।

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Irrigation Problem: मधुबनी के बिस्फी प्रखंड क्षेत्र में सिंचाई की समुचित व्यवस्था नहीं होने से स्थानीय किसानों के बीच गहरा असंतोष और मायूसी छाई हुई है. कृषि को आसान बनाने और सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लाखों रुपए खर्च कर विभिन्न क्षेत्रों में राजकीय नलकूप लगाए गए थे और नदी-नाले भी खोदे गए थे. हालांकि, देखरेख और विभागीय उदासीनता के कारण सभी नलकूप बेकार पड़े हैं.

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सैकड़ों एकड़ जमीन बर्बाद, फिर भी नहीं मिला पानी

सिंचाई परियोजनाओं के नाम पर किसानों की सैकड़ों एकड़ उपजाऊ जमीन तो अधिग्रहित और इस्तेमाल कर ली गई, लेकिन इसका लाभ आम किसानों को नहीं मिल सका. नलकूप और नाले दोनों ही अनुपयोगी साबित हो रहे हैं. पानी न मिलने के कारण किसान निजी बोरिंग के सहारे खेती करने को विवश हैं. अत्यधिक लागत आने की वजह से किसानों का बजट बिगड़ रहा है और उनकी परेशानी बढ़ती जा रही है.

2004 से बंद पड़ा है नाबार्ड योजना का नलकूप

प्रखंड की सिमरी पंचायत अंतर्गत पछवारी बांध में वर्ष 2004 में नाबार्ड (NABARD) योजना के तहत राजकीय नलकूप स्थापित किया गया था. आज यह नलकूप किसानों के लिए महज एक दिखावा बनकर रह गया है. लाखों रुपए मूल्य की मशीनें सालों से बंद पड़े रहने के कारण जंग खा रही हैं. किसानों ने इस समस्या को लेकर विभागीय अधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधियों तक कई बार गुहार लगाई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई.

धान के बिचड़े सूखने से आक्रोशित हैं किसान

मौसम की अनिश्चितता के बीच किसानों ने किसी तरह धान के बिचड़े (पौध) तैयार किए थे, जो अब पानी के अभाव में सूख रहे हैं. सिंचाई व्यवस्था न होने से आक्रोशित किसान रामलखन पासवान, पलटू दास, राजेंद्र खरगा, गंगाराम पासवान, सीता देवी और राजकुमार कापड़ी सहित अन्य किसानों ने बताया कि यदि नलकूप चालू होते तो धान की रोपनी समय पर हो जाती. व्यवस्था से निराश होकर कई किसानों ने तो खेती करना ही छोड़ दिया है.


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