झंझारपुर में सजी मैथिली साहित्य की महफिल, 50 से अधिक लेखक-समीक्षक हुए शामिल

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ललित नारायण जनता महाविद्यालय, झंझारपुर में 'सगर राति दीप जरय' की 127वीं कथा गोष्ठी का आयोजन हुआ. इसमें मिथिला के 50 से अधिक मैथिली कथाकारों ने अपनी रचनाओं का पाठ किया और समकालीन साहित्यिक सवालों पर विमर्श किया.

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झंझारपुर कथा गोष्ठी: शब्द की साधना और कथा की लौ को लगातार जलाए रखने वाले संस्थान ‘सगर राति दीप जरय’ की 127वीं कथा गोष्ठी का दो दिवसीय साहित्यिक आयोजन ललित नारायण जनता महाविद्यालय, झंझारपुर में संपन्न हुआ. 19 और 20 सितंबर तक चले इस आयोजन में मिथिला के अलग-अलग क्षेत्रों से पहुंचे मैथिली कथाकारों ने अपनी रचनाओं का पाठ किया. कथा पाठ के साथ उसकी समीक्षा और समकालीन सवालों पर चर्चा भी हुई.

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मैथिली कथाकारों ने किया रचनाओं का पाठ

दो दिवसीय कथा गोष्ठी की अध्यक्षता प्रख्यात साहित्यकार प्रो. डॉ. नारायण झा ने की. कार्यक्रम में मिथिला के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे मैथिली भाषा के कथाकारों ने अपनी कहानियां प्रस्तुत कीं.

पठित कथाओं पर मौजूद साहित्यकारों और विशेषज्ञों ने विस्तार से समीक्षा की. इस दौरान कहानियों के शिल्प, संवेदना और उनमें उठाये गये समकालीन सवालों पर चर्चा हुई.

कथा के जरिए समय को समझने पर विमर्श

कार्यक्रम में शामिल लोग  | Prabhat Khabar Network
कार्यक्रम में शामिल लोग | Prabhat Khabar Network

गोष्ठी में कहानी को केवल मनोरंजन या साहित्यिक रचना के तौर पर देखने के बजाय उसे समय और समाज की अभिव्यक्ति के रूप में समझने पर जोर रहा. चर्चा में यह भाव प्रमुखता से सामने आया कि कहानी अपने समय की परिस्थितियों और सवालों का साक्ष्य भी बनती है.

साहित्य और समाज के बीच संवाद कायम करने वाली इस गोष्ठी में स्थानीय साहित्य प्रेमियों की भी बड़ी भागीदारी रही. दो दिनों तक महाविद्यालय परिसर में मैथिली कथा-साहित्य और उससे जुड़े विषयों पर चर्चा होती रही.

50 से अधिक लेखक-समीक्षक हुए शामिल

आयोजन में चंद्रेश, डॉ. नारायण जी, डॉ. जयानंद मिश्र, धीरेन्द्र कुमार झा, आद्यानाथ झा नवीन, मालती मिश्र, प्रीतम कुमार निषाद, डॉ. बुचरू पासवान, हिरेन्द्र कुमार झा, वाचस्पति ठाकुर सुजीत, पंकज प्रियांशु, सुरेश मिश्र, डॉ. प्रतिभा स्मृति, राज कुमार मिश्र, डॉ. महेंद्र नारायण राम, डॉ. धनाकर ठाकुर, अदिति, फूलचंद्र झा प्रवीण, सुनीता झा, डॉ. अजीत मिश्र, डॉ. नवोनाथ झा, उत्पलनाथ झा, डॉ. शुभ कुमार वर्णवाल, डॉ. विनय विश्वबंधु, अजीत आजाद, डॉ. योगानंद झा सहित 50 से अधिक लेखक और समीक्षक मौजूद रहे.

पंकज प्रियांशु और डॉ. सोनू कुमार झा ने किया संचालन

कार्यक्रम का संचालन पंकज प्रियांशु और डॉ. सोनू कुमार झा ने किया. वहीं आयोजन के संयोजन की जिम्मेदारी राज कुमार मिश्र ने संभाली.

दो दिवसीय आयोजन में कथा पाठ, समीक्षा और साहित्यिक संवाद के जरिए मैथिली कथा-साहित्य से जुड़े रचनाकारों और पाठकों को एक मंच मिला. स्थानीय साहित्य प्रेमियों की मौजूदगी ने कार्यक्रम को व्यापक सहभागिता प्रदान की.

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