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Madhubani News : सीएस ने हास्पिटल के संचालक पर लगाया पांच लाख रुपये का अर्थदंड

Updated at : 03 Oct 2025 10:52 PM (IST)
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Madhubani News : सीएस ने हास्पिटल के संचालक पर लगाया पांच लाख रुपये का अर्थदंड

मां हास्पिटल के संचालक मो. कयामुद्दीन पर तीसरी बार नियमों का उल्लंघन करने पर 5 लाख रुपये का अर्थ दंड लगाया है.

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मधुबनी.

बिना निबंधन एवं मानक के अनुरूप नर्सिंग होम का संचालन नहीं करने के मामले में सिविल सर्जन डॉ. हरेंद्र कुमार ने बेनीपट्टी जेल गेट के सामने स्थित मां हास्पिटल के संचालक मो. कयामुद्दीन पर तीसरी बार नियमों का उल्लंघन करने पर 5 लाख रुपये का अर्थ दंड लगाया है. सिविल सर्जन ने संचालक को पत्र प्राप्ति के 24 घंटे के अंदर हास्पिटल बंद करने एवं अर्थ दंड की राशि जिला निबंधन प्राधिकार के नाम से बैंक ड्राफ्ट के माध्यम से जमा करने का निर्देश दिया. आदेश का उल्लंघन करने पर संचालक के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी.

तीसरी बार नियमों उल्लंघन करने का पाया गया दोषी

सिविल सर्जन डॉ. हरेंद्र कुमार के निर्देश पर उपाधीक्षक अनुमंडलीय अस्पताल बेनीपट्टी ने 27 अक्टूबर को मां हास्पिटल की जांच की. सिविल सर्जन को सौंपे प्रतिवेदन में उपाधीक्षक ने बिना निबंधन एवं मानक के अनुरूप नर्सिंग होम संचालित नहीं होने की बात कही है. साथ ही जांच के क्रम में दो महिलाओं का सी-सेक्शन करने तथा एक महिला का सी- सेक्शन की तैयारी की बात भी कही गई है. सिविल सर्जन डॉक्टर हरेंद्र कुमार ने बताया कि इसके पूर्व भी प्रथम एवं द्वितीय उल्लंघन मामले में क्रमशः 50 हजार एवं 1 लाख रुपए का अर्थदंड संचालक पर लागाया गया था. संचालित निजी क्लिनिक के संचालक डॉ. शैलेन्द्र कुमार से सिविल सर्जन डा. हरेंद्र कुमार ने जबाव तलब करते हुए 50 हजार रुपए का आर्थिक दंड लगाया है. साथ ही संस्थान को पूर्णतया बंद करने का निर्देश दिया गया है. जानकारी देते हुए सिविल सर्जन डॉ. हरेंद्र कुमार ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा राज्य में क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट रेगुलेशन लागू किए जाने के बाद अब सभी तरह के क्लिनिकों, नर्सिंग होम, अस्पताल, लैबोरेट्री, रेडियोलॉजी केंद्र का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया गया है. इसके लिए जिला स्तर पर जिला प्राधिकार के गठन की अधिसूचना जारी की गई है. अगर कोई क्लिनिक अस्पताल या नर्सिंग होम बिना रजिस्ट्रेशन कराये, संचालित किया जाता है, तो पहली बार उल्लंघन करने पर 50 हजार, दूसरी बार उल्लंघन करने पर 1 लाख तक और उसके बाद निबंधन नहीं कराने पर 5 लाख तक का जुर्माना लगाया जा सकता है. राज्य सरकार ने क्लीनिकल इस्टैब्लिशमेंट रजिस्ट्रीकरण और विनियमन अधिनियम 2010 में ही विधानमंडल के दोनों सदनों में पास कर लिया है. इसे प्रभावी बनाने के लिए राज्य सरकार द्वारा बिहार नैदानिक स्थापना रजिस्ट्रीकरण एवं विनियमन नियमावली 2013 को अधिसूचित कर दिया है. इसे प्रभावी बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा नैदानिक स्थापना राज्य परिषद और जिला रजिस्ट्रीकरण प्राधिकार का गठन किया गया है. इस रेगुलेशन के प्रभावी होने के बाद अब राज्य के सभी प्रकार के इलाज करने वाले संस्थान का निबंधन का रास्ता साफ हो गया है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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GAJENDRA KUMAR

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By GAJENDRA KUMAR

GAJENDRA KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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