बिना रजिस्ट्रेशन व मानक के अनुरूप संचालित नहीं होने वाले निजी स्वास्थ्य संस्थानों के अर्थ दंड की गयी कमी

बिहार सरकार ने बिना रजिस्ट्रेशन संचालित निजी स्वास्थ्य संस्थानों पर लगने वाले जुर्माने की राशि में बड़ी कटौती की है। अब नए नियमों के तहत दंड का प्रावधान जानें।
नयी अधिसूचना के तहत पहले उल्लंघन में 10 हजार, दूसरे उल्लंघन में 25 हजार व तीसरे उल्लंघन में संस्थानों को सील करने का प्रावधान
प्रतिनिधि, मधुबनी
बिहार सरकार ने बिना रजिस्ट्रेशन व मानक के अनुरूप संचालित नहीं होने बाले निजी स्वास्थ्य संस्थानों के अर्थ दंड की राशि में 5 व 8 गुणा की कमी कर दी है. पहले अवैध व मानक अनुरूप संचालित नहीं होने पर प्रथम उल्लंघन पर 50 हजार रुपये, दूसरे उल्लंघन पर 2 लाख व तीसरे उल्लंघन पर 5 लाख रुपये आर्थिक दंड का प्रावधान था. नई अधिसूचना के तहत पहले उल्लंघन मे 10 हजार, दूसरे उल्लंघन में 25 हजार तथा तीसरे उल्लंघन में संस्थानों को सील करने का प्रावधान किया गया है.
क्या है नयी अधिसूचना
बिहार लघु एवं मध्यम स्वास्थ्य सेवा प्रतिष्ठान स्थापना एवं पंजीकरण विनियम 2028 भारत के संविधान के अनुच्छेद-162 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, बिहार के राज्यपाल लघु एवं मध्यम स्वास्थ्य सेवा प्रतिष्ठान की स्थापना और निबंधन को विनियमित करने के लिए यह विनियम बनाया हैं. इस विनियम को बिहार लघु और मध्यम स्वास्थ्य सेवा प्रतिष्ठान (स्थापना एवं निबंधन) विनियम 2026 कहा जाएगा. इसका विस्तार संपूर्ण बिहार राज्य में होगा. यह बिहार राज्य के सभी लघु एवं मध्यम स्वास्थ्य सेवा प्रतिष्ठानों पर लागू होगा. यह विनियम भारत सरकार के नैदानिक स्थापन (रजिस्ट्रीकरण एवं विनियमन) अधिनियम, 2010 अथवा बिहार नैदानिक स्थापन पंजीकरण एवं विनियमन नियमावली, 2013 का भाग नहीं होगा. पंजीकरण प्राधिकरण द्वारा रखे जा रहे रजिस्टर के साथ निरंतर अद्यतन बना रहे. लघु एवं मध्यम स्वास्थ्य सेवा प्रतिष्ठानों का राज्य रजिस्टर का रखरखाव बिहार स्वास्थ्य विभाग, डिजिटल रूप मे और ऐसे प्रारूप में, जिसमें सरकार द्वारा निर्धारित विवरण शामिल हों, एक रजिस्टर का रखरखाव करेगा. जिसे ''''लघु एवं मध्यम स्वास्थ्य सेवा प्रतिष्ठानों का राज्य रजिस्टर \" के नाम से जाना जाएगा. दंड जो कोई भी इस विनियम के किसी भी प्रावधान का उल्लंघन करेगा, यदि कहीं और कोई दंड निर्धारित नहीं है तो, पंजीकरण प्राधिकारी द्वारा, उसे पहले उल्लंघन के लिए दस हजार रुपये के जुर्माने से, दूसरे उल्लंघन के लिए पच्चीस हजार रुपये के जुर्माने से और उसके बाद के उल्लंघन के लिए पचास हजार रुपये के जुर्माने से दंडित किया जाएगा. इसके बाद, यदि स्वास्थ्य सेवा संस्थान इस विनियम के प्रावधानों का उल्लंघन करना जारी रखता है, तो उसका पंजीकरण तब तक निलंबित रहेगा जब तक कि इस विनियम के प्रावधानों का अनुपालन नहीं कर लिया जाता है.
गैर-पंजीकरण के लिए आर्थिक दंड
बिना पंजीकरण के कोई स्वास्थ्य सेवा प्रतिष्ठान चलाएगा, वह पहली बार उल्लंघन करने पर दस हजार रुपये के आर्थिक दंड का भागी होगा; दूसरी बार उल्लंघन करने पर पच्चीस हजार रुपये के आर्थिक दंड का भागी होगा. इसके बाद किसी भी उल्लंघन की स्थिति में ऐसे स्वास्थ्य सेवा प्रतिष्ठान को सील कर दिया जाएगा. प्राधिकार द्वारा "भारतीय न्याय संहिता " की सुसंगत धारा के तहत उसके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई शुरू की जा सकती है. प्राधिकार के निर्णय से व्यथित कोई भी व्यक्ति उक्त निर्णय की तिथि से तीन महीने की अवधि के अंदर राज्य परिषद को अपील कर सकता हैं. निर्देशों की अवहेलना, बाधा डालना और जानकारी देने से इनकार करना. जो कोई भी जान-बूझकर, इस विनियम के तहत निर्देश देने के लिए अधिकृत किसी व्यक्ति या प्राधिकार द्वारा विधिपूर्वक दिए गए किसी निर्देश की अवहेलना करता है, या किसी व्यक्ति या प्राधिकार को उन कार्यों के निर्वहन में बाधा डालता है, उस व्यक्ति या प्राधिकारी को इस विनियम के तहत पूरा करना आवश्यक या अधिकृत है, तो वह मौद्रिक दंड का भागी होगा. जो पांच लाख रुपये तक हो सकता है. सिविल सर्जन डॉ हरेंद्र कुमार ने कहा कि अवैध व मानक अनुरूप संचालित नहीं होने वाले नर्सिंग होम, पैथ लैब, अल्ट्रासाउंड व एक्स-रे क्लिनिक पर विभाग सख्त है.
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