भीड़ के आगे बेबस बना पुलिस प्रशासन

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मधुबनी : शनिवार की रात जिले के अंधराठाढ़ी थाना क्षेत्र में हुए डकैती व हत्या के मामले को लेकर गांव वाले का आक्रोश का शिकार थानाध्यक्ष को होना पड़ा. हालांकि डकैती द्वारा गृहस्वामी बेचन गुप्ता की निर्मम हत्या ही नहीं किया बल्कि उनके वृद्ध पिता को भी बुरी तरह से मारपीट कर लाखों की परिसंपत्ति […]

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मधुबनी : शनिवार की रात जिले के अंधराठाढ़ी थाना क्षेत्र में हुए डकैती व हत्या के मामले को लेकर गांव वाले का आक्रोश का शिकार थानाध्यक्ष को होना पड़ा. हालांकि डकैती द्वारा गृहस्वामी बेचन गुप्ता की निर्मम हत्या ही नहीं किया बल्कि उनके वृद्ध पिता को भी बुरी तरह से मारपीट कर लाखों की परिसंपत्ति लूट ली थी.
ग्रामीणों का कहना था कि पुलिस की लापरवाही के कारण ही इतनी बड़ी घटना को अंजाम दिया गया है पर वस्तु स्थिति इससे भिन्न है. गृहस्वामी की पत्नी जब किसी तरह जान बचाकर रात में डेढ़ बजे थाना पर पहुंची तो थानाध्यक्ष स्वयं ट्राउजर व टीशर्ट में दो चौकीदार के साथ घटनास्थल पर पहुंचे. रिवाल्वर को काक करके थानाध्यक्ष ने आस पड़ोस के लोगों को आवाज लगाई पर एक भी लोग घटनास्थल पर न आकर घरों में दुबके रहे.
एसपी ने की कार्रवाई
घटना के अहले सुबह ग्रामीणों ने सड़क जाम, रेल रोकने व थाना में तोड़ फोड़ कर आक्रोश व्यक्त किया. घटना स्थल पर पुलिस के वरीय पदाधिकारियों के पहुंचने पर उन्हें घेराव किया.
एसपी ने तत्काल थानाध्यक्ष को निलंबित कर दिया. पर इससे भी ग्रामीणों का आक्रोश शांत नहीं हुआ. ग्रामीण थानाध्यक्ष पर प्राथमिकी दर्ज करने के लिए अड़े रहे. अंत में पुलिस अधीक्षक थानाध्यक्ष के विरुद्ध एफआइआर करने के निर्देश दिये. ऐसे में देखा जाए तो भीड़ तंत्र के आगे पुलिस बेवश नजर आई.
अंधराठाढ़ी के थानाध्यक्ष के निलंबन व संगीन धाराओं के अंतर्गत प्राथमिकी होने पर जिले में पुलिस अधिकारियों में रोष व्याप्त है. ऐसे में कई पुलिस अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि ऐसे में पुलिस निर्भिक व निष्पक्ष हो के कैसे कार्य कर सकती है. सौ दो सौ की मजमा अगर किसी अधिकारी के विरुद्ध खड़ी हो जायेगी तो क्या उस अधिकारी को बलि का बकरा तो क्या उस अधिकारी को बलि का बकरा बना दिया जायेगा.
कहते हैं निवर्तमान थानाध्यक्ष
निवर्तमान थानाध्यक्ष रंजीत कुमार ने बताया कि जिस परिवार में घटना घटी है उस परिवार के लोगों को मुझसे कोई शिकायत नहीं था. कुछ ऐसे तत्व जिनके दबाव में आकर कार्य नहीं करता था वैसे लोगों द्वारा भीड़ को उकसा कर इस तरह बदले की भावना के तहत कार्रवाई की गई है.
ऐसे में पुलिस का मनोबल टूटेगा और अधिकारी थानाध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पद पर जाने से हिचकेंगे.मैं डाका कांड में मृतक के पत्नी के साथ वगैर जूता पहने रिवाल्वर लेकर घटनास्थल की ओर दोड़ा गया तो वहां पाया कि गृहस्वामी की हत्या आधा घंटा पहले ही हो चुकी है वहां खून का थक्का जमा था और अपराधी भाग चूके थे. मैंने उसी समय अपने वरीय पदाधिकारी व अगल बगल के थाना को मोबाइल पर सूचना दी. फोन कॉल रिकार्ड में इसे देखा जा सकता है.
क्या कहते हैं पुलिस अधीक्षक
पुलिस अधीक्षक राजेश कुमार ने बताया कि प्राथमिक पूछताछ में परिवार के लोग ही घटना में संलिप्त होने की जानकारी मिल रही है. पुलिस पूरी तरह से घटना की छानबीन कर रही है.
इसके लिए झंझारपुर के इंस्पेक्टर को अनुसंधान की जिम्मेवारी दी गई है. थानाध्यक्ष पर हुई प्राथमिकी के संबंध में उन्होंने कहा कि भीड़ के दबाव के कारण इस तरह की कार्रवाई हुई है. जांच में सारी बातें साफ हो जायेगी. थानाध्यक्ष निदरेष होंगे तो उनपर कोई कार्रवाई नहीं होगी.
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