वार्ड नंबर 22 की पार्षद की सदस्यता बरकरार
Updated at : 20 Jul 2019 5:32 AM (IST)
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मधुबनी : नगर परिषद वार्ड नंबर 22 की पार्षद शबनम आरा की सदस्यता बरकरार रहेगी. वादी सईदा खातून के परिवाद पत्र पर राज्य निर्वाचन आयुक्त द्वारा सुनवाई के बाद निरस्त कर दिया. करीब एक साल से चले आ रहे कयासों पर विराम लग गया. वादी द्वारा लगाये गये आरोप के विरुद्ध साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया […]
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मधुबनी : नगर परिषद वार्ड नंबर 22 की पार्षद शबनम आरा की सदस्यता बरकरार रहेगी. वादी सईदा खातून के परिवाद पत्र पर राज्य निर्वाचन आयुक्त द्वारा सुनवाई के बाद निरस्त कर दिया. करीब एक साल से चले आ रहे कयासों पर विराम लग गया. वादी द्वारा लगाये गये आरोप के विरुद्ध साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया जा सका.
दरअसल प्रतिवादी शबनम आरा ने दो सेट में नामांकन निर्देशन दायर किया था. जिसमें दूसरे सेट में उनके द्वारा दी गयी सभी सूचना सही पायी गयी. अंतिम सुनवाई के बाद वादी द्वारा दायर परिवाद पत्र को बिहार नगर पालिका अधिनियम 2007 (यथा संशोधित) धारा 18(1) के अंतर्गत निरस्त किया गया.
क्या है मामला. नगर पालिका चुनाव 2017 में दूसरे स्थान पररही सईदा खातून ने पार्षद शबनम आरा के विरुद्ध परिवाद पत्र दायर किया था. जिसमें उन्होंने कहा था कि प्रतिवादी शबनम आरा द्वारा नाम निर्देशन में गलत साक्ष्य प्रस्तुत किए थे. उनके समर्थक अब्दुल रहीम पर आरोप लगाया गया कि उनके 15 जीविका संतान है जिसमें सुलमा खातून का जन्म 4 जुलाई 2008 एवं मो. सुफयान का जन्म 26 जुलाई 2009 को हुआ.
वहीं प्रतिवादी ने नाम निर्देशन पत्र के साथ संलग्न शपथ पत्र में अपनी जन्म तिथि 1 जनवरी 1961 अंकित किया है. जबकि इनका वास्तविक उम्र 15 जनवरी 1959 है. प्रतिवादी ने शैक्षणिक योग्यता के कॉलम में 9 वीं उत्तीर्ण 1974 ई एलआर गर्ल्स हाइस्कूल लहेरियासराय दरभंगा दर्शाया है. जबकि प्रतिवादी ने उक्त विद्यालय में 9 वीं कक्षा में अध्ययनरत नहीं रही है. जिसके लिए वादी ने कई साक्ष्य भी संलग्न किया था.
सुनवाई के बाद मामला निरस्त
वादी सईदा द्वारा लगाये गये आरोप को सुनवाई के बाद निरस्त कर दिया गया. प्रतिवादी ने दो सेट में नाम निर्देशन पत्र दाखिल किया गया था. नाम निर्देशन के प्रथम सेट क्रमांक 2 में प्रतिवादी की जन्म तिथि 15 जनवरी 1959 के स्थान पर 1 जनवरी 1961 भूलवश दर्ज होने के कारण स्क्रूटनी के समय की जन्म तिथि में संशोधन के लिए आवेदन दिया गया था. नाम निर्देशन पत्र के द्वितीय सेट क्रमांक में प्रतिवादी की वास्तविक जन्म तिथि 15 जनवरी 1959 दर्ज थी.
नाम निर्देशन पत्र के प्रथम सेट क्रमांक 02 में अब्दुल रहीम को तथा नाम निर्देशन के द्वितीय सेट में क्रमांक 3 में प्रतिवादी के समर्थक अब्दुल मन्नान को समर्थन बनाया गया था. नाम निर्देशन द्वितीय सेट में अब्दुल मन्नान के विरुद्ध कोई आरोप नहीं लगाया गया. वादी के ओर से अधिवक्ता रत्नाकर झा तथा प्रतिवादी के ओर से अजित कुमार सिन्हा ने अपना पक्ष रखा.
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