स्कूल में मोबाइल लेकर घूमना पड़ सकता है भारी, शिक्षकों के लिए बीईओ ने जारी किया सख्त आदेश
बीआरसी कार्यालय, उदाकिशुनगंज | Prabhat Khabar Network
मधेपुरा में उदाकिशुनगंज के प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी ने शिक्षकों के लिए विद्यालय संचालन अवधि में निजी मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर सख्ती से रोक लगा दी है. इस नियम का पालन न करने पर विभागीय कार्रवाई की चेतावनी दी गई है.
Madhepura News: मधेपुरा में स्कूल में बच्चे पढ़ रहे हों और शिक्षक मोबाइल पर निजी काम में व्यस्त रहें, तो इसका सीधा असर पढ़ाई पर पड़ सकता है. इसी समस्या को देखते हुए उदाकिशुनगंज के प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी सागर कुमार चौधरी ने विद्यालय संचालन अवधि में शिक्षकों के निजी मोबाइल इस्तेमाल पर सख्ती कर दी है.
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बीईओ ने सभी सरकारी विद्यालयों के प्रधानाध्यापक, प्रभारी प्रधानाध्यापक, प्रधान शिक्षक, सहायक शिक्षक और अन्य शिक्षकों को निर्देश दिया है कि स्कूल अवधि में निजी कार्य के लिए मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं करें. आदेश का उद्देश्य विद्यालय में शैक्षणिक माहौल बेहतर करना और शिक्षकों का पूरा ध्यान बच्चों की पढ़ाई पर केंद्रित रखना है.
स्कूल टाइम में निजी काम के लिए मोबाइल नहीं
प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि विद्यालय संचालन अवधि के दौरान विशेष परिस्थितियों को छोड़कर शिक्षक अपने निजी कार्यों के लिए मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं करेंगे.
इसका मतलब यह है कि स्कूल में शिक्षक के पास मोबाइल होना केवल तभी उचित होगा, जब उसकी जरूरत शैक्षणिक कार्य या किसी जरूरी परिस्थिति में हो. सामान्य स्थिति में निजी कॉल, मैसेज या दूसरे व्यक्तिगत काम के लिए मोबाइल इस्तेमाल करने पर रोक रहेगी.
मोबाइल जमा कराने का भी दिया निर्देश
निर्देश में मोबाइल इस्तेमाल को लेकर एक और अहम व्यवस्था की गयी है. यदि किसी शिक्षक को विद्यालय अवधि में शैक्षणिक कार्य के लिए मोबाइल की जरूरत नहीं है, तो वह अपना मोबाइल प्रधानाध्यापक या प्रधान शिक्षक के पास जमा करेंगे.
जरूरत पड़ने पर संबंधित शिक्षक को प्रधानाध्यापक या प्रधान शिक्षक मोबाइल उपलब्ध कराएंगे.
वहीं, अन्य शिक्षक प्रधानाध्यापक या प्रधान शिक्षक की अनुमति के बिना विद्यालय अवधि में अपना मोबाइल अपने पास नहीं रख सकेंगे.
निरीक्षण में सामने आई थीं मोबाइल इस्तेमाल की शिकायतें
बीईओ ने बताया कि यह निर्देश अचानक नहीं लिया गया है. उच्चाधिकारियों के निर्देश और विद्यालय निरीक्षण के दौरान मिली सूचनाओं के आधार पर आदेश जारी किया गया है.
निरीक्षण के दौरान कुछ विद्यालयों में शिक्षकों द्वारा विद्यालय संचालन अवधि में निजी कार्यों के लिए मोबाइल इस्तेमाल किए जाने की शिकायतें सामने आयी थीं. विभाग का मानना है कि यदि शिक्षक स्कूल के समय निजी मोबाइल गतिविधियों में व्यस्त रहते हैं, तो इसका असर बच्चों की पढ़ाई और विद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों पर पड़ सकता है.
इसी वजह से विद्यालय अवधि को पूरी तरह शैक्षणिक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल करने पर जोर दिया गया है.
बच्चों की पढ़ाई पर रहेगा पूरा फोकस
इस निर्देश का सबसे बड़ा उद्देश्य बच्चों की पढ़ाई को बताया गया है. विद्यालय में शिक्षक की मौजूदगी केवल उपस्थिति दर्ज कराने तक सीमित न रहे, बल्कि कक्षा में बच्चों को पर्याप्त समय और ध्यान मिले, यह सुनिश्चित करना विभाग की प्राथमिकता है.
मोबाइल फोन आज शिक्षण कार्य में भी उपयोगी साधन बन चुका है. कई बार डिजिटल सामग्री, शैक्षणिक जानकारी या विभागीय काम के लिए इसकी जरूरत पड़ सकती है. इसी वजह से आदेश में शैक्षणिक कार्य और विशेष परिस्थितियों के लिए अलग व्यवस्था रखी गयी है.
लेकिन निजी इस्तेमाल पर रोक लगाकर विभाग यह सुनिश्चित करना चाहता है कि स्कूल अवधि में शिक्षक का ध्यान मुख्य रूप से बच्चों और शिक्षण कार्य पर रहे.
आदेश नहीं माना तो होगी विभागीय कार्रवाई
बीईओ ने स्पष्ट किया है कि निर्देश का पालन नहीं करने वाले शिक्षकों के खिलाफ विभागीय और अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी.
सभी प्रधानाध्यापकों और शिक्षकों को आदेश का अक्षरशः पालन करने को कहा गया है. अब विद्यालय निरीक्षण के दौरान मोबाइल इस्तेमाल को लेकर भी निगरानी बढ़ने की संभावना है.
उदाकिशुनगंज के विद्यालयों में जारी यह निर्देश ऐसे समय में महत्वपूर्ण है, जब स्कूलों में शिक्षण व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए शिक्षकों की जवाबदेही और विद्यालय अवधि के प्रभावी इस्तेमाल पर लगातार जोर दिया जा रहा है.
Madhepura News: अब स्कूल में मोबाइल के इस्तेमाल पर रहेगी नजर
बीईओ के इस आदेश के बाद विद्यालयों में शिक्षकों के मोबाइल इस्तेमाल को लेकर स्पष्ट नियम सामने आ गया है. निजी काम के लिए मोबाइल का इस्तेमाल करने पर कार्रवाई की चेतावनी दी गयी है, जबकि शैक्षणिक जरूरत और विशेष परिस्थितियों में मोबाइल के इस्तेमाल की व्यवस्था प्रधानाध्यापक या प्रधान शिक्षक की अनुमति से की गयी है.
अब इस आदेश का वास्तविक असर विद्यालयों की रोजमर्रा की शैक्षणिक गतिविधियों में कितना दिखाई देता है, यह आगे होने वाले निरीक्षण में स्पष्ट होगा.
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