चीनी की मिठास हुई महंगी, मधेपुरा में 20 दिन में 20 रुपये बढ़ा भाव; एथनॉल को लेकर उठे सवाल

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चीनी | Prabhat Khabar Network

मधेपुरा में चाय की मिठास अब जेब पर भारी पड़ रही है. पिछले 20 दिनों में चीनी की कीमत 45 रुपये से बढ़कर 66 रुपये प्रति किलो हो गई है. इस अचानक वृद्धि ने घरेलू बजट को बिगाड़ दिया है और एथनॉल उत्पादन को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं.

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Sugar Price in Madhepura: मधेपुरा में चाय की मिठास अब जेब पर भारी पड़ने लगी है. मधेपुरा के बाजार में पिछले करीब 20 दिनों में चीनी की कीमत में अचानक 20 रुपये प्रति किलो तक का इजाफा हुआ है. कुछ दिन पहले तक खुदरा बाजार में 45 रुपये किलो बिक रही चीनी बुधवार को 66 रुपये किलो तक पहुंच गयी. अचानक हुई इस बढ़ोतरी ने घर का बजट बिगाड़ दिया है.

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चीनी के साथ चावल की कीमतों में भी बढ़ोतरी देखने को मिल रही है. ब्रांड के अनुसार चावल 5 से 10 रुपये प्रति किलो तक महंगा हुआ है. सरसों तेल की कीमत में भी करीब 5 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी बतायी जा रही है.

सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि चीनी और अनाज की कीमतों में इस तेजी के पीछे एथनॉल उत्पादन का कितना असर है. बाजार से जुड़े लोग और कुछ जागरूक ग्राहक इसे एथनॉल उत्पादन से जोड़कर देख रहे हैं. हालांकि, स्थानीय स्तर पर कीमतों में वृद्धि के पीछे वास्तविक कारणों की पूरी तस्वीर आपूर्ति, स्टॉक, उत्पादन और बाजार की स्थिति से जुड़ी होती है.

45 से सीधे 66 रुपये, इतनी तेजी से क्यों बढ़ी चीनी की कीमत?

मधेपुरा के खुदरा बाजार में करीब एक पखवाड़ा पहले चीनी की कीमत लगभग 45 रुपये प्रति किलो थी. बुधवार को यही चीनी 66 रुपये किलो तक पहुंच गयी.

करीब 20 दिनों में 20 रुपये की बढ़ोतरी ने उपभोक्ताओं को चौंका दिया है. रोजाना चाय, नाश्ता और खाना बनाने में चीनी का इस्तेमाल करने वाले परिवारों के लिए यह बढ़ोतरी सीधे घरेलू खर्च को प्रभावित करेगी.

मिठाई बनाने वाले दुकानदारों और खाद्य पदार्थों से जुड़े कारोबारियों के लिए भी लागत बढ़ने की आशंका है. चीनी की कीमत बढ़ने का असर केवल चाय या घर की रसोई तक सीमित नहीं रहेगा. मिठाई, चॉकलेट और चीनी का इस्तेमाल करने वाले दूसरे खाद्य उत्पादों की लागत भी बढ़ सकती है.

35 साल के कारोबारी अनुभव में ऐसी तेजी नहीं देखी

शहर के कई थोक और खुदरा कारोबारियों का कहना है कि उनके करीब 35 वर्षों के व्यापारिक अनुभव में चीनी की कीमत में इतनी तेज बढ़ोतरी देखने को नहीं मिली.

व्यापारियों के अनुसार अचानक कीमत बढ़ने से ग्राहक भी परेशान हैं और दुकानदारों के लिए भी कारोबार करना मुश्किल हो रहा है. कीमतों में लगातार बदलाव होने की स्थिति में पुराना स्टॉक और नयी खरीद के बीच कीमत का अंतर भी कारोबार को प्रभावित करता है.

व्यापारियों ने बताया कि इस दौरान सरसों तेल की कीमत भी करीब 5 रुपये प्रति लीटर बढ़ी है. यानी रसोई में इस्तेमाल होने वाली कई जरूरी वस्तुओं की कीमत बढ़ने से परिवारों के मासिक बजट पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है.

चावल भी हुआ महंगा, ब्रांड के हिसाब से 5 से 10 रुपये की बढ़ोतरी

चीनी के साथ चावल की कीमतों में भी तेजी बतायी जा रही है. अलग-अलग ब्रांड के चावल में करीब 5 से 10 रुपये प्रति किलो तक की बढ़ोतरी हुई है.

चावल बिहार के अधिकांश परिवारों की रोजमर्रा की खाद्य जरूरत का अहम हिस्सा है. ऐसे में इसकी कीमत में वृद्धि का असर सीधे घरेलू खर्च पर पड़ता है.

कम आय वाले परिवारों के लिए यह बढ़ोतरी और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि उनके बजट का बड़ा हिस्सा खाद्य सामग्री खरीदने में खर्च होता है. चीनी, चावल और तेल जैसे जरूरी सामान लगातार महंगे होने पर परिवारों को दूसरे खर्चों में कटौती करनी पड़ सकती है.

एथनॉल से चीनी की कीमत बढ़ने का क्या है कनेक्शन?

कुछ युवा और जागरूक ग्राहकों का कहना है कि चीनी की कीमत में बढ़ोतरी का संबंध एथनॉल उत्पादन से हो सकता है.

उनका तर्क है कि पेट्रोल में एथनॉल मिलाने की नीति के तहत चीनी मिलों द्वारा गन्ने के रस और शीरे का इस्तेमाल एथनॉल उत्पादन में किया जाता है. इससे उपलब्ध गन्ने या उससे बनने वाले उत्पादों का एक हिस्सा चीनी के बजाय एथनॉल उत्पादन की ओर जा सकता है.

इसी वजह से बाजार में यह चर्चा है कि चीनी की उपलब्धता और स्टॉक प्रभावित होने से कीमतों पर दबाव बढ़ा है.

हालांकि, केवल एथनॉल को स्थानीय बाजार में चीनी की कीमत बढ़ने का एकमात्र कारण मानना उचित नहीं होगा. चीनी के दाम पर उत्पादन, गन्ने की उपलब्धता, मिलों का स्टॉक, सरकारी नीतियां, थोक बाजार और मांग-आपूर्ति जैसे कई कारकों का असर पड़ता है.

चावल और एथनॉल को लेकर भी बाजार में चर्चा

एथनॉल को लेकर चर्चा सिर्फ चीनी तक सीमित नहीं है. खाद्य बाजार में इस बात की भी चर्चा है कि भारतीय खाद्य निगम के पास मौजूद अतिरिक्त और टूटे चावल को डिस्टिलरी को रियायती दरों पर उपलब्ध कराने से अनाज के बाजार पर असर पड़ सकता है.

एथनॉल ब्लेंडिंग बढ़ाने की नीति के तहत खाद्यान्न आधारित एथनॉल उत्पादन भी चर्चा का विषय रहा है. इसी वजह से बाजार में यह सवाल उठ रहा है कि खाद्यान्न का एक हिस्सा ऊर्जा उत्पादन में जाने से खुले बाजार में अनाज की उपलब्धता और कीमतों पर कितना असर पड़ रहा है.

लेकिन किसी खास अवधि में चावल की खुदरा कीमत बढ़ने के पीछे स्थानीय आपूर्ति, ब्रांड, गुणवत्ता, परिवहन लागत और थोक बाजार की स्थिति भी महत्वपूर्ण होती है.

मिठाई से लेकर रोजमर्रा की चीजों तक पड़ेगा असर

चीनी महंगी होने का असर सिर्फ घर में चाय बनाने तक सीमित नहीं रहेगा. मिठाई की दुकानों, बेकरी और चीनी का इस्तेमाल करने वाले खाद्य कारोबारों की लागत बढ़ सकती है.

व्यापारियों का कहना है कि चीनी की कीमत बढ़ने से मिठाई, चॉकलेट, हॉरलिक्स, प्रोटीन पाउडर सहित कई उत्पादों की लागत पर असर पड़ सकता है. हालांकि, हर उत्पाद की कीमत में वास्तविक बढ़ोतरी उसके उत्पादन खर्च और कंपनियों की मूल्य निर्धारण नीति पर निर्भर करेगी.

घरेलू उपभोक्ताओं के लिए फिलहाल सबसे बड़ी चिंता रोजमर्रा की रसोई का बढ़ता खर्च है. अगर चीनी, चावल और तेल जैसी आवश्यक वस्तुओं में एक साथ तेजी रहती है, तो इसका सीधा असर मासिक बजट पर पड़ सकता है.

Sugar Price in Madhepura: आगे कीमतों पर रहेगी बाजार की नजर

मधेपुरा के बाजार में अचानक आयी इस तेजी के बाद अब उपभोक्ताओं और कारोबारियों की नजर आने वाले दिनों की कीमतों पर है. यदि थोक बाजार में कीमतों में नरमी आती है तो खुदरा बाजार में भी राहत मिल सकती है. लेकिन आपूर्ति और स्टॉक पर दबाव बना रहा तो महंगाई का असर आगे भी दिखाई दे सकता है.

फिलहाल चीनी की कीमत में 20 दिनों के भीतर करीब 20 रुपये की बढ़ोतरी ने आम उपभोक्ता की चिंता बढ़ा दी है. चावल और सरसों तेल की कीमतों में भी वृद्धि की बात सामने आने के बाद रसोई का बजट एक बार फिर चर्चा में है.

एथनॉल उत्पादन और खाद्यान्न के इस्तेमाल को लेकर उठ रही चर्चाओं के बीच अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आने वाले दिनों में बाजार में चीनी और चावल की कीमत किस दिशा में जाती है.

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कुमार आशीष

लेखक के बारे में

By कुमार आशीष

कुमार आशीष 15 वर्षों से प्रभात खबर समूह के साथ पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं. दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक और भारतीय विद्या भवन, नई दिल्ली से जनसंचार में डिग्री प्राप्त करने के बाद इन्होंने राजनीति, अपराध और कोसी अंचल की रिपोर्टिंग में अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई है. डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पिछले पांच वर्षों से सक्रिय हैं. पत्रकारिता में उत्कृष्ट योगदान के लिए इन्हें नेपाल में 'अंतरराष्ट्रीय मैथिली युवा पत्रकारिता सम्मान' से नवाजा जा चुका है.

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