BNMU में शिक्षक और कर्मचारियों का आर-पार का ऐलान, नए विवि विधेयक के विरोध में 5 अगस्त से चरणबद्ध आंदोलन

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बीएनएमयू मधेपुरा | Prabhat Khabar Network

भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय, मधेपुरा के शिक्षक और कर्मचारी बिहार सरकार के नए विश्वविद्यालय विधेयक के विरोध में एक संयुक्त आंदोलन शुरू करने वाले हैं. यह आंदोलन 5 अगस्त से शुरू होगा और इसमें चरणबद्ध तरीके से विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे.

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भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय (BNMU), मधेपुरा के शिक्षक संघ एवं कर्मचारी संघ की एक महत्वपूर्ण संयुक्त बैठक पार्वती विज्ञान महाविद्यालय परिसर में संपन्न हुई. इसमें विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय शिक्षक व शिक्षकेतर कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा के आह्वान पर राज्यव्यापी चरणबद्ध आंदोलन को जिले में मजबूती से लागू करने का निर्णय लिया गया. आंदोलन के सफल संचालन के लिए एक विश्वविद्यालय स्तरीय संयुक्त संघर्ष समिति का गठन किया गया, जिसकी कमान प्रो. सुभाष प्रसाद सिंह एवं प्रमोद कुमार यादव को सौंपी गई है.

'उच्च शिक्षा की स्वायत्तता और गरिमा की रक्षा की लड़ाई'

बैठक की संयुक्त अध्यक्षता करते हुए संयोजक द्वय प्रो. सुभाष प्रसाद सिंह और प्रमोद कुमार यादव ने स्पष्ट किया कि बिहार सरकार द्वारा प्रस्तावित नया विश्वविद्यालय विधेयक उच्च शिक्षा के लोकतांत्रिक ढांचे पर आघात है. उन्होंने सभी शिक्षकों और कर्मचारियों से एकजुट होकर आंदोलन को सफल बनाने की अपील की.

आंदोलन की पूरी रूपरेखा और तिथियां

संयुक्त संघर्ष समिति ने चरणबद्ध आंदोलन का विस्तृत शेड्यूल जारी किया है:

  • 5 से 8 अगस्त: सभी शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मचारी काला बिल्ला लगाकर अपने-अपने कार्यस्थलों पर विरोध दर्ज कराएंगे और नियमित कार्य निपटाएंगे.
  • 10 अगस्त: शिक्षक और कर्मचारी सामूहिक अवकाश (Casual Leave) पर रहेंगे तथा विश्वविद्यालय मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन कर कुलपति को ज्ञापन सौंपेंगे.
  • 11 से 25 अगस्त: प्रतिदिन अपराह्न 01:30 बजे से 02:00 बजे तक विवि एवं कॉलेजों में प्रस्तावित विधेयक के विरोध में नारेबाजी, सभा और जनजागरण अभियान चलेगा.
  • 5 सितंबर (शिक्षक दिवस): छात्र-छात्राओं और अभिभावकों के साथ संवाद स्थापित कर विधेयक के दुष्प्रभावों की जानकारी दी जाएगी और जनसमर्थन जुटाया जाएगा.

'1976 अधिनियम की जगह नया विधेयक स्वायत्तता खत्म कर देगा'

बैठक का संचालन करते हुए शिक्षक संघ के महासचिव प्रो. अशोक कुमार ने कहा कि सरकार विश्वविद्यालय अधिनियम 1976 को बदलकर नया कानून लाना चाहती है:

प्रो. अशोक कुमार की चेतावनी: "प्रस्तावित व्यवस्था से विश्वविद्यालयों की अपने अंगीभूत कॉलेजों पर शैक्षणिक और प्रशासनिक पकड़ कमजोर होगी. शिक्षकों के तबादले, पदस्थापन और प्रशासनिक नियंत्रण का अधिकार विवि के वैधानिक निकायों से छीनकर सीधे कार्यपालिका (अफसरशाही) के हाथों में चला जाएगा. इससे विश्वविद्यालयों की शैक्षणिक स्वतंत्रता पूरी तरह खत्म हो जाएगी."

बैठक में प्रमुख रूप से रहे मौजूद

कार्यक्रम की शुरुआत में प्रधानाचार्य प्रो. पवन कुमार ने सभी प्रतिनिधियों का स्वागत किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन अर्थपाल डॉ. अशोक कुमार पोद्दार एवं परीक्षा नियंत्रक डॉ. ललन कुमार ललन ने किया.

बैठक में डॉ. संजीव कुमार झा, डॉ. सुधांशु शेखर, डॉ. प्रत्यक्षा राज, डॉ. दीपक कुमार राणा, डॉ. मिथिलेश कुमार, डॉ. अमरेन्द्र कुमार, डॉ. कुमारी सीमा, डॉ. कपिलदेव पासवान, डॉ. कुमारी अर्पणा, अखिलेश कुमार, मनीष कुमार सिंह, संजीव कुमार, शशांक कुमार, कुमारी अनामिका, अंकेश राणा, मो. तौसिफ आलम, सत्यम, ओम प्रकाश सिंह, दिलीप कुमार सहित कई शिक्षक व कर्मचारी प्रतिनिधि मौजूद थे.


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कुमार आशीष

लेखक के बारे में

By कुमार आशीष

कुमार आशीष 15 वर्षों से प्रभात खबर समूह के साथ पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं. दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक और भारतीय विद्या भवन, नई दिल्ली से जनसंचार में डिग्री प्राप्त करने के बाद इन्होंने राजनीति, अपराध और कोसी अंचल की रिपोर्टिंग में अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई है. डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पिछले पांच वर्षों से सक्रिय हैं. पत्रकारिता में उत्कृष्ट योगदान के लिए इन्हें नेपाल में 'अंतरराष्ट्रीय मैथिली युवा पत्रकारिता सम्मान' से नवाजा जा चुका है.

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