मधेपुरा में भीषण गर्मी में आंगनबाड़ी पहुंचने को मजबूर नौनिहाल, अभिभावकों की बढ़ी चिंता
Published by : Pratyush Prashant Updated At : 02 Jun 2026 1:26 PM
मधेपुरा में भीषण गर्मी में आंगनबाड़ी पहुंचने को मजबूर नौनिहाल
Heatwave In Madhepura: जब स्कूलों में गर्मी की छुट्टी है तो आंगनबाड़ी केंद्रों में छोटे बच्चों की मौजूदगी क्यों? मधेपुरा में भीषण गर्मी के बीच 3 से 6 साल के बच्चों को केंद्र पहुंचना पड़ रहा है, जिससे अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है.
शंकरपुर, मधेपुरा से निरंजन कुमार की रिपोर्ट
Heatwave In Madhepura: मधेपुरा जिले के शंकरपुर प्रखंड में लगातार बढ़ते तापमान और भीषण गर्मी के बीच आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन जारी है. इसके कारण 3 से 6 वर्ष आयु वर्ग के छोटे-छोटे बच्चों को रोजाना केंद्र तक पहुंचना पड़ रहा है. चिलचिलाती धूप और उमस भरे मौसम में बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को लेकर अभिभावकों की चिंता बढ़ने लगी है.
सुबह से ही सताने लगती है गर्मी
स्थानीय अभिभावकों का कहना है कि सुबह होते ही तेज धूप और उमस का असर महसूस होने लगता है. ऐसे में छोटे बच्चों को घर से बाहर निकालना जोखिम भरा साबित हो सकता है. कई बच्चे पैदल या अपने अभिभावकों के साथ आंगनबाड़ी केंद्र पहुंचते हैं, जिससे उन्हें लू और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याओं का खतरा बना रहता है.
कई केंद्रों में सुविधाओं का अभाव
स्थिति को और गंभीर बनाता है कि कई आंगनबाड़ी केंद्रों में पर्याप्त पंखे, स्वच्छ पेयजल और गर्मी से राहत देने वाली बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं. ऐसे में केंद्रों पर पहुंचने वाले बच्चों को असहज परिस्थितियों में समय बिताना पड़ता है.
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का भी मानना है कि कम उम्र के बच्चे गर्मी और लू से जल्दी प्रभावित होते हैं. इसलिए इस मौसम में उनकी विशेष देखभाल और सुरक्षा जरूरी है.
स्थानीय लोगों का कहना है कि जहां एक ओर अत्यधिक गर्मी को देखते हुए विद्यालयों में अवकाश घोषित किया गया है, वहीं दूसरी ओर आंगनबाड़ी केंद्रों को लेकर कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश सामने नहीं आया है. इससे अभिभावकों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है.
हालांकि आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों को पोषण, प्रारंभिक शिक्षा, टीकाकरण और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है तथा सेविकाएं और सहायिकाएं नियमित रूप से अपने दायित्व निभा रही हैं.
समय में बदलाव या अस्थायी रोक की मांग
अभिभावकों और स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्तमान मौसम को देखते हुए बच्चों की उपस्थिति को अस्थायी रूप से स्थगित करने या केंद्रों के संचालन समय में बदलाव पर विचार किया जाना चाहिए. उनका मानना है कि बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए.
लोगों ने प्रशासन और संबंधित विभाग से मांग की है कि मौसम की गंभीरता को देखते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएं ताकि भीषण गर्मी के दौरान नौनिहालों को किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य संबंधी परेशानी का सामना न करना पड़े.
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लेखक के बारे में
By Pratyush Prashant
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.
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