मधेपुरा के गम्हरिया में नियमों को ताक पर रख चल रहे निजी स्कूल? न खेल का मैदान, न अलग शौचालय

Gamhariya प्रखंड
Madhepura News: बिहार के ग्रामीण इलाकों में निजी स्कूल सरकारी नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं. बच्चों के लिए खेल का मैदान, शौचालय और चारदीवारी जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है. शिक्षा विभाग इस गंभीर मुद्दे पर बेखबर बना हुआ है.
Madhepura News: मधेपुरा के गम्हरिया प्रखंड में निजी स्कूलों की व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. आरोप है कि कई निजी विद्यालय बिना बुनियादी सुविधाओं और निर्धारित मानकों के संचालित हो रहे हैं. कहीं खेल का मैदान नहीं है, तो कहीं छात्र-छात्राओं के लिए अलग शौचालय तक उपलब्ध नहीं है. कई विद्यालय छोटे-छोटे भवनों में संचालित हो रहे हैं, जहां सुरक्षा व्यवस्था भी पर्याप्त नहीं बताई जा रही. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब शिक्षा विभाग ने निजी विद्यालयों के लिए स्पष्ट मानक तय कर रखे हैं, तो इनकी निगरानी कौन कर रहा है?
बुनियादी सुविधाओं के बिना संचालित हो रहे कई निजी विद्यालय
गम्हरिया प्रखंड और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में निजी विद्यालयों की संख्या लगातार बढ़ रही है. स्थानीय स्तर पर आरोप है कि इनमें से कई विद्यालय ऐसे हैं, जहां शिक्षा विभाग द्वारा निर्धारित न्यूनतम सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं.
बताया जाता है कि कई विद्यालय दो या तीन कमरों वाले छोटे भवनों में संचालित हो रहे हैं. बच्चों की संख्या के मुकाबले कक्षाएं छोटी हैं और परिसर भी पर्याप्त नहीं है.
खेल का मैदान नहीं, बच्चों के शारीरिक विकास पर असर की आशंका
शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं होती. बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए खेलकूद भी जरूरी माना जाता है.
लेकिन आरोप है कि कई निजी विद्यालयों के पास अपना खेल मैदान ही नहीं है. ऐसे में विद्यार्थियों को खेल गतिविधियों का पर्याप्त अवसर नहीं मिल पाता, जिससे उनके समग्र विकास पर असर पड़ सकता है.
शौचालय और सुरक्षा व्यवस्था पर भी उठ रहे सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि कई विद्यालयों में छात्र और छात्राओं के लिए अलग-अलग शौचालय की व्यवस्था नहीं है. कुछ जगहों पर पर्याप्त शौचालय भी उपलब्ध नहीं हैं.
इसके अलावा कई विद्यालयों में चारदीवारी नहीं होने की भी बात सामने आई है. इससे छोटे बच्चों के स्कूल परिसर से बाहर निकलने का जोखिम बना रहता है और सुरक्षा को लेकर अभिभावकों की चिंता बढ़ जाती है.
क्या कहते हैं शिक्षा विभाग के नियम?
शिक्षा विभाग के निर्धारित मानकों के अनुसार निजी विद्यालयों के संचालन के लिए पर्याप्त भूमि, खेल का मैदान, सुरक्षित भवन, पेयजल, अलग शौचालय, चारदीवारी और अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध होना आवश्यक है.
इन मानकों का उद्देश्य विद्यार्थियों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराना है.
Madhepura News: निगरानी व्यवस्था पर उठे सवाल
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई विद्यालय लंबे समय से इन कमियों के बावजूद संचालित हो रहे हैं, लेकिन जांच या कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई है.
इसी कारण शिक्षा विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं. लोगों का कहना है कि यदि समय-समय पर विद्यालयों का निरीक्षण हो और निर्धारित मानकों का सख्ती से पालन कराया जाए, तो बच्चों को बेहतर और सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण मिल सकता है.
अभिभावकों की बढ़ी चिंता, कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों और अभिभावकों का कहना है कि शिक्षा के नाम पर किसी भी तरह का समझौता बच्चों के भविष्य के साथ अन्याय होगा. उनका मानना है कि निजी विद्यालयों की नियमित जांच कराई जानी चाहिए और जिन संस्थानों में आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं, उन्हें निर्धारित मानकों का पालन करने के निर्देश दिए जाने चाहिए.
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लेखक के बारे में
By डिक्सन राज
डिक्सन राज प्रिंट माध्यम में 15 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले 3 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. गम्हरिया (मधेपुरा) क्षेत्र में काम कर रहे हैं. सामाजिक कार्यों, शिक्षा, राजनीति व खेल में रुचि रखते हैं.
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