मधेपुरा में किसानों को बताया गया मत्स्य पालन का आधुनिक तरीका, बायोफ्लॉक और आरएएस की दी जानकारी
निर्देशित करते डीएम | Prabhat Khabar Network
मधेपुरा में किसानों को मत्स्य पालन की आधुनिक और वैज्ञानिक तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया. जिलाधिकारी अभिषेक रंजन ने किसानों से स्वरोजगार के लिए इन तकनीकों को अपनाने की अपील की. इससे सीमित संसाधनों में भी उत्पादन बढ़ाकर आय बढ़ाने में मदद मिलेगी.
Madhepura Fish Farming Training: मधेपुरा में मत्स्य पालन को आधुनिक तकनीक से जोड़कर किसानों की आय बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है. इसी उद्देश्य से शुक्रवार को झल्लू बाबू सभागार में एक दिवसीय मत्स्य कृषक जागरूकता-सह-प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया. कार्यक्रम में किसानों को पारंपरिक मत्स्य पालन के साथ आधुनिक और वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाने की जानकारी दी गयी, ताकि कम संसाधनों में भी उत्पादन बढ़ाया जा सके.
डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग, बिहार के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम का उद्घाटन जिलाधिकारी अभिषेक रंजन ने दीप प्रज्वलित कर किया. कार्यक्रम का आयोजन राष्ट्रीय मात्स्यिकी विकास बोर्ड क्षेत्रीय कार्यालय पटना और मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय, भारत सरकार के सौजन्य से जिला मत्स्य कार्यालय द्वारा किया गया.
मत्स्य पालन को स्वरोजगार से जोड़ने पर जोर
उद्घाटन के दौरान जिलाधिकारी अभिषेक रंजन ने कहा कि मत्स्य पालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ किसानों की आय बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम है. उन्होंने किसानों से पारंपरिक तरीकों के साथ आधुनिक और वैज्ञानिक तकनीक अपनाने की अपील की.
डीएम ने कहा कि सरकारी योजनाओं और अनुदान का लाभ लेकर किसान मत्स्य पालन को स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता का माध्यम बना सकते हैं. इसके लिए किसानों को उपलब्ध योजनाओं की जानकारी लेने और पात्रता के अनुसार उनका लाभ उठाने की जरूरत है.
उन्होंने किसानों को तालाब निर्माण, बायोफ्लॉक, आरएएस तकनीक और मत्स्य बीज उत्पादन जैसी गतिविधियों की जानकारी लेने के लिए प्रेरित किया. उनके अनुसार आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से सीमित संसाधनों में भी मत्स्य उत्पादन बढ़ाया जा सकता है.
बायोफ्लॉक और आरएएस तकनीक की दी गयी जानकारी
प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने किसानों को उन्नत मत्स्य पालन की विभिन्न तकनीकों के बारे में विस्तार से जानकारी दी. इसमें तालाब प्रबंधन, मत्स्य बीज उत्पादन, बायोफ्लॉक और आरएएस तकनीक प्रमुख रूप से शामिल रही.
किसानों को इन तकनीकों के इस्तेमाल की प्रक्रिया के साथ उनके उपयोग से होने वाले संभावित लाभों की जानकारी दी गयी. प्रशिक्षण में सरकारी योजनाओं के तहत पात्रता, अनुदान प्राप्त करने की प्रक्रिया और उपलब्ध सुविधाओं के बारे में भी बताया गया.
कार्यक्रम के दौरान किसानों ने मत्स्य पालन से जुड़ी अपनी जिज्ञासाएं और समस्याएं विशेषज्ञों के सामने रखीं. विशेषज्ञों ने सवालों के जवाब देते हुए किसानों को तकनीकी जानकारी दी. इससे किसानों को मत्स्य पालन को अधिक व्यवस्थित और वैज्ञानिक तरीके से करने की जानकारी मिली.
Madhepura Fish Farming Training: बड़ी संख्या में मत्स्य किसान हुए शामिल
कार्यक्रम में उप मत्स्य निदेशक, कोसी प्रमंडल संजय कुमार किस्कु, मीठापुर मत्स्य प्रशिक्षण केंद्र के व्याख्याता मनीष कुमार श्रीवास्तव, राष्ट्रीय मात्स्यिकी विकास बोर्ड (NFDB) के सहायक कार्यपालक तकनीकी एल्बिन अल्बर्ट सी और आर्या प्रिया सहित जिला मत्स्य कार्यालय के अधिकारी एवं कर्मी मौजूद रहे.
प्रशिक्षण कार्यक्रम में मधेपुरा जिले के बड़ी संख्या में मत्स्य किसानों ने हिस्सा लिया. विभाग की ओर से किसानों को आधुनिक तकनीक और सरकारी योजनाओं से जोड़ने पर जोर दिया गया, ताकि मत्स्य पालन को केवल पारंपरिक गतिविधि के बजाय आय और रोजगार के स्थायी साधन के रूप में विकसित किया जा सके.
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