इप्टा की 21 दिवसीय सांस्कृतिक कार्यशाला का हुआ उद्घाटन
Published by : Kumar Ashish Updated At : 03 Jun 2026 6:16 PM
इप्टा की 21 दिवसीय सांस्कृतिक कार्यशाला का हुआ उद्घाटन
गर्मी की छुट्टियों में बच्चों को मोबाइल की दुनिया से निकालकर कला, संस्कृति और रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ने के उद्देश्य से भारतीय जन नाट्य संघ (इप्टा) मधेपुरा की ओर से 21 दिवसीय निशुल्क ग्रीष्मकालीन सांस्कृतिक कार्यशाला का शुभारंभ किया गया. उद्घाटन समारोह में वक्ताओं ने कला, मौलिकता और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया. मधेपुरा़ भारतीय जन नाट्य संघ (इप्टा) मधेपुरा की ओर से आयोजित 21 दिवसीय ग्रीष्मकालीन सांस्कृतिक कार्यशाला का उद्घाटन महिला कॉलेज सभागार में किया गया. कार्यक्रम का उद्घाटन श्री कृष्णा विश्वविद्यालय के कुलपति व मधेपुरा कॉलेज के संस्थापक डॉ अशोक कुमार ने किया. मौके पर इप्टा के संरक्षक डॉ अरुण कुमार और डॉ विनय कुमार चौधरी भी मौजूद थे. डॉ अशोक कुमार ने कहा कि भूमंडलीकरण के इस दौर में हर तरह की जानकारी लोगों की पहुंच में है, लेकिन यह तय करना जरूरी है कि क्या उपयोगी है और क्या नहीं. उन्होंने कहा कि मोबाइल फोन आज एक प्रकार के नशे का रूप लेता जा रहा है. इसमें जहां ज्ञान और बेहतर जानकारी उपलब्ध है, वहीं नई पीढ़ी को भटकाने की क्षमता भी है. ऐसे में अवकाश के दौरान बच्चों के लिए इस प्रकार की सांस्कृतिक कार्यशाला का आयोजन सराहनीय पहल है. संरक्षक डॉ अरुण कुमार ने कहा कि छुट्टियों के दौरान अधिकांश बच्चे मोबाइल में व्यस्त रहते हैं. ऐसे समय में बड़ी संख्या में बच्चों की उपस्थिति एक सकारात्मक संदेश देती है. उन्होंने कहा कि कला किसी भी कार्य को बेहतर और आकर्षक ढंग से करने की क्षमता का नाम है. व्यक्ति चाहे किसी भी क्षेत्र में कार्य करे, उसे उत्कृष्टता के साथ करना ही वास्तविक कला है. संरक्षक डॉ विनय कुमार चौधरी ने कहा कि वर्तमान समय में सांस्कृतिक प्रदूषण तेजी से बढ़ रहा है. ऐसे दौर में नाट्यशाला और सांस्कृतिक गतिविधियों में बच्चों की भागीदारी मन को सुकून देने वाली है. उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के बढ़ते प्रभाव के बीच मौलिकता को बचाए रखना बड़ी चुनौती बन गया है. जगजीवन आश्रम मध्य विद्यालय, मधेपुरा की प्राचार्य चंदा कुमारी ने इप्टा द्वारा आयोजित निशुल्क 21 दिवसीय सांस्कृतिक कार्यशाला के लिए संस्था का आभार व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि सरकारी विद्यालयों के बच्चों को सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़ने और अपनी प्रतिभा निखारने के लिए इससे बेहतर मंच मिल सकेगा.
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