बिहार : बेटे के इंतजार में पैदा की आठवीं बेटी, अब परवरिश से कर रहें इन्कार

Updated at : 31 Mar 2018 5:57 AM (IST)
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बिहार : बेटे के इंतजार में पैदा की आठवीं बेटी, अब परवरिश से कर रहें इन्कार

आर्थिक तंगी से मजबूर हो बच्ची को विशिष्ट दत्तक ग्रहण संस्थान को सौंपा सिंहेश्वर (मधेपुरा) : प्रखंड मुख्यालय अंतर्गत एक दंपत्ति ने आर्थिक परेशानी की वजह से अपने नवजात बच्ची को समाज कल्याण विभाग के अधीन विशिष्ट दत्तक ग्रहण संस्थान को सौंप दिया. जानकारी अनुसार सिंहेश्वर स्थित सीएचसी मे गुरूवार को जजहट सबैला वार्ड संख्या […]

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आर्थिक तंगी से मजबूर हो बच्ची को विशिष्ट दत्तक ग्रहण संस्थान को सौंपा
सिंहेश्वर (मधेपुरा) : प्रखंड मुख्यालय अंतर्गत एक दंपत्ति ने आर्थिक परेशानी की वजह से अपने नवजात बच्ची को समाज कल्याण विभाग के अधीन विशिष्ट दत्तक ग्रहण संस्थान को सौंप दिया. जानकारी अनुसार सिंहेश्वर स्थित सीएचसी मे गुरूवार को जजहट सबैला वार्ड संख्या दस की एक गर्भवती विभा देवी ने आठवीं बच्ची को जन्म दिया. जिसके बाद से ही पुरे अस्पताल में हाईवोल्टेज ड्रामा चलने लगा. जिसका अंत शुक्रवार की शाम को हुआ.
दंपति का कहना है कि उन्हें पूर्व से सात पूत्री है और यह आठवीं बेटी है. काफी उम्र हो जाने की वजह से बेटी का भार वहन नहीं कर पायेंगे. अभी तो तीन बेटी का विवाह भी करना शेष है. अब तक चार बेटी का जैसे तैसे विवाह कर चुके है. इस क्रम में दो पूत्री की शादी तो अन्य राज्य में किया है.
पचपन पार की मां व बाप कैसे करेंगी नवजात का पालन : बच्ची के पिता पेशे से रिक्शाचालक हरिलाल राम को जिला समन्वयक व अस्पताल प्रबंधक पियुष वर्धन ने काफी समझाया कि बच्ची को वह रख ले. लेकिन, उसने मना कर दिया. अंत में एनजीओ की समन्वयक ने कागजी प्रक्रिया पुरी करने के बाद बच्ची को अपने साथ ले गयी.
वहीं बच्ची के पिता ने जानकारी देते हुये बताया कि उसे पूर्व में सात बेटी है जिसमें चार का विवाह ( 2 का दुसरे राज्य जालंधर व दो का बिहार में) उसने जैसे- तैसे कर दिया. लेकिन अब भी उसके पास तीन बेटी, मां और पत्नी का पालन पोषण करना है. उसकी उम्र अब 55 के पार है और वह ज्यादा कमाई भी नही कर पाता है. घर में रहने वाले सभी के लिये खाना भी काफी मुश्किल से जुटा पाता है.
तीन बेटियों का विवाह भी करवाना अभी शेष है. ऐसे में यह चौथी बेटी को वह कैसे पालेगा. किसी ने उसे सलाह दी कि वह बच्ची को किसी जरूरत मंद को सौंप दें और वह तैयार भी हो गया. लेकिन जब तक बच्ची को वह उनलोगों को सौंपता तब तक कई लोगों ने उन्हें ऐसा करने से मना कर दिया. अंत में उसने फैसला लिया कि वह बच्ची को किसी अच्छे संस्था को सौंप देगा.
पहले स्थानीय को गोद देने का किया प्रयास
बच्ची के जन्म लेने के बाद महिला काफी रोने लगी कारण पुछने पर उसने अस्पताल कर्मी को बताया कि उसे पूर्व मे सात बेटी है. उनलोगों ने बेटा होने की आस लगा रखी थी. जिसके बाद वह बेटी को घर ले जाने से मना करने लगी. जिसके बाद कुछ स्थानीय लोगों ने उस बच्ची को गोद लेने में अपनी समर्थता जाहिर की और तब से ही ड्रामा शुरू हो गया.
शुक्रवार की दोपहर नवजात को स्थानीय के हवाले करने की बात होने लगी इसी बीच किसी ने एनजीओ सहित जिले के आलाअधिकारी को इस बात की सुचना दे दी. सुचना मिलने के तुरंत बाद जिले से एनजीओ कि जिला समन्वयक सुधा कुमारी व बाल कल्याण समिति के कर्मी भी अस्पताल पहुंच गये. तब तक बच्ची सहित उसके परिजन अस्पताल से बाहर पहुंच चुके थे. हालांकि सभी को दुबारा अस्पताल लाया गया.
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