डेढ़ साल पहले सड़क हादसे में हुई थी सुबोध की मौत
Updated at : 10 Dec 2017 6:10 AM (IST)
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अंचल कार्यालय से भेजी रिपोर्ट आपदा विभाग में धूल फांक रही प्राथमिकी में अन्य घायल का नाम नहीं होने के कारण मुआवजा के लिए अयोग्य करार दे रहे कर्मी मधेपुरा : परिवार के मुखिया के गुजरने के बाद परिवार वैसे ही अंदर ही अंदर टूट जाता है. ऊपर से गरीबी का कहर तेज हो जाये […]
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अंचल कार्यालय से भेजी रिपोर्ट आपदा विभाग में धूल फांक रही
प्राथमिकी में अन्य घायल का नाम नहीं होने के कारण मुआवजा के लिए अयोग्य करार दे रहे कर्मी
मधेपुरा : परिवार के मुखिया के गुजरने के बाद परिवार वैसे ही अंदर ही अंदर टूट जाता है. ऊपर से गरीबी का कहर तेज हो जाये तो पेट भात पर भी आफत आ जाती है. इन स्थितियों में सरकारी महकमे की असंवेदनशीलता के कारण शासन के प्रति लोगों की आस्था कमजोर होने लगती है. डेढ़ साल पहले गरीब सुबोध महतो की मौत ऑटो पलटने के कारण हो गयी. इस मामले में अंचल कार्यालय ने मामले की जांच कर अनुग्रह अनुदान के लिए रिपोर्ट भेज दी. सरकारी अस्पताल जहां सुबोध की चिकित्सा के दौरान मौत हो गयी
बच्चों ने छोड़ी…
ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी दुर्घटना में हुई मौत की बात की पुष्टि की. मधेपुरा थाने में प्राथमिकी भी दर्ज की गयी. सुबोध महतो की विधवा आशा देवी विगत एक साल से आपदा विभाग का चक्कर लगा कर थक चुकी है, लेकिन उन्हें बताया जा रहा है कि प्राथमिकी में इस हादसे में अन्य घायलों का जिक्र नहीं है इसलिये उन्हें मुआवजा नहीं मिल सकता है. अब वह बुरी तरह निराश हैं. उनके बच्चों ने पढ़ाई छोड़ कर मजदूरी करना शुरू कर दिया है.
दो घंंटे में ही हो गयी थी मौत
चार मई 2016 की शाम करीब आठ बजे मधेपुरा से अपने घर लौटने के दौरान मधेपुरा-पतरघट रोड स्थित बजरंगबली चौक सुखासन के पास ऑटो पलटने के कारण 55 वर्षीय सुबोध मेहता घायल हो गये थे. उनके साथ अन्य लोग भी घायल हुए. सुबोध को सदर अस्पताल ले जाया गया, लेकिन सिर व अन्य जगहों पर गहन चोट के कारण दो घंटे बाद ही उनकी मौत हो गयी. सुबोध के बड़े बेटे लालू महतो के फर्द बयान के आधार पर सदर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गयी. सदर अस्पताल के पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी सुबोध महतो के सिर व शरीर में गहरी चोट होने के कारण मौत होने की पुष्टि की गयी. मुआवजे की प्रक्रिया के लिये अंचल कार्यालय ने जांच करायी. पांच जुलाई 2016 को अंचल कर्मचारी ने जांच रिपोर्ट सीओ को सौंप दी. इस रिपोर्ट में सुबोध महतो व सहरसा जिला के सौरबाजार थाना के तहत खाड़ा गांव निवासी बलबीर कुमार झा के भी घायल होने का उल्लेख किया गया.
बेअसर रहा तात्कालीन आपदा मंत्री का पत्र
इतने पर भी जब आपदा विभाग में सुबोध मेहता के मुआवजे की फाइल धूल फांकती रही, तो आशा ने तत्कालीन आपदा प्रबंधन मंत्री के पास 14 अक्तूबर 2016 को गुहार लगायी. मंत्री के आप्त सचिव ने इस दुर्घटना को सामूहिक दुर्घटना मानते हुए आवेदन को वरीय अधिकारी के पास कार्यवाही के लिए भेज दिया, लेकिन मामला जस का तस रहा. इस पत्र को भी सवा साल बीत गये. आशा देवी ने बताया कि आपदा प्रबंधन विभाग में उन्हें बताया जा रहा है कि चूंकि एफआइआर में किसी अन्य के घायल होने की बात नहीं है इसलिए वह मुआवजे की हकदार नहीं हैं. ऐसा नहीं है कि इस दुर्घटना में कोई अन्य घायल नहीं हुआ था. उसी ऑटो पर सवार बलवीर झा जख्मी हो गये थे. उनका इलाज पटना तक हुआ. इस बात का जिक्र सीआइ की रिपोर्ट में भी है, लेकिन एफआइआर में इसका जिक्र न होने का खामियाजा एक गरीब परिवार भुगत रहा है.
सामूहिक दुर्घटना की श्रेणी के लिए एक से अधिक लोगों का जिक्र एफआइआर में जरूरी है. इस मामले में एफआइआर में किसी अन्य का नाम नहीं है केवल मृतक का नाम है. अंचल की रिपोर्ट का अध्ययन किया जा रहा है. न्याय संगत कार्रवाई की जायेगी.
मुकेश कुमार, प्रभारी पदाधिकारी, आपदा प्रबंधन, मधेपुरा
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