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सुहागिन महिलाओं ने की आंवला वृक्ष की पूजा, सुख समृद्धि की कामना की

Updated at : 10 Nov 2024 8:57 PM (IST)
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सुहागिन महिलाओं ने की आंवला वृक्ष की पूजा, सुख समृद्धि की कामना की

रविवार को सूर्यगढ़ा नगर सहित क्षेत्र के ग्रामीण अंचलों में आंवला नवमी का पर्व पूर्ण विधि विधान के साथ मनाया गया.

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सूर्यगढ़ा. रविवार को सूर्यगढ़ा नगर सहित क्षेत्र के ग्रामीण अंचलों में आंवला नवमी का पर्व पूर्ण विधि विधान के साथ मनाया गया. महिलाओं ने परिवार की सुख, समृद्धि एवं स्वस्थ जीवन की कामनाओं के साथ आंवला वृक्ष की पूजा की. सूर्यगढ़ा थाना परिसर स्थित साकेत धाम ठाकुरबाड़ी सहित सहित अन्य स्थानों पर बड़ी संख्या में महिलाएं पूजा-अर्चना करती नजर आयी. आंवला वृक्ष के नीचे महिलाओं ने विधि विधान से पूजा कर आंवला नवमी पर्व मनाया. इस मौके पर महिलाएं आंवला वृक्ष के नीचे परिवार के साथ भोजन किया. वहीं कई महिलाओं ने सामूहिक तौर पर पूजा अर्चना कर महा आरती सहित अन्य अनुष्ठान किये. महिलाओं ने बताया कि कार्तिक शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाये जाने वाले इस आंवला नवमी पर्व पर रविवार को स्नान कर सौभाग्यवती महिलाओं ने आंवले के पेड़ की जड़ में दूध, रोली, अक्षत, फूल, गंध चढ़ाया गया. फिर आंवले के पेड़ की सात बार और अधिक से अधिक 108 बार परिक्रमा कर दीये जलायें. महिलाओं ने आंवला वृक्ष के नीचे कथा का वाचन कर आंवले के पेड़ का पूजन किया. वहीं आंवला वृक्ष को सोलह सिंगार की सामग्री अर्पित कर विभिन्न प्रकार के पकवानों का भोग लगाकर मां गौरी की आरती की. उसी वृक्ष के नीचे बैठकर सह परिवार भोजन ग्रहण किया. इस दौरान कई महिलाएं अपने पति और पुत्र की दीर्घायु सहित परिवार के लिए आरोग्यता और सुख सौभाग्य की मंगल कामना करती हुई नजर आयी.

धार्मिक मान्यता है कि आंवले के पेड़ में देवताओं का वास होता है. भगवान विष्णु और शिव आंवले के वृक्ष में वास करते हैं. इसी कारण आंवला नवमीं पर आंवले के वृक्ष की पूजा की जाती है. यह प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने का पर्व है. मान्यता के अनुसार इस दिन किया गया तप, जप, दान आदि व्यक्ति को सभी प्रकार के कष्टों से मुक्त करता है. आंवले के पेड़ की पूजा करने के एक कारण यह भी है कि आंवला स्वास्थ्य के लिए बहुत गुणकारी होता है. विभिन्न रूपों में इसका सेवन बीमारियों को दूर करता है. पुरोहित विनय पांडेय ने बताया कि इस दिन आंवला वृक्ष के पूजन का विशेष महत्व है. कार्तिक शुक्ल पक्ष नवमी से लेकर पूर्णिमा तक भगवान विष्णु आंवला के वृक्ष पर निवास करते हैं.आंवला नवमी पर आंवला वृक्ष के पूजन और दान पुण्य करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है.

बड़हिया प्रतिनिधि के अनुसार,

कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि के पावन अवसर पर परिवार की सुख समृद्धि के लिए अक्षय नवमी के रूप में बड़हिया नगर एवं प्रखंड क्षेत्र की महिलाओं ने आंवला वृक्ष की परिक्रमा एवं पूजा-अर्चना की. आंवला वृक्ष के नीचे पकवानों का भोग लगाया और उन्हीं पकवानों से अपना व्रत खोला. अक्षय नवमी के अवसर पर रविवार को महिलाओं द्वारा सुख-समृद्धि के लिए आंवले की वृक्ष की परिक्रमा लगायी. कार्तिक माह में पड़ने वाली नवमी को अक्षय नवमी कहते हैं. इस दिन दान-पुण्य व पूजा-अर्चना करने का काफी महत्व बताया जाता है. महिलाओं द्वारा परिवार में सुख-समृद्धि के लिए आंवले के वृक्षा की पूजा-अर्चना करने के साथ परिक्रमा लगायी जाती है. बुधवार को नगर व प्रखंड महिलाओं ने आंवले के वृक्ष की पूजा-अर्चना की और उसके बाद परिक्रमा लगायी. सुबह से ही महिलाओं का आवाल व्रक्ष के समीप पहुंचने लगे जैसे-जैसे दिन चढ़ता गया, वैसे-वैसे आंवला वृक्ष के नीचे भीड़ बढ़ती गयी. अक्षय नवमी के दिन आंवला की परिक्रमा लगाने का काफी महत्व बताया गया. इस दिन परिक्रमा लगाने से काफी पुण्य प्राप्त होता है. माना जाता है कि अक्षय नवमी पर मां लक्ष्मी ने पृथ्वी लोक में भगवान विष्णु एवं शिव जी की पूजा आंवले के रूप में की थी और इसी पेड़ के नीचे बैठकर भोजन ग्रहण किया था. यह भी कहा जाता है कि आंवले के पेड़ के नीचे श्री हरि विष्णु के दामोदर स्वरूप की पूजा की जाती है. यह भी मान्यता है कि इसी दिन भगवान कृष्ण ने कंस वध से पहले तीन वनों की परिक्रमा की थी.

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