जनसंवाद की 77 योजनाएं अब भी फाइलों में कैद, फिर लगा सहयोग सह जनकल्याण शिविर

Edited by Shruti Kumari
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सांकेतिक तस्वीर

Jansamvad Sehyog Shivir: एक साल पहले लोगों की मांग पर 25 करोड़ रुपये की 77 विकास योजनाएं बनाई गईं, लेकिन आज तक एक भी धरातल पर नहीं उतरी. अब फिर नए शिविरों के आयोजन ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं.

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सूर्यगढ़ा (लखीसराय) से राजेश कुमार गुप्ता की रिपोर्ट:


Jansamvad Sehyog Shivir: नवगठित नगर परिषद सूर्यगढ़ा में जनसंवाद कार्यक्रम के तहत तैयार की गई 77 विकास योजनाएं अब तक स्वीकृति और क्रियान्वयन का इंतजार कर रही हैं. इसी बीच सरकार के निर्देश पर एक बार फिर सहयोग सह जनकल्याण शिविर आयोजित किए जा रहे हैं, जिससे लोगों के बीच पुरानी योजनाओं को लेकर चर्चा तेज हो गई है.

लोगों की समस्याओं और सुझावों के आधार पर विकास की नई इबारत लिखने के उद्देश्य से आयोजित जनसंवाद कार्यक्रम की योजनाएं आज भी सरकारी फाइलों में कैद हैं. ऐसे में एक बार फिर शुरू हुए सहयोग सह जनकल्याण शिविरों को लेकर लोगों के मन में कई सवाल उठने लगे हैं.

25 करोड़ की 77 योजनाएं अब तक लंबित

नगर परिषद सूर्यगढ़ा की मुख्य पार्षद रूपम देवी ने बताया कि अप्रैल 2025 में राज्य सरकार के निर्देश पर पहली बार जनसंवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया था. नगर परिषद के सभी 26 वार्डों में शिविर लगाकर लोगों की समस्याएं, शिकायतें और सुझाव लिए गए थे.

इन सुझावों के आधार पर लगभग 25 करोड़ रुपये की 77 विकास योजनाओं का प्रस्ताव तैयार कर सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करते हुए विभाग को भेजा गया था. लेकिन एक वर्ष बीत जाने के बाद भी एक भी योजना पर कार्य शुरू नहीं हो सका है.

लोगों को थी विकास कार्यों की उम्मीद

विधानसभा चुनाव से पहले आयोजित इस जनसंवाद कार्यक्रम को लेकर लोगों में काफी उम्मीदें जगी थीं. स्थानीय लोगों को उम्मीद थी कि उनकी समस्याओं का समाधान होगा और विकास योजनाओं पर तेजी से काम शुरू होगा. लेकिन योजनाओं को स्वीकृति नहीं मिलने के कारण अपेक्षित विकास कार्य शुरू नहीं हो सके.

फिर शुरू हुए जनकल्याण शिविर

इधर, राज्य सरकार के निर्देश पर नगर परिषद और ग्रामीण क्षेत्रों में सहयोग सह जनकल्याण शिविरों का आयोजन शुरू किया गया है. इन शिविरों में लोगों से समस्याओं, शिकायतों और सुझावों से संबंधित आवेदन लिए जा रहे हैं.

सरकार का दावा है कि शिविरों में प्राप्त आवेदनों का निष्पादन 30 दिनों के भीतर सुनिश्चित किया जाएगा. हालांकि पिछली योजनाओं की स्थिति को देखते हुए लोगों में संशय भी बना हुआ है.

लोगों के बीच उठ रहे सवाल

स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे शिविरों के आयोजन पर हर बार लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं. यदि लोगों की शिकायतें और विकास योजनाएं फाइलों में ही दबकर रह जाएं तो इन कार्यक्रमों की उपयोगिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है.

लोगों का मानना है कि सरकार की मंशा अच्छी हो सकती है, लेकिन योजनाओं और शिकायतों का समयबद्ध निष्पादन नहीं होने से आम जनता का भरोसा कमजोर पड़ता है.

सबसे बड़ा सवाल

अब लोगों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस बार सहयोग सह जनकल्याण शिविरों से आम जनता को वास्तविक लाभ मिलेगा, या फिर पिछले जनसंवाद कार्यक्रम की तरह आवेदन और योजनाएं भी फाइलों में सिमट कर रह जाएंगी. फिलहाल यह एक बड़ा यक्ष प्रश्न बना हुआ है.

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