लखीसराय में ड्रोन से फसल छिड़काव शुरू: 5 मिनट में एक एकड़ का काम, किसानों को 50% अनुदान पर मिल रही सुविधा
ड्रोन से दवा का छिड़काव करते | Prabhat Khabar Network
लखीसराय में आधुनिक ड्रोन तकनीक पारंपरिक खेती की चुनौतियों का समाधान कर रही है. धान की फसलों पर कीटनाशक और नैनो उर्वरकों का छिड़काव 50% अनुदान पर किया जा रहा है, जिससे किसानों की लागत घट रही है. जानिए इस क्रांतिकारी पहल का लाभ कैसे उठाएं.
पारंपरिक खेती की चुनौतियों से जूझ रहे किसानों के लिए लखीसराय में आधुनिक तकनीक वरदान साबित हो रही है. फसलों को कीट, विभिन्न रोगों और खरपतवार के प्रकोप से सुरक्षित रखने के लिए बिहार सरकार के पौधा संरक्षण विभाग ने जिले में ड्रोन आधारित फसल छिड़काव अभियान को बड़े पैमाने पर शुरू कर दिया है.
इस आधुनिक पहल के तहत धान की लहलहाती फसलों पर कीटनाशक, फफूंदनाशी और तरल नैनो उर्वरकों का छिड़काव अत्याधुनिक कृषि ड्रोन के जरिए किया जा रहा है.
3,675 एकड़ का लक्ष्य, 1500 एकड़ के लिए पहुंचे आवेदन
कृषि विभाग ने चालू खरीफ मौसम के दौरान लखीसराय जिले के लिए कुल 3,675 एकड़ रकबे में ड्रोन से छिड़काव का लक्ष्य निर्धारित किया है.
इस योजना को लेकर जिले के किसानों में भारी उत्साह देखा जा रहा है और अब तक 1,500 एकड़ खेत में छिड़काव के लिए ऑनलाइन आवेदन दर्ज किए जा चुके हैं.
वर्तमान में हलसी, रामगढ़ चौक तथा लखीसराय प्रखंड के सघन धान उत्पादक क्षेत्रों में चरणबद्ध तरीके से ड्रोन छिड़काव का काम जोर-शोर से चल रहा है. योजना का लाभ लेने वाले स्थानीय किसान मनीष कुमार, प्रदीप कुमार, राजादेव कुमार, सावित्री देवी, अशोक कुमार और शिवबालक पासवान ने इस तकनीक को खेती की लागत घटाने वाला क्रांतिकारी कदम बताया है.
लागत पर 50 प्रतिशत का सीधा अनुदान
ड्रोन छिड़काव सेवा की कुल वास्तविक लागत 419 रुपये प्रति एकड़ निर्धारित है.
किसानों की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए और उन्हें आधुनिक तकनीक से जोड़ने के उद्देश्य से सरकार इस लागत पर 50 प्रतिशत का सीधा अनुदान प्रदान कर रही है.
अनुदान के बाद किसान को प्रति एकड़ मात्र 210 रुपये (या विभागीय संशोधित दर) का भुगतान करना होगा, जबकि शेष आधी राशि का भुगतान सरकार द्वारा सीधे वहन किया जाएगा.
मात्र 5 से 6 मिनट और 10 लीटर पानी में एक एकड़ का काम
सहायक निदेशक (पौधा संरक्षण, लखीसराय) अंकित आनंद ने इस तकनीक के फायदों की जानकारी देते हुए बताया कि हाथ वाले या बैटरी स्प्रेयर से एक एकड़ खेत में छिड़काव करने में घंटों का समय, भारी मजदूरी और 150 से 200 लीटर तक पानी की खपत होती थी.
इसके विपरीत ड्रोन तकनीक से मात्र 5 से 6 मिनट में केवल 10 लीटर पानी का उपयोग कर पूरे एक एकड़ में सूक्ष्म बूंदों के रूप में समान छिड़काव हो जाता है.
इससे फसल पर दवा का प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है और किसानों को विषैले रसायनों के सीधे संपर्क में आने या खेत में पैदल चलने की मशक्कत से पूरी तरह मुक्ति मिल जाती है.
डीबीटी पोर्टल पर स्व-घोषणा पत्र भरकर करें आवेदन
योजना का लाभ लेने की प्रक्रिया को विभाग ने पूरी तरह पारदर्शी और सुगम बनाया है.
जिले के रैयत (भूस्वामी) अथवा गैर-रैयत (बटाईदार) दोनों ही श्रेणी के किसान कृषि विभाग के आधिकारिक डीबीटी (DBT) पोर्टल पर जाकर स्व-घोषणा पत्र के माध्यम से आसानी से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं.
पौधा संरक्षण विभाग ने जिले के तमाम किसानों से आह्वान किया है कि वे पारंपरिक तरीकों के स्थान पर समेकित कीट प्रबंधन और आधुनिक ड्रोन तकनीक का अधिक से अधिक लाभ उठाएं ताकि लागत घटे और फसलों की पैदावार में उल्लेखनीय वृद्धि हो सके.
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