मां की मजदूरी और संघर्ष ने बदली बेटे की तकदीर, बीपीएससी पास कर बने जूनियर इंजीनियर

Author Pintu Pranav|Edited by System
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फोटो – बीपीएससी की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद पहली बार लखीसराय पहुंचने पर हिमांशु का स्वागत करते लोग

BPSC Success Story: आंगनवाड़ी में खाना बनाया, सिलाई-कढ़ाई कर बेटे को पढ़ाया. मां की वर्षों की मेहनत रंग लाई और बेटे ने बीपीएससी परीक्षा पास कर नगर परिषद में जूनियर इंजीनियर की नौकरी हासिल की.

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लखीसराय से अजीत सिंह की रिपोर्ट

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BPSC Success Story: लखीसराय जिले के सदर प्रखंड अंतर्गत खगौर गांव की एक मां के संघर्ष ने यह साबित कर दिया कि मजबूत इरादों के सामने आर्थिक अभाव भी हार मान लेते हैं. मजदूरी, आंगनवाड़ी में खाना बनाने और सिलाई-कढ़ाई कर बेटे को पढ़ाने वाली सीमा देवी की मेहनत उस समय सफल हुई, जब उनके पुत्र हिमांशु कुमार ने बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) की परीक्षा उत्तीर्ण कर नगर परिषद में जूनियर इंजीनियर के पद पर नियुक्ति हासिल की. उनकी सफलता पूरे क्षेत्र के युवाओं और अभिभावकों के लिए प्रेरणा बन गई है.

मां के संघर्ष ने बेटे को दिलाई मंजिल

खगौर गांव निवासी योगेंद्र पासवान और सीमा देवी के पुत्र हिमांशु कुमार ने कठिन परिश्रम और लगन के बल पर बीपीएससी की परीक्षा पास की. सीमा देवी ने आर्थिक तंगी के बावजूद कभी बेटे की पढ़ाई नहीं रुकने दी. वह स्कूल और आंगनवाड़ी केंद्रों में बच्चों के लिए भोजन बनाती थीं. इसके साथ ही सिलाई-कढ़ाई कर अतिरिक्त आय जुटाती रहीं और उसी कमाई से बेटे की पढ़ाई का खर्च उठाया.

बीएससी के बाद की बीपीएससी की तैयारी

BPSC Success Story: हिमांशु कुमार ने पहले बीएससी की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद उन्होंने बीपीएससी की तैयारी शुरू की. परिवार की सीमित आय के बावजूद उन्होंने पढ़ाई जारी रखी और आखिरकार अपनी मेहनत के दम पर जूनियर इंजीनियर के पद पर चयनित होकर परिवार का सपना पूरा कर दिया.

गांव लौटने पर हुआ भव्य स्वागत

बीपीएससी परीक्षा में सफलता के बाद पहली बार अपने पैतृक गांव पहुंचने पर हिमांशु कुमार का किऊल रेलवे स्टेशन पर जोरदार स्वागत किया गया. समाजसेवी नवल कुमार, रविकांत कुमार यादव, अरुण कुमार, सुरेश सिंह, सुभाष कुमार यादव और भूषण यादव सहित कई लोगों ने उन्हें फूल-माला पहनाकर सम्मानित किया और उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं.

‘मेरी सफलता का श्रेय मां को’

हिमांशु कुमार ने अपनी सफलता का पूरा श्रेय अपनी मां सीमा देवी को दिया. उन्होंने कहा कि मां ने कठिन परिस्थितियों में भी कभी हिम्मत नहीं हारी. मेहनत-मजदूरी कर उन्हें पढ़ाया-लिखाया और हमेशा आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया. उन्होंने कहा कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और परिवार का सहयोग मिले तो किसी भी कठिनाई को पार किया जा सकता है.

युवाओं के लिए बनी प्रेरणा

हिमांशु कुमार की सफलता यह संदेश देती है कि सीमित संसाधनों के बावजूद मेहनत, अनुशासन और दृढ़ संकल्प से बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं. क्षेत्र के लोगों ने इसे संघर्ष, शिक्षा और आत्मविश्वास की प्रेरक मिसाल बताया है.

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