लखीसराय में गंगा तट पर बसे मां बाला त्रिपुर सुंदरी मंदिर में उमड़ती है आस्था, मंगलवार और शनिवार को लगती है भक्तों की भीड़
Published by : Pratyush Prashant Updated At : 23 May 2026 7:56 AM
मां बाला त्रिपुर सुंदरी जगदंबा मंदिर
Aaj Ka Darshan: बड़हिया के इस शक्तिपीठ में मां के दर्शन से पूरी होती हैं मनोकामनाएं, चांदी का सिंहासन बना आकर्षण का केंद्र
Aaj Ka Darshan: बड़हिया (लखीसराय) से शशिकांत मिश्रा की रिपोर्ट. लखीसराय जिले के बड़हिया में गंगा तट पर स्थित मां बाला त्रिपुर सुंदरी जगदंबा मंदिर श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का बड़ा केंद्र बना हुआ है. यह प्रसिद्ध शक्तिपीठ न सिर्फ धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि अपनी भव्यता और चमत्कारी मान्यताओं के कारण भी दूर-दूर तक चर्चित है. मंगलवार और शनिवार को यहां भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है, जबकि नवरात्र के दौरान लाखों श्रद्धालु मां के दर्शन के लिए पहुंचते हैं.
मां वैष्णो देवी के भक्त ने रखी थी मंदिर की नींव
बड़हिया का यह प्रसिद्ध शक्तिपीठ जनकल्याण की भावना से स्थापित किया गया था. मान्यता है कि इसकी स्थापना मां वैष्णो देवी के संस्थापक भक्त शिरोमणि श्रीधर ओझा ने करायी थी. तभी से यह मंदिर श्रद्धा और विश्वास का प्रमुख केंद्र बना हुआ है.
भक्तों का विश्वास है कि यहां सच्चे मन से मां के दरबार में माथा टेकने से हर मनोकामना पूरी होती है. यही वजह है कि हर दिन हजारों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं और मां का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं.
संगमरमर की भव्यता और चांदी का सिंहासन बना आकर्षण
कई सौ वर्ष पुराने इस मंदिर का पुनर्निर्माण वर्ष 1992 में सफेद संगमरमर से कराया गया था. करीब 151 फीट ऊंचे मंदिर के शिखर पर लगा स्वर्ण कलश और मां का ध्वज इसकी भव्यता को और बढ़ाता है.
हाल ही में मंदिर के गर्भगृह में 50 किलो चांदी से बना 30 फीट लंबा और 10 फीट चौड़ा घुमावदार सिंहासन स्थापित किया गया है. बनारस के कारीगरों द्वारा तैयार किया गया यह सिंहासन श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बन चुका है.
नवरात्र में लगता है आस्था का महासंगम
शारदीय और वासंतिक नवरात्र के दौरान यहां भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है. दूर-दूर से श्रद्धालु मां के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं. मंदिर परिसर पूरी तरह भक्तिमय माहौल में डूब जाता है.
मंदिर में मां बाला त्रिपुर सुंदरी सहित कुल पांच पिंडों की पूजा होती है. यहां यह भी मान्यता है कि मंदिर का अभिमंत्रित जल सर्पदंश पीड़ितों के लिए लाभकारी होता है.
मंदिर के मुख्य पुजारी राहुल झा हैं, जबकि ललित झा और अजय झा सहयोगी के रूप में सेवा दे रहे हैं. मंदिर का पट सुबह 5 बजे खुलता है और रात 9 बजे बंद होता है.
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लेखक के बारे में
By Pratyush Prashant
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.
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