लखीसराय में मनोकामनाएं पूरी करने वाला आस्था का केंद्र, चैत्र नवरात्र में उमड़ता है श्रद्धालुओं का सैलाब

Published by : Pratyush Prashant Updated At : 01 Jun 2026 8:18 AM

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मां बासंती दुर्गा

Aaj ka Darshan : लखीसराय में जहां मां बासंती दुर्गा के दरबार में हर साल जुटते हैं हजारों श्रद्धालु, जानिए मंदिर का इतिहास और मान्यता

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पीरी बाजार (लखीसराय) से रविराज आनंद की रिपोर्ट

Aaj ka Darshan : बिहार के लखीसराय जिले में स्थित मणियारचक गांव का बासंती दुर्गा मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि श्रद्धा, आस्था और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत केंद्र है. अभयपुर रेलवे स्टेशन के समीप स्थित यह प्राचीन मंदिर वर्षों से भक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है. खासकर चैत्र नवरात्र के दौरान यहां हजारों श्रद्धालु मां बासंती दुर्गा के दर्शन के लिए पहुंचते हैं और अपनी मनोकामनाएं लेकर माता के दरबार में हाजिरी लगाते हैं.

चैत्र नवरात्र में बदल जाता है पूरा माहौल

चैत्र मास की शुरुआत के साथ ही मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण में डूब जाता है. बासंती पूजा के अवसर पर यहां दूर-दराज के जिलों से श्रद्धालु पहुंचते हैं. मंदिर परिसर में शंख, घंटियों और भक्ति गीतों की गूंज पूरे क्षेत्र को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देती है. सुबह से देर रात तक दर्शन और पूजा-अर्चना का सिलसिला चलता रहता है.

मां बासंती दुर्गा की अनोखी मान्यता

स्थानीय लोगों के अनुसार इस मंदिर का इतिहास काफी पुराना और गौरवशाली रहा है. वर्षों से यह मान्यता प्रचलित है कि जो भी भक्त सच्चे मन और श्रद्धा के साथ मां बासंती दुर्गा के चरणों में प्रार्थना करता है, उसकी मनोकामना अवश्य पूर्ण होती है. यही कारण है कि यहां चैत्र नवरात्र का महत्व विशेष रूप से अधिक माना जाता है.

वैदिक परंपरा के साथ होता है नौ दिनों का अनुष्ठान

मंदिर में चैत्र नवरात्र के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक विधानों के साथ मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की जाती है. नौ दिनों तक चलने वाले इस धार्मिक अनुष्ठान में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं. पूजा समिति के सदस्य बताते हैं कि यह परंपरा पीढ़ियों से लगातार चली आ रही है और हर वर्ष श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती जा रही है.

आस्था के साथ सामाजिक एकता का भी संदेश

बासंती दुर्गा मंदिर केवल पूजा-अर्चना का स्थल नहीं है, बल्कि सामाजिक समरसता और ग्रामीण एकता का भी प्रतीक है. महेशपुर पंचायत सहित आसपास के गांवों के लोग मिलकर पूजा और मेले का आयोजन करते हैं. सांस्कृतिक कार्यक्रमों और सामूहिक सहभागिता के कारण यह आयोजन पूरे क्षेत्र के लिए उत्सव का रूप ले लेता है.

कैसे पहुंचें

मणियारचक गांव लखीसराय जिले के अभयपुर रेलवे स्टेशन के निकट स्थित है. सड़क और रेल दोनों मार्गों से यहां आसानी से पहुंचा जा सकता है. चैत्र नवरात्र के दौरान प्रशासन द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए विशेष व्यवस्था भी की जाती है.

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Pratyush Prashant

लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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