100 डेज़ टीबी अभियान से हजारों लोगों की हुई जांच, छूटे हुए मरीज भी आ रहे सामने
Author Awadhesh kumar
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गांवों से लेकर शहरी बस्तियों तक स्वास्थ्यकर्मी लगातार लोगों को जागरूक कर रहे हैं कि दो सप्ताह से अधिक खांसी, लगातार बुखार, कमजोरी, रात में पसीना आना या तेजी से वजन कम होना जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत जांच कराना जरूरी है.
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-अधूरा इलाज बना रहा एमडीआर टीबी का खतरा, स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को किया सतर्क
-पोर्टेबल डिजिटल एक्स-रे और निक्षय पोषण योजना से गांवों तक पहुंच रही राहतकिशनगंज
टीबी केवल एक बीमारी नहीं, बल्कि ऐसी संक्रामक चुनौती है जिसे नजरअंदाज करना पूरे परिवार और समाज पर भारी पड़ सकता है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर जांच नहीं कराने और बीच में दवा छोड़ देने की आदत टीबी को और अधिक खतरनाक बना रही है. यही लापरवाही आगे चलकर एमडीआर टीबी जैसी गंभीर स्थिति में बदल जाती है, जिसका इलाज लंबा, कठिन और कई बार जानलेवा भी साबित हो सकता है. इसी खतरे को देखते हुए जिले में टीबी के खिलाफ चल रहा अभियान अब केवल मरीज खोजने तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि लोगों को यह समझाने पर भी जोर दिया जा रहा है कि अधूरा इलाज पूरे समाज के लिए खतरा बन सकता है. गांवों से लेकर शहरी बस्तियों तक स्वास्थ्यकर्मी लगातार लोगों को जागरूक कर रहे हैं कि दो सप्ताह से अधिक खांसी, लगातार बुखार, कमजोरी, रात में पसीना आना या तेजी से वजन कम होना जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत जांच कराना जरूरी है. जिले में 01 जनवरी 2026 से अब तक कुल 906 टीबी मरीजों की पहचान की गई है. इनमें सर्वाधिक 620 मरीज किशनगंज शहरी क्षेत्र से मिले हैं. इसके अलावा पोठिया में 91, दिघलबैंक में 36, बहादुरगंज में 26, कोचाधामन में 30, ठाकुरगंज में 14 तथा टेढ़ागाछ में 11 मरीज पाए गए हैं.100 डेज़ टीबी अभियान से बढ़ी जांच, 333 नए मरीजों की पहचान
स्वास्थ्य विभाग द्वारा चलाए जा रहे 100 डेज़ टीबी अभियान के अंतर्गत अब तक 17,920 लोगों की स्क्रीनिंग की गई है, जिसमें 333 नए टीबी मरीजों की पहचान हुई है. वहीं जिले में कुल 24,130 लोगों की जांच की जा चुकी है. स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगातार घर-घर जाकर संदिग्ध मरीजों की पहचान, बलगम जांच, एक्स-रे और आवश्यक चिकित्सकीय परामर्श दे रही हैं. विभाग का कहना है कि इस अभियान के कारण पहले छूटे हुए मरीज भी अब सामने आ रहे हैं और समय पर इलाज से जुड़ रहे हैं.जिला यक्ष्मा नियंत्रण पदाधिकारी डॉ मंजर आलम ने कहा कि टीबी का इलाज पूरी तरह संभव है, लेकिन मरीजों को दवा नियमित और पूरा लेना बेहद जरूरी है. उन्होंने कहा कि कई लोग थोड़ा ठीक महसूस होने पर दवा छोड़ देते हैं, जिससे बीमारी दोबारा गंभीर रूप ले लेती है और संक्रमण फैलने का खतरा भी बढ़ जाता है.उन्होंने बताया कि यदि किसी व्यक्ति को लगातार खांसी, कमजोरी या वजन कम होने जैसी समस्या हो तो उसे तुरंत जांच करानी चाहिए, क्योंकि समय पर पहचान ही टीबी को गंभीर होने से रोक सकती है.पोर्टेबल डिजिटल एक्स-रे से गांवों तक पहुंच रही जांच सुविधा
टीबी मरीजों की जल्द पहचान सुनिश्चित करने के लिए जिले में पोर्टेबल डिजिटल एक्स-रे मशीन की सहायता से गांवों और दूरदराज क्षेत्रों में भी जांच सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है. स्वास्थ्य विभाग की टीमें कैंप लगाकर मौके पर ही स्क्रीनिंग कर रही हैं.इस पहल से ऐसे लोगों को भी लाभ मिल रहा है जो अस्पताल तक नहीं पहुंच पाते. विभाग का मानना है कि शुरुआती अवस्था में बीमारी पकड़ में आने से मरीज जल्द ठीक हो सकते हैं और संक्रमण का खतरा भी कम होता है.निक्षय पोषण योजना से मरीजों को मिल रहा संबल
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि टीबी के इलाज में दवा के साथ पौष्टिक आहार भी उतना ही जरूरी है. इसी उद्देश्य से निक्षय पोषण योजना के तहत मरीजों के बैंक खातों में प्रतिमाह सहायता राशि भेजी जा रही है.इसके अलावा निक्षय मित्रों के माध्यम से जरूरतमंद मरीजों को पोषण पोटली भी उपलब्ध कराई जा रही है ताकि इलाज के दौरान उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत बनी रहे और मरीज जल्दी स्वस्थ हो सकें.एमडीआर टीबी बना चिंता का कारण, विभाग ने बढ़ाई निगरानी
जिले में एमडीआर टीबी के कुल 12 मरीज भी सामने आए हैं. इनमें किशनगंज शहरी क्षेत्र से 4 मरीज, दिघलबैंक से 2, बहादुरगंज से 1, कोचाधामन से 3, ठाकुरगंज से 2 तथा टेढ़ागाछ से 2 मरीज शामिल हैं. माता गुजरी मेडिकल कॉलेज के चिकित्सक डॉ शिव कुमार ने बताया कि एमडीआर टीबी मुख्यतः तब विकसित होती है, जब मरीज बीच में दवा छोड़ देते हैं या नियमित उपचार नहीं लेते. ऐसे मरीजों के लिए विशेष दवाओं और लगातार चिकित्सकीय निगरानी की आवश्यकता होती है. विभाग द्वारा सभी एमडीआर मरीजों की नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है.प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
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लेखक के बारे में
By अवधेश कुमार
अवधेश कुमार विगत 25 वर्षों से पत्रकारिता से जुड़े हुए हैं. इन्होंने बतौर पत्रकार अपने कैरियर की शुरूआत वर्ष 2001 से की. उसके बाद विगत 15 वर्षो से प्रभात खबर, किशनगंज के कार्यालय प्रभारी के रूप में कार्यरत हैं. इनकी रूचि राजनीतिक, सामाजिक व अपराध से जुड़ी खबरों में है.
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