जब किशनगंज–सिलीगुड़ी रेल खंड पर गूंजती थी '808' की सीटी; 112 साल बाद फिर जिंदा हुआ सीमांचल के गौरव का इतिहास
Published by : Divyanshu Prashant Updated At : 29 May 2026 10:29 AM
इंजन संख्या 808
Railway History: आज भले ही बुलेट ट्रेन और वंदे भारत जैसी अत्याधुनिक ट्रेनें पटरियों पर दौड़ रही हों, लेकिन क्या आप जानते हैं कि 100 साल पहले सीमांचल और उत्तर बंगाल के व्यापार की धड़कन एक ब्रिटिश स्टीम इंजन हुआ करता था? किशनगंज-सिलीगुड़ी रेलखंड पर राज करने वाले उसी ऐतिहासिक भाप इंजन '808' को 112 साल बाद रेलवे ने नया जीवन देकर मुख्यालय में स्थापित किया है.
ठाकुरगंज (किशनगंज) से बच्छराज नखत की रिपोर्ट
Railway History: भारतीय रेल के इतिहास और सीमांचल के गौरवशाली अतीत से जुड़ा एक बेहद दिलचस्प और भावुक करने वाला अध्याय 112 वर्ष बाद एक बार फिर जीवंत हो उठा है. आज भले ही रेल पटरियों पर अत्याधुनिक इलेक्ट्रिक (बिजली) और हाई-स्पीड डीजल इंजन दौड़ रहे हों, लेकिन एक दौर ऐसा भी था जब किशनगंज–सिलीगुड़ी रेलखंड पर कोयले की आग और भाप के सफेद बादल उड़ाते हुए विरासत स्टीम इंजन संख्या 808 की गूंजती सीटी दूर-दूर तक सुनाई देती थी. उस सीटी में एक पूरे दौर की औद्योगिक ताकत, रफ्तार और पहचान छिपी थी. पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (NFR) ने दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे की इस ऐतिहासिक धरोहर का भव्य जीर्णोद्धार (Restoration) कर इसे गुवाहाटी के मालीगांव स्थित मुख्यालय परिसर में नए अलौकिक स्वरूप में स्थापित किया है.
वर्ष 1914 में ब्रिटेन में हुआ था निर्माण, 800 टन वजन खींचने का था रिकॉर्ड
रेलवे के ऐतिहासिक दस्तावेजों और पन्नों को खंगालें, तो इस इंजन का इतिहास बेहद शानदार रहा है:
- ग्लासगो से कनेक्शन: इस ऐतिहासिक स्टीम लोकोमोटिव का निर्माण वर्ष 1914 में ब्रिटेन (स्कॉटलैंड) के ग्लासगो स्थित ‘नॉर्थ ब्रिटिश लोकोमोटिव कंपनी’ में किया गया था.
- व्यापार की लाइफलाइन: तत्कालीन समय में यह इंजन किशनगंज–सिलीगुड़ी रेलखंड की असली शान माना जाता था. अपने जुड़वां साथी इंजन संख्या 807 के साथ मिलकर यह इंजन इस दुर्गम और घुमावदार ट्रैक पर 800 टन तक की भारी-भरकम मालगाड़ियों को अकेले खींचता था.
उस दौर में जब सीमांचल और उत्तर बंगाल के इलाकों में पक्की सड़कों या राष्ट्रीय राजमार्गों का नामोनिशान नहीं था, तब यही भाप इंजन दार्जिलिंग के विश्वप्रसिद्ध चाय बागानों की उपज, स्थानीय कृषि उत्पाद, जूट और अन्य व्यापारिक सामानों को देश की मुख्य मंडियों तक पहुंचाने का एकमात्र जरिया था. यह इस पूरे क्षेत्र के व्यापारिक जीवन की असली धड़कन था.
मीटर गेज में बदलाव के बाद बदली भूमिका, 1960 में हुआ था रिटायर
बदलाव का दौर: देश की आजादी के बाद, वर्ष 1948 में जब सिलीगुड़ी–किशनगंज नैरो गेज लाइन को मीटर गेज (Meter Gauge) में परिवर्तित किया गया, तब इस विशालकाय इंजन की मुख्य भूमिका बदल गई. इसके बावजूद, इसे कबाड़ में फेंकने के बजाय सिलीगुड़ी जंक्शन पर ‘शंटिंग पायलट’ (ट्रेनों की बोगियों को आगे-पीछे करने वाले इंजन) के रूप में तैनात किया गया, जहां इसने वर्षों तक अपनी सेवाएं दीं.
अंततः 1960 के दशक में आधुनिक इंजनों के आगमन के बाद इसे आधिकारिक रूप से सेवामुक्त (Retire) कर दिया गया. लेकिन भारतीय रेलवे ने दूरदर्शिता दिखाते हुए इस नायाब लोहे के ढांचे को नष्ट करने के बजाय एक अनमोल धरोहर के रूप में संरक्षित रखा.
कृत्रिम धुएं और वास्तविक छुक-छुक की आवाज से सुसज्जित हुआ नया स्वरूप
हाल ही में मालीगांव स्थित एनएफआर (NFR) मुख्यालय में इस ऐतिहासिक इंजन के नवीनीकृत और आधुनिक स्वरूप का भव्य उद्घाटन महाप्रबंधक (GM) चेतन कुमार श्रीवास्तव द्वारा किया गया.
विरासत प्रदर्शनी की मुख्य विशेषताएं:
- आधुनिक लाइटिंग: इंजन को विशेष एंटीक रंग-रोगन और आकर्षक हेरिटेज एलईडी प्रकाश व्यवस्था से सजाया गया है.
- सिम्युलेटर इफेक्ट: दर्शकों को पुराने दौर का अहसास कराने के लिए इसमें कृत्रिम धुआं (Artificial Smoke) छोड़ने की मशीन और वास्तविक स्टीम इंजन जैसी ‘छुक-छुक’ व सीटी की ध्वनि प्रभाव (Sound Effects) को जोड़ा गया है.
रेलवे के आला अधिकारियों के अनुसार, यह केवल एक पुराने लोहे के इंजन की मरम्मत नहीं है, बल्कि उस गौरवशाली रेल इतिहास और इंजीनियरिंग कौशल को संरक्षित करने का एक ईमानदार प्रयास है, जिसने कभी किशनगंज और ठाकुरगंज अंचल को देश के मानचित्र पर व्यापारिक पहचान दिलाई थी. 112 वर्ष पुराना यह इंजन आज भी मालीगांव में खड़ा होकर आने-जाने वाले पर्यटकों को सीमांचल के स्वर्णिम भाप युग की गौरवगाथा सुना रहा है.
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By Divyanshu Prashant
दिव्यांशु प्रशांत वर्तमान में Prabhat Khabar डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। उन्होंने महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा से पत्रकारिता में परास्नातक तथा टी. एन. बी. कॉलेज भागलपुर से हिंदी साहित्य में स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। हिंदी साहित्य की पृष्ठभूमि होने के कारण उन्हें पढ़ने, लेखन और कविता-सृजन में विशेष रुचि है। मीडिया क्षेत्र में लगभग एक वर्ष के अनुभव के दौरान वे Dainik Jagran में न्यूज़ राइटर और रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं। करियर के शुरुआती दौर में लोकसभा और विधानसभा चुनावों से जुड़े पॉलिटिकल कंटेंट राइटिंग का विशेष अनुभव प्राप्त किया। सटीक, निष्पक्ष और प्रभावशाली लेखन के माध्यम से पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुँचाना उनकी पेशेवर पहचान है।
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