ट्रेन के शौचालय में गंदगी, स्टेशन के शौचालय पर ताला, आखिर यात्रियों की पीड़ा सुनेगा कौन?
बंद पड़ा शौचालय
Thakurganj Railway Station: ठाकुरगंज रेलवे स्टेशन पर बुधवार तड़के रुकी गरीब नवाज एक्सप्रेस के यात्रियों को रेल प्रशासन की संवेदनहीनता के कारण भारी फजीहत झेलनी पड़ी. अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत करोड़ों की लागत से संवर रहे इस स्टेशन पर यात्रियों के लिए बने शौचालयों में ताला लटके होने और पानी न होने से महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को बेहद असहज स्थिति का सामना करना पड़ा.
ठाकुरगंज (किशनगंज) से बच्छराज नखत की रिपोर्ट
Thakurganj Railway Station: भारतीय रेलवे को आधुनिक बनाने और स्टेशनों के कायाकल्प करने के दावों के बीच किशनगंज जिला अंतर्गत ठाकुरगंज रेलवे स्टेशन से बुनियादी सुविधाओं की पोल खोलती एक बेहद निराशाजनक तस्वीर सामने आई है. बुधवार तड़के जब डायवर्टेड रूट से चल रही अजमेर-किशनगंज गरीब नवाज एक्सप्रेस ठाकुरगंज स्टेशन पर आकर खड़ी हुई, तो रातभर का लंबा सफर तय कर पहुंचे यात्रियों की उम्मीदों पर उस समय पानी फिर गया जब उन्हें स्टेशन परिसर में एक अदद साफ शौचालय तक नसीब नहीं हुआ. ट्रेन के भीतर के वॉशरूम पहले से ही गंदगी से बेहाल थे और जब यात्रियों ने प्लेटफार्म का रुख किया तो वहां की व्यवस्था भी पूरी तरह ध्वस्त नजर आई.
तीन में से एक शौचालय पर मिला ताला, बाकी दो में पानी का अभाव
यात्रियों को झेलनी पड़ी इस घोर असुविधा और प्लेटफार्म की अव्यवस्था की मुख्य कड़ियां इस प्रकार हैं. कटिहार-किशनगंज रेलखंड पर चल रहे ब्लॉक के कारण पूर्णिया जंक्शन और अररिया कोर्ट होकर आई यह ट्रेन अपने निर्धारित समय रात 2:40 बजे के बजाय सुबह 3:22 बजे ठाकुरगंज पहुंची और फिर इंजन की खराबी के कारण घंटों खड़ी रही.
इस दौरान सबसे बदतर स्थिति जनरल बोगी के यात्रियों की हुई. प्लेटफार्म संख्या 1 पर यात्रियों की सुविधा के लिए बने कुल तीन शौचालयों में से एक पर बकायदा ताला लटका पाया गया, जबकि शेष बचे दो शौचालयों के नलों में पानी की एक बूंद तक उपलब्ध नहीं थी. सुबह के वक्त महिलाओं और बच्चों को शौच के लिए प्लेटफार्म पर इधर-उधर भटकते और मजबूरी में स्टेशन परिसर से बाहर जाते देखा गया.
करोड़ों के सौंदर्यीकरण के बीच बुनियादी जरूरतें गायब; रेल यात्री समिति ने जताया आक्रोश
“ठाकुरगंज रेलवे स्टेशन को अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत करोड़ों रुपये का बजट आवंटित कर चमकाया जा रहा है. स्टेशन की दीवारों और नए निर्माण कार्य को देखकर लगता है कि सब कुछ आधुनिक हो रहा है, लेकिन यात्रियों का दर्द यह है कि इस बाहरी चमक-दमक के फेर में उनकी सबसे प्राथमिक और बुनियादी जरूरतों को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया है.”
रेल प्रशासन से वैकल्पिक व्यवस्था मुस्तैद करने की उठी मांग
इस गंभीर विसंगति पर तीखा विरोध दर्ज कराते हुए ठाकुरगंज रेल यात्री समिति के सचिव सह वार्ड पार्षद अमित सिन्हा ने कहा कि रेलवे यात्रियों को बड़े-बड़े वीआईपी स्टेशनों के सपने तो दिखा रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट बेहद शर्मनाक है. उन्होंने मांग की कि यदि पुनर्विकास कार्य के चलते पुरानी कड़ियां प्रभावित हो रही हैं, तो कनिष्ठ रेल अभियंताओं को यात्रियों के लिए तुरंत वैकल्पिक मोबाइल टॉयलेट या पानी की अस्थाई व्यवस्था मुस्तैद करनी चाहिए थी.
स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों और भुक्तभोगी यात्रियों ने कटिहार रेल मंडल के वरिष्ठ अधिकारियों से इस लापरवाही का संज्ञान लेने और दोषियों पर कार्रवाई करते हुए स्टेशन पर मूलभूत नागरिक सुविधाएं अविलंब बहाल करने की मांग की है.
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By Divyanshu Prashant
दिव्यांशु प्रशांत वर्तमान में Prabhat Khabar डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। उन्होंने महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा से पत्रकारिता में परास्नातक तथा टी. एन. बी. कॉलेज भागलपुर से हिंदी साहित्य में स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। हिंदी साहित्य की पृष्ठभूमि होने के कारण उन्हें पढ़ने, लेखन और कविता-सृजन में विशेष रुचि है। मीडिया क्षेत्र में लगभग एक वर्ष के अनुभव के दौरान वे Dainik Jagran में न्यूज़ राइटर और रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं। करियर के शुरुआती दौर में लोकसभा और विधानसभा चुनावों से जुड़े पॉलिटिकल कंटेंट राइटिंग का विशेष अनुभव प्राप्त किया। सटीक, निष्पक्ष और प्रभावशाली लेखन के माध्यम से पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुँचाना उनकी पेशेवर पहचान है।
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