पौआखाली में रेलवे अंडरपास बना 'मुसीबत का टापू', जलजमाव से राहगीर परेशान; कीचड़ से गंदे हो रहे कपड़े
Published by : Divyanshu Prashant Updated At : 27 May 2026 1:46 PM
रेलवे अंडर पास
Railway Underpass: पौआखाली रेलवे स्टेशन और एनएच 327ई को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण अंडरपास के नीचे ड्रेनेज सिस्टम न होने से रेलवे की बड़ी लापरवाही सामने आई है. यहाँ थोड़ा सा पानी बरसते ही अंडरपास तालाब में तब्दील हो जाता है, जिससे राहगीरों के कपड़े तो गंदे हो ही रहे हैं, साथ ही वे हादसों का शिकार भी बन रहे हैं.
Railway Underpass: पौआखाली से रणविजय की रिपोर्ट: किशनगंज जिले के पौआखाली रेलवे स्टेशन के समीप और एनएच 327ई मार्ग से मालिनगांव जाने वाली सड़क के मोड़ पर रेलवे लाइन के नीचे बना अंडरपास ब्रिज इन दिनों आम जनता के लिए जी का जंजाल बन चुका है. प्री-मानसून की शुरुआती बारिश के कारण इस अंडरपास के नीचे भारी जलजमाव (Waterlogging) की स्थिति पैदा हो गई है. समुचित जलनिकासी की व्यवस्था न होने के कारण इस महत्वपूर्ण मार्ग से गुजरने वाले राहगीरों, स्कूली बच्चों और वाहन चालकों को हर दिन नारकीय स्थिति का सामना करना पड़ रहा है.
कीचड़युक्त पानी से कपड़े हो रहे गंदे, पैदल यात्रियों का चलना दूभर
स्थानीय ग्रामीणों और यात्रियों ने बताया कि जलजमाव के कारण अंडरपास के नीचे गहरा, सड़ा हुआ और गंदा पानी जमा हो गया है. इस संकीर्ण अंडरपास से जब भी कोई बड़ी गाड़ी या चार पहिया वाहन तेज रफ्तार में गुजरता है, तो गंदे पानी और कीचड़ के छींटे सीधे पैदल चल रहे लोगों और साइकिल सवारों पर आते हैं, जिससे उनके कपड़े पूरी तरह खराब हो जाते हैं. स्थिति इतनी खराब है कि इस खिंचाव में अब पैदल चलना भी दूभर हो गया है.
पानी के फेर में छिपे हैं जानलेवा गड्ढे, चौबीसों घंटे बनी रहती है दुर्घटना की आशंका
इस अंडरपास की बदहाली का सबसे खतरनाक पहलू यह है कि पानी जमा होने के कारण सड़क के बीचोबीच बने गहरे गड्ढे चालकों को दिखाई नहीं देते.
- आए दिन गिर रहे लोग: मोटरसाइकिल, ई-रिक्शा और साइकिल सवार इन अदृश्य गड्ढों के कारण असंतुलित होकर आए दिन पानी में गिरकर चोटिल हो रहे हैं.
- महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग: चूंकि यह सड़क एनएच 327ई से मालिनगांव और पौआखाली रेलवे स्टेशन को जोड़ने वाला इकलौता मुख्य मार्ग है, इसलिए यहाँ चौबीसों घंटे सघन आवागमन बना रहता है. ऐसे में रात के अंधेरे में यहाँ किसी बड़े हादसे की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता.
ड्रेनेज सिस्टम (नाली) की प्लानिंग गायब, रेलवे के दावों की खुली पोल
ग्रामीणों का फूटा आक्रोश: मालिनगांव मोड़ और रेलवे स्टेशन के समीप रहने वाले स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि रेलवे प्रशासन ने रेलवे लाइन के दोहरीकरण के वक्त अंडरपास का निर्माण तो आनंद-फानन में कर दिया, लेकिन इसके नीचे जमा होने वाले बरसाती पानी की निकासी हेतु किसी पुख्ता ड्रेनेज सिस्टम (पक्की नाली) का इंतजाम नहीं किया.
इंजीनियरों की इस तकनीकी खामी का खामियाजा आज हजारों भुक्तभोगी जनता को भुगतना पड़ रहा है. ग्रामीणों ने बताया कि इस गंभीर समस्या को लेकर स्थानीय स्तर से लेकर रेल मंडल के वरीय अधिकारियों तक कई बार लिखित शिकायतें भेजी जा चुकी हैं, लेकिन हर बार केवल आश्वासन मिलता है और धरातल पर स्थिति जस की तस (यथावत) बनी हुई है.
पक्की नाली निर्माण की मांग, आंदोलन की चेतावनी
परेशान ग्रामीणों और रेल यात्रियों ने रेलवे प्रशासन, स्थानीय जिला प्रशासन और क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों से पुरजोर मांग की है कि:
- अंडरपास के नीचे जमे हुए गंदे पानी को पंप सेट के जरिए तुरंत बाहर निकाला जाए और गड्ढों को राबिश (मलबा) डालकर भरा जाए.
- जलजमाव की समस्या के स्थाई समाधान के लिए अंडरपास के दोनों तरफ आरसीसी (RCC) पक्की नाली का निर्माण कराया जाए, ताकि पानी प्राकृतिक रूप से आगे बह सके.
स्थानीय निवासियों ने साफ लहजे में चेतावनी दी है कि यदि मानसून के पूरी तरह सक्रिय होने से पहले इस ‘डेथ ट्रैप’ बन चुके अंडरपास को दुरुस्त नहीं किया गया, तो वे मालिनगांव मोड़ पर एनएच 327ई को जाम कर अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन शुरू करेंगे.
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दिव्यांशु प्रशांत वर्तमान में Prabhat Khabar डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। उन्होंने महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा से पत्रकारिता में परास्नातक तथा टी. एन. बी. कॉलेज भागलपुर से हिंदी साहित्य में स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। हिंदी साहित्य की पृष्ठभूमि होने के कारण उन्हें पढ़ने, लेखन और कविता-सृजन में विशेष रुचि है। मीडिया क्षेत्र में लगभग एक वर्ष के अनुभव के दौरान वे Dainik Jagran में न्यूज़ राइटर और रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं। करियर के शुरुआती दौर में लोकसभा और विधानसभा चुनावों से जुड़े पॉलिटिकल कंटेंट राइटिंग का विशेष अनुभव प्राप्त किया। सटीक, निष्पक्ष और प्रभावशाली लेखन के माध्यम से पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुँचाना उनकी पेशेवर पहचान है।
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