डिजिटल इंडिया में मैनुअल दर्द! आजादी के 7 दशक बाद भी टीन की छत वाले एक कमरे में कैद पौआखाली उप डाकघर
Published by : Divyanshu Prashant Updated At : 04 Jun 2026 9:17 AM
पौआखाली उप डाकघर
Sub Post Office: केंद्र सरकार भले ही पूरे देश को हाई-टेक और डिजिटल बनाने का दावा कर रही हो, लेकिन किशनगंज जिले का पौआखाली उप-डाकघर आज भी अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है. जर्जर भवन, फर्नीचर की कमी और पीने के पानी तक की व्यवस्था न होने से यहाँ आने वाले हजारों उपभोक्ता और कर्मचारी इस भीषण गर्मी में प्रताड़ित होने को मजबूर हैं.
पौआखाली से रणविजय की रिपोर्ट
Sub Post Office: हम आज जिस दौर में जी रहे हैं, वह पूरी तरह से हाई-स्पीड इंटरनेट, 5G कनेक्टिविटी, ई-मेल और वॉट्सऐप का डिजिटल युग है. डाक विभाग ने भी खुद को बदलते हुए बैंकिंग से लेकर सुकन्या समृद्धि जैसी बड़ी बचत योजनाओं को ऑनलाइन मोड पर ला दिया है. लेकिन, किशनगंज जिले के ठाकुरगंज प्रखंड अंतर्गत पौआखाली उप-डाकघर (Sub Post Office) की जमीनी हकीकत को देखकर ऐसा लगता है कि यहाँ वक्त आज से 50 साल पहले ही ठहर गया है. देश की आजादी के सात दशक से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी यह महत्वपूर्ण डाकघर अपनी बुनियादी और ढांचागत बदहाली पर आंसू बहा रहा है. सीमावर्ती क्षेत्र के दर्जनों गांवों की लाइफलाइन माना जाने वाला यह पोस्ट ऑफिस आज अपनी बदहाली के सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है.
टीन की छत वाले एक संकीर्ण कमरे में सिमटा अस्तित्व; इंफ्रास्ट्रक्चर कबाड़
पौआखाली उप-डाकघर की इस बदहाली और उपभोक्ताओं को होने वाली व्यावहारिक परेशानियों को निम्नलिखित मुख्य बिंदुओं के माध्यम से समझा जा सकता है:
- तंग और जर्जर कमरा: यह डाकघर किसी बड़े या व्यवस्थित सरकारी भवन में नहीं, बल्कि एक बेहद छोटे, संकीर्ण और टीन की छत वाले निजी जर्जर कमरे में संचालित हो रहा है. जून की इस झुलसाने वाली गर्मी में टीन की छत भट्टी की तरह तपती है, जिससे भीतर बैठना किसी सजा से कम नहीं है.
- फर्नीचर और पेयजल का टोटा: डाकघर के भीतर काम करने वाले कर्मियों के लिए न तो पर्याप्त टेबल-कुर्सी की व्यवस्था है और न ही दूर-दराज के गांवों से पासबुक अपडेट कराने या पैसे निकालने आने वाले बुजुर्गों, महिलाओं व आम उपभोक्ताओं के लिए कोई बेंच या वेटिंग एरिया बनाया गया है. हद तो यह है कि इस भीषण तपन के बावजूद कार्यालय में पीने के शुद्ध पानी (पेयजल) की कोई व्यवस्था नहीं है; प्यास लगने पर लोगों को बाहर के चापाकालों या दुकानों पर निर्भर रहना पड़ता है.
सिस्टम आए पर सर्विस नहीं; डिजिटल काम में ‘मैनुअल’ रुकावटें
तकनीकी सुस्ती: वर्तमान में डाक विभाग का लगभग सारा काम कंप्यूटरीकृत हो चुका है, चाहे वह स्पीड पोस्ट हो, रजिस्ट्री हो या फिर विभिन्न बचत योजनाएं (आरडी/सुकन्या). लेकिन पौआखाली पोस्ट ऑफिस की विडंबना देखिए कि यहाँ विभाग द्वारा कंप्यूटर सिस्टम तो भेज दिए गए हैं, लेकिन तकनीकी कारणों से व्यवस्था को पूरी तरह से सुचारू रूप से चालू (Install) नहीं किया जा सका है. बुनियादी ढांचे के अभाव में कछुआ गति से हो रहे कार्यों के कारण उपभोक्ताओं को घंटों कतार में खड़ा रहना पड़ता है.
दर्जनों गांवों के हजारों लोग आज भी इसी डाकघर पर निर्भर: ग्रामीण
जनता का आक्रोश:
डाकघर पहुंचे स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों और खाताधारकों ने रोष जताते हुए कहा कि पौआखाली को उप-डाकघर का दर्जा तो मिल गया है, लेकिन सुविधाएं किसी सुदूर ग्रामीण फ्रेंचाइजी जैसी भी नहीं हैं. लोग यहाँ अपनी गाढ़ी कमाई जमा करने और जरूरी सरकारी दस्तावेज पोस्ट करने आते हैं, पर प्रशासन की बेरुखी के कारण यहाँ पैर रखने की भी जगह नहीं मिलती. ग्रामीणों ने डाक विभाग के उच्चाधिकारियों और किशनगंज जिला प्रशासन से मांग की है कि इस उप-डाकघर को अविलंब किसी बड़े सरकारी या अच्छे किराए के भवन में शिफ्ट किया जाए, जहाँ बिजली, पंखे, काउंटर और शुद्ध पेयजल जैसी न्यूनतम सुविधाएं उपलब्ध हों.
क्या कहते हैं उप-डाकघर के पोस्ट मास्टर?
इस पूरे मामले और अव्यवस्था के बाबत जब पौआखाली उप-डाकघर के पोस्ट मास्टर से बात की गई, तो उन्होंने संसाधनों की कमी की बात स्वीकार की. उन्होंने कहा, “यह सच है कि हमारे पास वर्तमान में भवन और पर्याप्त साधनों का अभाव है, लेकिन इन विपरीत परिस्थितियों के बावजूद हम ग्राहकों को बेहतर से बेहतर सेवा प्रदान करने के लिए पूरी जिम्मेदारी से जुटे हैं. राहत की बात यह है कि हमारे यहाँ हाल ही में बिजली की सुविधा बहाल हो पाई है और डिजिटल सेवाओं को मूर्त रूप देने के लिए कंप्यूटर व अन्य उपकरण भी आ चुके हैं. तकनीकी टीम द्वारा इन सिस्टम्स को पूरी तरह एक्टिवेट करने का काम जारी है और बहुत जल्द हमारे सम्मानित ग्राहकों को सभी सेवाओं का हाई-टेक डिजिटल लाभ मिलने लगेगा.”
अब देखना यह है कि डाक विभाग के वरीय अधिकारी पौआखाली की इस जमीनी चीख को कब सुनते हैं और यहाँ के उपभोक्ताओं को इस नारकीय स्थिति से कब तक मुक्ति मिल पाती है.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Divyanshu Prashant
दिव्यांशु प्रशांत वर्तमान में Prabhat Khabar डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। उन्होंने महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा से पत्रकारिता में परास्नातक तथा टी. एन. बी. कॉलेज भागलपुर से हिंदी साहित्य में स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। हिंदी साहित्य की पृष्ठभूमि होने के कारण उन्हें पढ़ने, लेखन और कविता-सृजन में विशेष रुचि है। मीडिया क्षेत्र में लगभग एक वर्ष के अनुभव के दौरान वे Dainik Jagran में न्यूज़ राइटर और रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं। करियर के शुरुआती दौर में लोकसभा और विधानसभा चुनावों से जुड़े पॉलिटिकल कंटेंट राइटिंग का विशेष अनुभव प्राप्त किया। सटीक, निष्पक्ष और प्रभावशाली लेखन के माध्यम से पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुँचाना उनकी पेशेवर पहचान है।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










