बरसात से पहले कटावरोधी कार्य नहीं हुआ तो रेतुआ नदी में समा जाएगा आशा धापरटोला, ग्रामीणों ने लगाई गुहार

Published by : AWADHESH KUMAR Updated At : 31 May 2026 6:46 PM

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कटाव से प्रभावित कई परिवार आज भी सड़क किनारे अथवा अस्थायी ठिकानों पर रहने को मजबूर हैं.

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रेतुआ नदी के कटाव से आशा धापरटोला गांव पर मंडराया खतरा, ग्रामीणों में दहशत

किशनगंज

टेढ़ागाछ प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत झुनकी मुसहरा पंचायत के वार्ड संख्या एक स्थित आशा धापरटोला गांव पर रेतुआ नदी के कटाव का गंभीर खतरा मंडरा रहा है. बरसात का मौसम नजदीक आते ही ग्रामीणों की चिंता बढ़ गयी है. स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कटावरोधी कार्य नहीं कराए गये तो गांव के दर्जनों परिवार बेघर हो सकते हैं और उनके घर रेतुआ नदी की धारा में समा सकते हैं. ग्रामीणों ने बताया कि पिछले वर्ष भी नदी के तेज कटाव के कारण कई परिवारों के घर नदी में विलीन हो गये थे. कटाव से प्रभावित कई परिवार आज भी सड़क किनारे या अस्थायी ठिकानों पर जीवन यापन करने को मजबूर हैं.

स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं

बाढ़ और कटाव की मार झेल चुके इन परिवारों के सामने आजीविका और आवास की गंभीर समस्या बनी हुई है. इसके बावजूद अब तक स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हो पायी है. ग्रामीणों का कहना है कि हर वर्ष बरसात में रेतुआ नदी का जलस्तर बढ़ते ही कटाव तेज हो जाता है, जिससे गांव का अस्तित्व संकट में पड़ जाता है. ग्रामीणों ने आशंका जतायी है कि इस बार भी यदि समय रहते सुरक्षा उपाय नहीं किए गये तो बड़ी आबादी प्रभावित हो सकती है. उन्होंने जिला प्रशासन से तत्काल स्थल निरीक्षण कर आवश्यक सुरक्षात्मक कार्य शुरू कराने की मांग की है. लोगों ने आग्रह किया कि बरसात शुरू होने से पहले बोल्डर पिचिंग, तटबंध सुदृढ़ीकरण तथा अन्य जरूरी उपाय कराए जायें, ताकि गांव को कटाव से बचाया जा सके और जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके.

वर्षों से कटाव की समस्या झेल रहे हैं आशा धापरटोला के लोग

इस संबंध में क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता एवं जनप्रतिनिधि इस्माइल आलम, मोजीब आलम, मोहम्मद फेफसू, वार्ड सदस्य नसीद आलम तथा मोहम्मद लतीफ आलम ने भी प्रशासन का ध्यान इस गंभीर समस्या की ओर आकर्षित किया है. उन्होंने कहा कि आशा धापरटोला के लोग वर्षों से कटाव की समस्या झेल रहे हैं और अब तत्काल कार्रवाई आवश्यक है. इन लोगों ने मांग की है कि प्रभावित परिवारों की सुरक्षा और गांव के अस्तित्व को बचाने के लिए युद्धस्तर पर कटावरोधी कार्य शुरू किया जाये. ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रशासन समय रहते कदम उठाता है तो बड़ी आबादी को विस्थापन की त्रासदी से बचाया जा सकता है. अब क्षेत्रवासियों की निगाहें जिला प्रशासन और संबंधित विभाग की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं.

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